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डेबिट कार्ड और न्यूनतम बैलेंस शुल्क में तीव्र बढ़ोतरी

संदर्भ 

भारत में बैंकिंग सेवाओं का उपयोग धीरे-धीरे आम ग्राहकों के लिए अधिक महंगा होता जा रहा है। संसद में सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण से संकेत मिलता है कि पिछले कुछ वर्षों में डेबिट कार्ड के वार्षिक रखरखाव शुल्क और न्यूनतम औसत बैलेंस न रखने पर लगाए जाने वाले शुल्क में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

डेबिट कार्ड रखने की लागत लगभग दोगुनी 

  • वित्त मंत्रालय द्वारा राज्यसभा में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, देश के 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वर्ष 2021-22 में डेबिट कार्ड के वार्षिक रखरखाव शुल्क के रूप में ₹3,905.5 करोड़ की राशि एकत्र की थी। वर्ष 2025-26 तक यह आंकड़ा बढ़कर ₹7,563.8 करोड़ पहुंच गया, जो लगभग 94 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
  • सिर्फ कुल संग्रह को देखने से यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि शुल्क ही बढ़ा है, क्योंकि इस दौरान डेबिट कार्डों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। इसी कारण आरबीआई के डेबिट कार्ड संबंधी आंकड़ों के आधार पर प्रति कार्ड औसत शुल्क का विश्लेषण किया गया। 
  • इससे पता चला कि 2021-22 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक प्रत्येक डेबिट कार्ड पर औसतन ₹61 वार्षिक शुल्क वसूल रहे थे, जबकि 2025-26 में यह बढ़कर ₹115.1 प्रति कार्ड हो गया। यानी प्रति कार्ड औसत शुल्क में लगभग 89 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

न्यूनतम बैलेंस नहीं रखने पर भी बढ़ा शुल्क

  • राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक और निजी बैंकों द्वारा न्यूनतम औसत बैलेंस बनाए नहीं रखने पर वसूले गए शुल्क का विवरण भी प्रस्तुत किया। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 में दोनों श्रेणी के बैंकों ने इस मद से कुल ₹7,086.6 करोड़ की वसूली की, जो 2022-23 की तुलना में 27 प्रतिशत अधिक है।
  • हालांकि यह वृद्धि केवल शुल्क बढ़ने के कारण नहीं मानी जा सकती, क्योंकि इस अवधि में बैंक खातों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। उल्लेखनीय है कि बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट (BSBDA) तथा प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के अंतर्गत खोले गए खातों पर यह शुल्क लागू नहीं होता। गैर-पीएमजेडीवाई खातों के आधार पर किए गए विश्लेषण से पता चलता है कि प्रति खाते औसत शुल्क 2022-23 में ₹31 था, जो 2025-26 में बढ़कर लगभग ₹38 तक पहुंच गया। 

निजी बैंकों की वजह से बढ़ा औसत 

  • विस्तृत आंकड़ों से यह भी सामने आया कि न्यूनतम बैलेंस संबंधी शुल्क में कुल वृद्धि का प्रमुख कारण निजी बैंक हैं। निजी बैंकों में प्रति खाते औसत शुल्क 2022-23 की तुलना में लगभग 45 प्रतिशत बढ़ गया, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में यही शुल्क करीब 14 प्रतिशत कम हो गया।
  • वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में से 10 ने बचत खातों में न्यूनतम औसत बैलेंस न रखने पर लगने वाले दंडात्मक शुल्क को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। शेष दो बैंकों ने भी अपनी बोर्ड द्वारा स्वीकृत नीतियों और व्यावसायिक आवश्यकताओं के अनुरूप इन शुल्कों को संशोधित और तर्कसंगत बनाया है। 

मासिक औसत बैलेंस (AMB) क्या है? 

  • मासिक औसत बैलेंस (AMB) वह न्यूनतम राशि है, जिसे खाताधारक को अपने बचत या चालू खाते (Current Account) में पूरे महीने के दौरान औसतन बनाए रखना होता है। 
  • यदि ग्राहक निर्धारित औसत बैलेंस बनाए रखने में असफल रहता है, तो संबंधित बैंक या वित्तीय संस्थान उससे न्यूनतम बैलेंस न रखने का शुल्क (Non-Maintenance Charges) वसूल सकता है। 
  • यह व्यवस्था बैंक खातों को सक्रिय और नियमित रूप से संचालित रखने के उद्देश्य से लागू की जाती है।

भारत में बचत खाते (Savings Account):

  • ऐसे खाते, जिनमें मासिक औसत बैलेंस (Monthly Average Balance) बनाए रखना अनिवार्य होता है।
  • ऐसे खाते, जिनमें न्यूनतम मासिक औसत बैलेंस रखने की कोई अनिवार्यता नहीं होती।

मासिक औसत बैलेंस (AMB) की गणना:

मासिक औसत बैलेंस की गणना करने के लिए महीने के प्रत्येक कार्य दिवस के अंत (Closing Balance) पर खाते में मौजूद राशि को जोड़ा जाता है और फिर उस कुल राशि को महीने के कुल दिनों की संख्या से विभाजित किया जाता है। 

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