New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th July 2026, 6:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 5th July 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 20th July 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 15th July 2026, 8:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th July 2026, 6:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 5th July 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 20th July 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 15th July 2026, 8:00 AM

IMPORTANT TERMINOLOGY

पाठ्यक्रम में उल्लिखित विषयों की पारिभाषिक शब्दावलियों एवं देश-दुनिया में चर्चा में रही शब्दावलियों से परीक्षाओं में प्रश्न पूछे जाने का चलन तेजी से बढ़ा है। यह खंड वस्तुनिष्ठ और लिखित दोनों परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है। शब्दावलियों से परिचय अभ्यर्थियों को कम परिश्रम से अधिक अंक लाने में मदद करता है। इस खंड में प्रतिदिन एक महत्वपूर्ण शब्दावली से परिचय कराया जाता है।

प्रतिदिन की सबसे महत्वपूर्ण News पढ़ने के लिए यहाँ Click करें

1. लेटेंसी (Latency)

04-Dec-2025

लेटेंसी वह समय है जो किसी संदेश, डेटा या संकेत को भेजने से लेकर प्राप्त होने तक लगता है। यानी यह ‘विलंब’ या ‘देर’ को दर्शाता है। नेटवर्क, कंप्यूटर या इंटरनेट में कम लेटेंसी का अर्थ तेज़ प्रतिक्रिया और बेहतर प्रदर्शन होता है।

2. सुपरसॉलिड (Supersolid)

03-Dec-2025

सुपरसॉलिड एक विशेष प्रकार का ठोस पदार्थ है। इसमें ठोस की तरह अणु एक जगह स्थिर रहते हैं, लेकिन कुछ अणु तरल की तरह बिना रुकावट के बह सकते हैं। यानी यह ठोस और तरल दोनों जैसी विशेषताएँ दिखाता है। यह स्थिति बहुत ही कम तापमान पर ही बनती है।

3. ऑटोफैगी (Autophagy)

02-Dec-2025

ऑटोफैगी एक प्राकृतिक सेलुलर प्रक्रिया है जिसमें शरीर अपने पुराने, क्षतिग्रस्त या बेकार कोशिका अंगों और प्रोटीन को साफ करता है और उन्हें रीसायकल करता है। यह स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है क्योंकि यह सेलुलर घटकों को पुनर्जीवित करने में मदद करती है, जो तनाव या भुखमरी के दौरान ऊर्जा की मांग को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण है। ऑटोफैगी को अक्सर उपवास के माध्यम से शुरू किया जाता है।

4. न्यूरोमॉर्फिक इंजीनियरिंग (Neuromorphic Engineering)

01-Dec-2025

न्यूरोमॉर्फिक इंजीनियरिंग वह तकनीकी क्षेत्र है जिसमें मानव मस्तिष्क की संरचना और कार्य-प्रणाली की नकल करके ऐसे इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, चिप और कंप्यूटेशनल मॉडल बनाए जाते हैं जो कम ऊर्जा में तेज, अनुकूलनशील और बुद्धिमान निर्णय लेने में सक्षम हों। इसका उद्देश्य मशीनों को मस्तिष्क जैसी सीखने और जानकारी संसाधित करने की क्षमता देना है।

5. होलोग्राफी (Holography)

29-Nov-2025

होलोग्राफी वह तकनीक है, जिससे किसी वस्तु की तीन-आयामी (3D) छवि बनाई जाती है। इसमें लेज़र की मदद से वस्तु से निकली रोशनी को रिकॉर्ड किया जाता है। इस रिकॉर्डिंग को विशेष प्रकाश से देखने पर वास्तविक वस्तु जैसी 3D छवि दिखाई देती है, जिससे वस्तु को अलग-अलग कोणों से देखा जा सकता है।

6. टेक्नोस्फियर (Technosphere)

27-Nov-2025

टेक्नोस्फियर पृथ्वी पर मानव-निर्मित सभी संरचनाओं, तकनीकी प्रणालियों, औद्योगिक नेटवर्क, परिवहन अवसंरचनाओं, सूचना तंत्रों आदि का सम्मिलित कृत्रिम पारिस्थितिक क्षेत्र है, जो प्राकृतिक वातावरण से संसाधन लेकर मानव समाज को संचालित करता है।

7. ट्रांसह्यूमनिज़्म (Transhumanism)

26-Nov-2025

ट्रांसह्यूमनिज़्म, मानव क्षमता और मानव स्थिति को बुद्धि और प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोगों; जैसे कि आनुवंशिक इंजीनियरिंग, नैनो टेक्नोलॉजी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आदि से सुधारने की इच्छा रखने वाला एक दार्शनिक, बौद्धिक और सांस्कृतिक आंदोलन है।

8. मोंटे कार्लो सिमुलेशन  (Monte Carlo simulation)

24-Nov-2025

मोंटे कार्लो सिमुलेशन एक सांख्यिकीय तकनीक है जिसमें जटिल समस्याओं का समाधान यादृच्छिक नमूनों और संभाव्यता आधारित परीक्षणों के माध्यम से किया जाता है। यह विधि अनिश्चितता, जोखिम और जटिल प्रणालियों के व्यवहार का अनुमान लगाने के लिए प्रयोग की जाती है।

9. फोटोसिंथेटिक क्षमता (Photosynthetic Efficiency)

22-Nov-2025

प्रकाशसंश्लेषण क्षमता वह दक्षता है जिसके द्वारा पौधे सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा को प्रकाश संश्लेषण के दौरान स्थायी रासायनिक ऊर्जा (ग्लूकोज) में परिवर्तित करते हैं। यह उत्पादित रासायनिक ऊर्जा और पौधे द्वारा अवशोषित प्रकाश ऊर्जा का अनुपात है।

10. ग्रेविटी लेंसिंग (Gravitational Lensing)

21-Nov-2025

यह खगोल विज्ञान की घटना है जिसमें किसी भारी वस्तु (जैसे ग्रह, तारा या ब्लैक होल) के गुरुत्वाकर्षण के कारण उसके पीछे से गुजरने वाली रोशनी का मार्ग मुड़ जाता है। इसके परिणामस्वरूप दूर के खगोलीय पिंड का प्रतिबिंब बड़ा, विकृत या कई रूपों में दिखाई देता है। यह ब्रह्मांडीय संरचना और डार्क मैटर अध्ययन में उपयोगी है।

upsc english
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR