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लीवर की सेहत और एलानिन एमिनोट्रांसफरेज (एएलटी) परीक्षण

संदर्भ   

  • मानव शरीर में लीवर सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह भोजन को ऊर्जा में बदलने, विषैले तत्वों को शरीर से बाहर निकालने, पाचन में सहायता करने और कई आवश्यक प्रोटीन बनाने जैसे महत्वपूर्ण कार्य करता है। लेकिन समस्या यह है कि लीवर लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी प्रभावित हो सकता है। ऐसे में समय रहते बीमारी का पता लगाने के लिए कुछ जांचें बेहद उपयोगी साबित होती हैं, जिनमें एएलटी (SGPT) टेस्ट प्रमुख माना जाता है।  
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हर वर्ष दुनिया में लगभग 20 लाख लोगों की मृत्यु लीवर संबंधी बीमारियों के कारण होती है। वायरल हेपेटाइटिस, फैटी लीवर, सिरोसिस और अन्य लीवर रोगों के बढ़ते मामलों को देखते हुए समय पर जांच और उपचार की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।  

क्या है एएलटी (SGPT) टेस्ट?  

  • एएलटी (Alanine Aminotransferase), जिसे सीरम ग्लूटामिक-पाइरुविक ट्रांसएमिनेज (SGPT) भी कहा जाता है, एक ऐसा एंजाइम है जो मुख्य रूप से लीवर की कोशिकाओं में पाया जाता है। जब किसी कारणवश लीवर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है या उनमें सूजन आती है, तो यह एंजाइम रक्त में पहुंच जाता है। इसी कारण रक्त में एएलटी का बढ़ा हुआ स्तर लीवर में हो रही क्षति का प्रारंभिक संकेत माना जाता है। 
  • हालांकि एएलटी केवल लीवर में ही नहीं बल्कि हृदय और मांसपेशियों में भी थोड़ी मात्रा में मौजूद होता है। इसलिए इसकी बढ़ी हुई मात्रा हमेशा लीवर की बीमारी का प्रमाण नहीं होती। सही कारण जानने के लिए चिकित्सक अन्य जांचों की भी सलाह देते हैं। 

लीवर फंक्शन टेस्ट में क्यों शामिल होता है एएलटी? 

  • एएलटी, लीवर फंक्शन टेस्ट (LFT) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस जांच के माध्यम से डॉक्टर लीवर की कार्यक्षमता और उसमें हो रही संभावित क्षति का प्रारंभिक आकलन कर सकते हैं। 
  • हालांकि केवल एएलटी के सामान्य होने का अर्थ यह नहीं है कि लीवर पूरी तरह स्वस्थ है। कई बार फैटी लीवर या लीवर सिरोसिस जैसी गंभीर स्थितियों में भी एएलटी सामान्य या बहुत कम बढ़ा हुआ पाया जा सकता है। इसलिए किसी भी रिपोर्ट की व्याख्या मरीज की संपूर्ण स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर ही की जाती है।  

एएलटी टेस्ट कैसे किया जाता है? 

  • यह एक सामान्य रक्त जांच है, जिसमें रक्त का छोटा-सा नमूना लेकर प्रयोगशाला में परीक्षण किया जाता है। इसकी रिपोर्ट आमतौर पर उसी दिन या कुछ घंटों के भीतर उपलब्ध हो जाती है।
  • अधिकांश प्रयोगशालाएं 40 यूनिट प्रति लीटर से कम एएलटी को सामान्य मानती हैं, लेकिन यह सीमा सभी लोगों के लिए समान नहीं होती। जिन लोगों को पहले से हेपेटाइटिस-बी या हेपेटाइटिस-सी जैसी बीमारी है, उनके लिए चिकित्सक अलग मानकों के आधार पर रिपोर्ट का मूल्यांकन करते हैं। 

किन लोगों को नियमित जांच करानी चाहिए?  

  • विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य स्वस्थ वयस्कों के लिए वर्ष में एक बार स्वास्थ्य परीक्षण के साथ एएलटी जांच कराना पर्याप्त हो सकता है। लेकिन कुछ लोगों में लीवर रोग का खतरा अधिक होता है और उन्हें चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित अंतराल पर जांच करानी चाहिए। जिनमें शामिल हैं - 
    • मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति
    • मधुमेह के मरीज
    • थायरॉयड रोग से पीड़ित लोग
    • उच्च कोलेस्ट्रॉल वाले व्यक्ति
    • वायरल हेपेटाइटिस से संक्रमित मरीज
    • लंबे समय तक दवाइयों का सेवन करने वाले लोग
    • नियमित शराब का सेवन करने वाले व्यक्ति
    • जिनके परिवार में लीवर रोग का इतिहास हो
    • शारीरिक रूप से निष्क्रिय (Sedentary Lifestyle) जीवनशैली अपनाने वाले लोग 

एएलटी बढ़ने के कारण 

रक्त में एएलटी का स्तर कई कारणों से बढ़ सकता है। इनमें प्रमुख हैं-

  • वायरल हेपेटाइटिस
  • शराब से होने वाली लीवर क्षति
  • फैटी लीवर (MASLD)
  • ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस
  • अन्य दीर्घकालिक लीवर रोग

ध्यान देने वाली बात यह है कि लीवर में स्वयं को पुनर्जीवित करने की अद्भुत क्षमता होती है। यही कारण है कि शुरुआती या मध्यम अवस्था में लीवर को नुकसान पहुंचने के बावजूद अधिकांश लोगों में कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। कई बार बीमारी का पता तब चलता है, जब वह काफी आगे बढ़ चुकी होती है। इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच का विशेष महत्व है। 

यदि एएलटी बढ़ा हुआ मिले तो क्या करें? 

  • एएलटी का बढ़ा हुआ स्तर किसी बीमारी का अंतिम निदान नहीं है, बल्कि यह संकेत देता है कि आगे विस्तृत जांच की आवश्यकता है। चिकित्सक आमतौर पर संपूर्ण लीवर फंक्शन टेस्ट, अन्य रक्त परीक्षण और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त जांचों के माध्यम से कारण का पता लगाते हैं। 
  • यदि लीवर रोग की पुष्टि होती है, तो उपचार उसी बीमारी के अनुसार किया जाता है। वायरल हेपेटाइटिस और ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस जैसी स्थितियों में दवा आवश्यक होती है, जबकि फैटी लीवर जैसी बीमारियों में जीवनशैली में सुधार सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है। 

स्वस्थ लीवर के लिए अपनाएं ये आदतें 

लीवर को लंबे समय तक स्वस्थ रखने के लिए कुछ सरल लेकिन प्रभावी उपाय अपनाए जा सकते हैं -

  • संतुलित और पौष्टिक भोजन करें।
  • शरीर का वजन नियंत्रित रखें।
  • नियमित व्यायाम या शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
  • शराब के सेवन से बचें या उसे सीमित करें।
  • अधिक तैलीय, संतृप्त वसा, मीठे और परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें।
  • डॉक्टर की सलाह के बिना लंबे समय तक दवाइयों का सेवन न करें।
  • समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराते रहें। 

निष्कर्ष

  • लीवर संबंधी कई बीमारियां लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित होती रहती हैं। ऐसे में एएलटी (SGPT) टेस्ट एक उपयोगी प्रारंभिक जांच है, जो संभावित लीवर क्षति की ओर संकेत कर सकती है। 
  • हालांकि केवल एएलटी के आधार पर किसी बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता, लेकिन नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और समय पर चिकित्सकीय परामर्श से गंभीर लीवर रोगों की पहचान शुरुआती चरण में संभव है। स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार और नियमित जांच ही लीवर को लंबे समय तक स्वस्थ बनाए रखने का सबसे प्रभावी उपाय हैं।  
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