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भारत में अपराध की स्थिति

  • 15th September, 2022

(प्रारंभिक परीक्षा- राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2 : शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्त्वपूर्ण पक्ष)

संदर्भ

हाल ही में, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Records Bureau : NCRB) ने ‘भारत में अपराध’ (Crime in India) नामक अपनी वार्षिक रिपोर्ट का 69वां संस्करण प्रकाशित किया। इसमें वर्ष 2021 के आंकड़ों को प्रकाशित किया गया है। यह रिपोर्ट वर्ष 1953 से प्रकाशित की जा रही है। 

प्रमुख बिंदु : आँकड़ेवार अध्ययन 

पंजीकृत अपराधों की संख्या 

  • आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 में देश भर में कुल 60,96,310 संज्ञेय अपराध पंजीकृत किये गए। इनमें से 36,63,360 अपराध भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत शामिल हैं और 24,32,950 अपराध विशेष एवं स्थानीय कानून (SLL) के तहत दर्ज किये गए।
  • वर्ष 2020 की तुलना में वर्ष 2021 में पंजीकृत मामलों की संख्या में 7.6% की कमी आई है
  • वर्ष 2021 में प्रति लाख जनसंख्या पर अपराध दर पंजीकरण कम होकर 445.9 हो गया है। 

हत्या के मामले

  • वर्ष 2021 में हत्या के पंजीकृत मामले वर्ष 2020 की तुलना में 0.3% की वृद्धि को रेखांकित करता है।
  • हत्या के सर्वाधिक मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज किये गए है, जबकि सिक्किम में केवल 14 मामले दर्ज किये गए है।
  • उल्लेखनीय है कि लक्षद्वीप में हत्या से संबंधित केवल एक मामला पंजीकृत किया गया है। 

अपहरण

  • वर्ष 2020 की तुलना में वर्ष 2021 में अपहरण के मामलों में 19.9% की वृद्धि देखी गई है। 
  • वर्ष 2021 के दौरान कुल 99,680 अपहृत व्यक्तियों को बरामद किया गया।
  • अपहरण के मामले में उत्तर प्रदेश शीर्ष पर है, जबकि मिज़ोरम में इससे संबंधित सबसे कम मामले दर्ज़ किये गए।
  • लक्षद्वीप में कोई भी मामला पंजीकृत नहीं किया गया है।

लापता (Missing) व्यक्तियों की स्थिति 

  • वर्ष 2021 में लापता हुए व्यक्तियों की संख्या में वर्ष 2020 की तुलना में 20.6% की वृद्धि हुई है।  
  • वर्ष 2021 में लापता हुए बच्चों की संख्या में वर्ष 2020 की तुलना में 30.8% की वृद्धि हुई है।  
  • इसके अतिरिक्त मानव तस्करी (Human Trafficking) के पंजीकृत मामलों में 27.7% की वृद्धि हुई है 

महिलाओं के खिलाफ अपराध 

  • वर्ष 2021 में महिलाओं के खिलाफ पंजीकृत अपराध के कुल मामलों में 15.3% की वृद्धि हुई है।
  • महिलाओं के खिलाफ पंजीकृत अपराध के कुल मामलों में सर्वाधिक पति या उनके परिचितों द्वारा क्रूरता से संबंधित है।  
  • महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों की राज्य सूची में उत्तर प्रदेश शीर्ष पर है। इस संदर्भ में राजस्थान दूसरे एवं महाराष्ट्र तीसरे स्थान पर है।
  • महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में नागालैण्ड की स्थिति बेहतर है जहाँ सबसे कम मामले पंजीकृत किये गए हैं। लक्षद्वीप इस मामले में सबसे बेहतर स्थिति में है।
  • वर्ष 2021 में प्रति लाख महिला आबादी पर अपराध पंजीकरण की दर बढ़कर 64.5 हो गई है। 
  • महिलाओं के खिलाफ होने वाले कुल अपराध दर के मामले में असम शीर्ष पर है।
  • महानगर के दृष्टिकोण से महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों की सूची में सबसे खराब प्रदर्शन दिल्ली का है।

बलात्संग (Rape) की स्थिति 

  • बलात्संग के पंजीकृत मामलों में वर्ष 2020 की तुलना में वर्ष 2021 में 19.34% की वृद्धि हुई है। 
  • बलात्संग की सूची में राजस्थान का स्थान शीर्ष है। इसके बाद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश का स्थान है। 
  • उल्लेखनीय है कि राज्यों की सूची में नगालैंड में बलात्संग के सबसे कम 4 मामले दर्ज किये गए हैं। महानगरों की श्रेणी में दिल्ली में सर्वाधिक मामले दर्ज किये गये है। 

