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गर्भपात पर कर्नाटक उच्च न्यायालय का निर्णय

  • 22nd November, 2022

(प्रारंभिक परीक्षा– गर्भ का चिकित्सकीय समापन (संशोधन) अधिनियम 2021)
(मुख्य परीक्षा :सामान्य अध्यन प्रश्नपत्र 2  - सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप)

संदर्भ 

हाल ही में, कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 13 वर्षीय बलात्कार पीड़िता के 25 सप्ताह के गर्भ को समाप्त करने की अनुमति दी है। 

हालिया घटनाक्रम

  • न्यायालय के अनुसार इस मामले में गर्भपात की प्रक्रिया चिकित्सकों  के जाँच के अधीन है। 
  • यदि चिकित्सक की राय में इस तरह की प्रक्रिया से पीड़िता के जीवन को क्षति पहुँचने की संभावना है, तो प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के संबंध में चिकित्सक के पास निर्णय लेने का अंतिम अधिकार होगा।
  • न्यायालय ने निर्णय दिया है कि गर्भावस्था को समाप्त करने की प्रक्रिया, गर्भपात के पश्चात् उपचार और परिवहन सुविधा पीड़िता के लिये नि:शुल्क होनी चाहिये।

गर्भ का चिकित्सकीय समापन कानून 

  • गर्भ का चिकित्सकीय समापन अधिनियम, 1971 (Medical Termination of Pregnancy Act, 1971) भारत सरकार का एक अधिनियम है, जो कुछ विशेष परिस्थितियों में गर्भ को समाप्त करने की अनुमति देता है।
  • इस कानून के तहत निम्नलिखित परिस्थितियों में गर्भपात की अनुमति दी गयी है-
    • यदि गर्भ की अवधि 12  सप्ताह से अधिक नहीं है, तो एक चिकित्सक की सलाह के बाद गर्भपात किया जा सकता है।
    • यदि  गर्भ की अवधि 12 सप्ताह से अधिक लेकिन 20 सप्ताह से कम है, तब  दो चिकित्सकों की राय के बाद निम्नलिखित आधारों पर गर्भ को समाप्त किया जा सकता है – 
      • गर्भवती महिला की जान को खतरा हो या उसके शारीरिक अथवा मानसिक स्वास्थ्य को क्षति पहुँचने की संभावना हो। 
      • यदि यह ख़तरा हो कि होने वाले बच्चे को कोई गंभीर शारीरिक या मानसिक बीमारी होगी। 
    • 20  सप्ताह से ज्यादा के गर्भ को समाप्त करने के लिये न्यायालय की अनुमति लेनी होगी।

गर्भ का चिकित्सकीय समापन (संशोधन) अधिनियम 2021

  • वर्ष 2021 में केंद्र सरकार ने व्यापक गर्भपात देखभाल प्रदान करने तथा महिलाओं को और अधिक सशक्त बनाने के लिये एम.टी.पी.अधिनियम 1971 में संशोधन किया गया।
  • यह संशोधन चिकित्सीय, मानवीय एवं सामाजिक आधार पर सुरक्षित और वैध गर्भपात सेवाओं का विस्तार करने के लिये लाया गया है। 

संशोधन के प्रावधान  

  • इस संशोधन के तहत गर्भनिरोधक विधि या उपकरण की विफलता के मामले में विवाहित महिला द्वारा 20 सप्ताह तक के गर्भ को समाप्त किया जा सकता है। 
  • यह विधेयक अविवाहित महिलाओं को भी गर्भनिरोधक विधि या उपकरण की विफलता के कारण हुई गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति देता है।
  • गर्भधारण से 20 सप्ताह तक के गर्भ की समाप्ति के लिये एक पंजीकृत चिकित्सक की राय आवश्यक है।
  • 20-24 सप्ताह तक के गर्भ की समाप्ति के लिये दो पंजीकृत चिकित्सकों की राय की आवश्यकता होगी।
  • भ्रूण से संबंधित गंभीर असामान्यता के मामले में 24 सप्ताह के बाद के गर्भ की समाप्ति के लिये राज्य-स्तरीय मेडिकल बोर्ड की राय आवश्यक होगी। 
  • गर्भ को समाप्त करने वाली किसी महिला की पहचान को कानून द्वारा अधिकृत व्यक्ति को छोड़कर किसी भी अन्य व्यक्ति के समक्ष प्रकट नहीं किया जा सकेगा।
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