• Sanskriti IAS - अखिल मूर्ति के निर्देशन में

विश्व वन स्थिति रिपोर्ट

  • 19th May, 2022

(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नप्रत्र-3 : संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन)

संदर्भ

हाल ही में, खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने ‘विश्व वन स्थिति रिपोर्ट-2022’ जारी की। इसके अनुसार, विगत 30 वर्षों में विश्व के कुल वन क्षेत्रफल में अभूतपूर्व कमी दर्ज की गई है। यह रिपोर्ट 15वीं विश्व वानिकी कांग्रेस के दौरान जारी की गई है।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

  • इसके अनुसार निर्वनीकरण के कारण वर्ष 1990 से 2020 के बीच 420 मिलियन हेक्टेयर (mha) वन नष्ट हो गए हैं, जो कुल वन क्षेत्र का लगभग 10.34% है। हालाँकि, पृथ्वी के भौगोलिक क्षेत्र के 4.06 बिलियन हेक्टेयर (31%) पर वनाच्छादन है।
  • हालाँकि, निर्वनीकरण की दर में गिरावट दर्ज होने के बावजूद वर्ष 2015 से 2020 के बीच प्रति वर्ष 10 mha वन नष्ट हुए है। वर्ष 2000 से 2020 के बीच लगभग 47 mha प्राथमिक वन नष्ट हुए है। 
  • उल्लेखनीय है कि 700 mha से अधिक वन (कुल वन क्षेत्र का 18%) कानूनी रूप से स्थापित संरक्षित क्षेत्रों में है। फिर भी, निर्वनीकरण और वन क्षरण के कारण वन जैव विविधता खतरे में है।

प्रभाव 

कार्बन उत्सर्जन 

  • किसी अतिरिक्त कार्रवाई या प्रयास के अभाव में वर्ष 2016 से 2050 के बीच केवल उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में ही 289 mha जंगलों की कटाई की संभावना है, जिसके परिणामस्वरूप 169 गीगाटन कार्बनडाई ऑक्साइड समतुल्य (GtCO2e) का उत्सर्जन होगा।
  • कोविड-19 के बाद अतिरिक्त 124 मिलियन लोग अत्यधिक गरीबी का शिकार हो गए हैं, जिससे कुछ देशों में लकड़ी आधारित ईंधन के उपयोग में वृद्धि हुई है। इसका प्रभाव दीर्घकालिक हो सकता है
  • रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 तक उप-सहारा अफ्रीका में लगभग एक बिलियन लोग ईंधन के प्रदूषणकारी स्रोत, जैसे- चारकोल और लकड़ी पर निर्भर होंगे।

संक्रामक रोगों का कारण

  • वर्तमान रिपोर्ट के अनुसार, 250 उभरते संक्रामक रोगों में से 15% को वनों से जोड़ा गया है। साथ ही, वर्ष 1960 के बाद से रिपोर्ट की गई 30 प्रतिशत नई बीमारियों के लिये निर्वनीकरण और भूमि उपयोग में परिवर्तन को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
  • निर्वनीकरण (विशेष रूप से उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में) डेंगू और मलेरिया जैसे संक्रामक रोगों में वृद्धि के साथ जुड़ा हुआ है।
  • महामारी को रोकने के उद्देश्य से अवैध वन्यजीव व्यापार को कम करने, भूमि उपयोग में बदलाव से बचने और निगरानी बढ़ाने से वैश्विक रणनीतियों की लागत $22 बिलियन से $31 बिलियन हो गई है।

प्राकृतिक संसाधन एवं भोजन की मांग में वृद्धि 

  • वर्ष 2050 तक विश्व की जनसंख्या 9.7 बिलियन तक पहुंच सकती है, जिससे भोजन की मांग 35 से 56% तक बढ़ जाएगी और भूमि के लिये प्रतिस्पर्धा में वृद्धि होगी।
  • संयुक्त रूप से सभी प्राकृतिक संसाधनों की वार्षिक वैश्विक खपत वर्ष 2017 में 92 बिलियन टन से बढ़कर वर्ष 2060 में 190 बिलियन टन होने का अनुमान है।
  • वर्ष 2017 में 24 बिलियन टन की अपेक्षा वर्ष 2060 तक वार्षिक बायोमास निष्कर्षण 44 बिलियन टन तक पहुंचने की उम्मीद है। मुख्य रूप से निर्माण और पैकेजिंग के कारण वन-आधारित बायोमास की मांग में और अधिक वृद्धि होने की संभावना है।

सुझाव

  • इसमें हरित सुधार (Green Recovery) प्राप्त करने और पर्यावरणीय संकटों से निपटने के लिये तीन मार्ग भी प्रस्तुत किये गए हैं।
  • रिपोर्ट में वनों और भूमि उपयोग पर ग्लासगो घोषणा की पृष्ठभूमि में जलवायु परिवर्तन एवं जैव विविधता हानि सहित हरित पुनर्प्राप्ति (Green Recovery) और पर्यावरणीय संकटों से निपटने के लिये तीन परस्पर संबंधित मार्गों का सुझाव दिया गया है :
    •  वनों की कटाई को रोकना और वनों का अनुरक्षण
    •  निम्नीकृत भूमि की पुनर्बहाली और कृषि वानिकी का विस्तार 
    •  वनों का सतत तरीके से उपयोग और हरित मूल्य श्रृंखला का निर्माण
  • वनरोपण और पुनर्वनीकरण के माध्यम से निम्नीकृत भूमि की पुनर्बहाली द्वारा वर्ष 2020 से वर्ष 2050 के बीच 0.9 से 1.5 गीगाटन कार्बनडाई ऑक्साइड समतुल्य को वातावरण से प्रतिवर्ष प्रभावी ढंग से बाहर निकाला जा सकता है।

      वन और भूमि उपयोग पर ग्लासगो नेताओं की घोषणा 

      • इसके माध्यम से 140 से अधिक देशों ने वर्ष 2030 तक वन की क्षति को समाप्त करने और पुनर्बहाली व धारणीय वानिकी का समर्थन करने का संकल्प लिया है।
      • इन उद्देश्यों की प्राप्ति में मदद करने के लिये विकासशील देशों को अतिरिक्त 19 बिलियन डॉलर का आवंटन किया गया है।

      15वीं विश्व वानिकी कांग्रेस (WFC 2021)

      • तिथि- 2-6 मई 2022
      • आयोजन- सियोल, दक्षिण कोरिया
      • विषय- वनों के साथ हरे, स्वस्थ और लचीले भविष्य का निर्माण
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