बच्चों के खिलाफ अपराध

  • वर्ष 2021 में बच्चों के खिलाफ पंजीकृत अपराधों की संख्या में वर्ष 2020 की अपेक्षा 16.2% की वृद्धि दर्ज़ की गई है।
  • प्रति लाख बच्चों की जनसंख्या पर अपराध पंजीकरण की दर बढ़कर वर्ष 2021 में 33.6 हो गई है। 
  • बच्चों के खिलाफ अपराध से संबंधित सर्वाधिक मामले मध्य प्रदेश में पंजीकृत किये गए हैं। इस संबंध में नागालैंड की स्थिति बेहतर है।
  • हालाँकि, राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के संबंध में लद्दाख (1) का प्रदर्शन सबसे अच्छा है।

साइबर अपराध से संबंधित मामले

  • रिपोर्ट के अनुसार साइबर अपराध से संबंधित मामलों में विगत वर्ष की तुलना में 5.9% की वृद्धि दर्ज़ की गई है।
  • इस श्रेणी के तहत अपराध की दर वर्ष 2021 में बढ़कर 3.9 हो गई है। 
  • वर्ष 2021 में कुल साइबर अपराध की राज्य सूची में तेलंगाना शीर्ष पर है, जबकि सिक्किम और पुद्दुचेरी में साइबर अपराध से संबंधित एक भी मामला दर्ज नहीं किया गया।

एस.सी. और एस.टी. से संबंधित अपराध 

  • वर्ष 2021 में वर्ष 2020 की तुलना में अनुसूचित जातियों (SCs) और अनुसूचित जनजातियों (STs) से संबंधित अपराध के मामले में क्रमश: 1.2% एवं 6.4% की वृद्धि हुई है। 
  • एस.सी. से संबंधित सर्वाधिक मामले उत्तर प्रदेश में और एस.टी. से संबंधित सर्वाधिक मामले मध्य प्रदेश में दर्ज किये गए हैं।

वरिष्ठ नागरिकों के विरुद्ध अपराध

  • वरिष्ठ नागरिकों से संबंधित मामलों की संख्या में विगत वर्ष की तुलना में वर्ष 2021 में 5.3% की वृद्धि हुई है। 
  • इस संबंध में सर्वाधिक मामले महाराष्ट्र में दर्ज़ किये गये है। लद्दाख, लक्षद्वीप और पुद्दुचेरी में एक भी मामला दर्ज नहीं किया गया है।

अन्य श्रेणियाँ

  • राज्य के विरुद्ध अपराध (Offences Against State) के पंजीकृत मामलों में वर्ष 2020 की तुलना में वर्ष 2021 में 0.8% की कमी आई है।  
  • आर्थिक अपराध (Economic Offences) के मामले में वर्ष 2020 की तुलना में वर्ष 2021 में 19.4% की वृद्धि देखी गई है। 
  • दहेज़ से संबंधित मामलों की सूची में एक-तिहाई से अधिक मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज किये गए हैं।
  • आई.पी.सी. से संबंधित अपराधों के तहत चार्ज-शीट की उच्चतम दर वाले राज्य/संघ राज्य क्षेत्र गुजरात (95.9%), पुडुचेरी (93.0%) और आंध्र प्रदेश (92.9%) हैं।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो

  • इसकी स्थापना जनवरी 1986 में अपराध से संबंधित आंकड़ों के संकलन के एक निकाय के रूप में की गयी थी। यह केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
  • वार्षिक अपराध रिपोर्ट प्रकाशित करने के अतिरिक्त यह भारतीय राज्यों में अंतर्राज्यीय और अंतर्राष्ट्रीय अपराधों की सूचनाओं के संकलन, समन्वय एवं उसके आदान-प्रदान का भी कार्य करता है।
  • यह राष्ट्रीय और विदेशी अपराधियों के फिंगरप्रिंट संग्रह के एक राष्ट्रीय निकाय के रूप में भी कार्य करता है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा रिपोर्ट तैयार करना

  • यह राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों की पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPFs) तथा अपराध निवारण अधिकारी (CPOs) से अपराध के आंकड़े प्राप्त करता है। 
  • इन सूचनाओं का संकलन सर्वप्रथम स्थानीय या जिला पुलिस स्टेशनों में किया जाता है । इसके उपरांत इन सूचनाओं को राज्य स्तर पर साझा किया जाता है।
  • अंततः इन सभी आंकड़ों और सूचनाओं को राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा संकलित व सत्यापित किया जाता है।
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