हाल ही में शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (DoSEL) ने सकुरा साइंस प्रोग्राम 2026 के लिए चयनित भारतीय विद्यार्थियों के एक प्रतिनिधिमंडल को नई दिल्ली स्थित National Council of Educational Research and Training (एनसीईआरटी) से जापान के लिए रवाना किया।

सकुरा साइंस प्रोग्राम (Sakura Science Programme)
- सकुरा साइंस प्रोग्राम (Sakura Science Programme) जापान का एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय छात्र विनिमय कार्यक्रम है, जिसे आधिकारिक रूप से Japan-Asia Youth Exchange Program in Science कहा जाता है।
- इस कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2014 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य एशिया और अन्य देशों के युवाओं में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रति रुचि विकसित करना, वैज्ञानिक जिज्ञासा को बढ़ावा देना तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत बनाना है। भारत ने इस कार्यक्रम में वर्ष 2016 से भाग लेना प्रारम्भ किया।
- यह कार्यक्रम जापान की प्रमुख संस्था Japan Science and Technology Agency (JST) द्वारा संचालित किया जाता है।
- इसके अंतर्गत चयनित विद्यार्थियों को अल्पकालिक अवधि के लिए जापान आमंत्रित किया जाता है, जहाँ उन्हें जापान की अत्याधुनिक वैज्ञानिक एवं तकनीकी उपलब्धियों के साथ-साथ उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को निकट से जानने और समझने का अवसर प्राप्त होता है।
कार्यक्रम के उद्देश्य
- सकुरा साइंस प्रोग्राम का उद्देश्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नवाचार करने वाली वैश्विक प्रतिभाओं का विकास करना है।
- यह कार्यक्रम विभिन्न देशों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों और शोधार्थियों को एक साझा मंच प्रदान करता है, जिससे वे एक-दूसरे के अनुभवों और ज्ञान से लाभान्वित हो सकें।
कार्यक्रम के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं—
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भविष्य के नवप्रवर्तकों और प्रतिभाशाली मानव संसाधनों का विकास करना।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्ञान, कौशल और प्रतिभा के आदान-प्रदान (International Brain Circulation) को बढ़ावा देना।
- जापान और अन्य देशों के शैक्षणिक तथा अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत करना।
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित कूटनीति (Science Diplomacy) को प्रोत्साहित करना।
- विभिन्न देशों के युवाओं के बीच पारस्परिक समझ, सहयोग और मित्रता को बढ़ाना।
सकुरा साइंस प्रोग्राम 2026 : भारतीय प्रतिनिधिमंडल
- वर्ष 2026 के लिए भारत से कुल 56 विद्यार्थियों और 4 पर्यवेक्षकों (Supervisors) का चयन किया गया है। यह प्रतिनिधिमंडल 24 मई से 30 मई 2026 तक जापान की यात्रा करेगा। इस कार्यक्रम में भारत के अलावा घाना, नाइजीरिया और दक्षिण अफ्रीका के विद्यार्थी भी भाग ले रहे हैं।
- भारतीय प्रतिनिधिमंडल में 24 छात्र और 32 छात्राएँ शामिल हैं। ये सभी विद्यार्थी देश के विभिन्न सरकारी विद्यालयों से चयनित किए गए हैं।
- प्रतिनिधिमंडल में असम, दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव, गोवा, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल सहित 15 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के विद्यार्थी शामिल हैं।
राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना से संबंध
- सकुरा साइंस प्रोग्राम 2026 में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थी भारत सरकार की National Means-cum-Merit Scholarship Scheme (National Means-cum-Merit Scholarship Scheme) के लाभार्थी हैं।
- यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन मेधावी विद्यार्थियों को उनकी शिक्षा जारी रखने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
जापान में विद्यार्थियों को मिलने वाले अवसर
- इस कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों को जापान के प्रमुख वैज्ञानिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों, अनुसंधान केंद्रों और तकनीकी प्रतिष्ठानों का भ्रमण कराया जाता है।
- उन्हें आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों, प्रयोगशालाओं और नवाचारों को प्रत्यक्ष रूप से देखने का अवसर मिलता है।
- इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों को जापानी संस्कृति, परंपराओं, सामाजिक मूल्यों और शिक्षा प्रणाली से भी परिचित कराया जाता है।
- इस प्रकार यह कार्यक्रम केवल वैज्ञानिक ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
भारत की भागीदारी और उपलब्धियाँ
- भारत वर्ष 2016 से इस कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार अब तक इस कार्यक्रम के अंतर्गत 674 भारतीय विद्यार्थी और 96 पर्यवेक्षक जापान की यात्रा कर चुके हैं। इससे पूर्व भारतीय विद्यार्थियों का एक दल अगस्त 2025 में जापान गया था।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप
- सकुरा साइंस प्रोग्राम भारत की National Education Policy 2020 की भावना के अनुरूप है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 समग्र, अनुभवात्मक और व्यावहारिक शिक्षा पर बल देती है। इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक भ्रमण विद्यार्थियों के ज्ञान, कौशल, रचनात्मकता और वैश्विक दृष्टिकोण का विस्तार करते हैं।
- विद्यार्थियों को वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक महत्व के स्थलों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त होता है, जिससे उनमें नवाचार, अनुसंधान और वैश्विक समझ विकसित होती है।