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भारत और त्रिनिदाद एवं टोबैगो संबंध : एक नई साझेदारी की ओर

(सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 2: अंतर्राष्ट्रीय संबंध; द्विपक्षीय, क्षेत्रीय एवं वैश्विक समूह और भारत से संबंधित और/अथवा भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार)

संदर्भ

भारत और त्रिनिदाद एवं टोबैगो (T&D) के बीच संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक व सामाजिक बंधनों पर आधारित हैं। 3-4 जुलाई, 2025 को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की त्रिनिदाद एवं टोबैगो की आधिकारिक यात्रा ने इन संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का मार्ग प्रशस्त किया। यह विगत 26 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली द्विपक्षीय यात्रा है जो दोनों देशों के बीच साझा मूल्यों, लोकतांत्रिक आदर्शों एवं सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करती है।

द्विपक्षीय संबंधों की पृष्ठभूमि 

राजनयिक संबंध 

  • भारत और त्रिनिदाद एवं टोबैगो के संबंधों की नींव 1845 में रखी गई, जब ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान भारतीय मजदूरों को पहली बार त्रिनिदाद एवं टोबैगो में गन्ने के बागानों में काम करने के लिए लाया गया। 
    • इन अप्रवासियों को मुख्यत: गिरमिटिया मजदूर कहा जाता था, जो उत्तर प्रदेश, बिहार एवं अन्य भारतीय क्षेत्रों से थे। 
    • वर्ष 1845 में ‘फतह अल रज्जाक’ जहाज के साथ भारतीयों का पहला जत्था त्रिनिदाद पहुँच, जिसे अब ‘इंडियन अराइवल डे’ (30 मई) के रूप में मनाया जाता है। 
    • वर्ष 2025 में इस घटना की 180वीं वर्षगांठ थी, जो दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक बंधन का प्रतीक है।
  • दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनयिक संबंधों की शुरुआत वर्ष 1962 में हुई, जब त्रिनिदाद एवं टोबैगो को ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से स्वतंत्रता प्राप्त हुई। ये संबंध दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक बंधनों पर आधारित थे।
  • औपचारिक राजनयिक संबंधों की स्थापना के बाद भारत ने वहाँ की राजधानी पोर्ट ऑफ स्पेन में एक उच्चायोग स्थापित किया और त्रिनिदाद एवं टोबैगो ने नई दिल्ली में अपना उच्चायोग स्थापित किया। 
  • त्रिनिदाद एवं टोबैगो के प्रधानमंत्री बासदेव पांडे ने जनवरी 1997 में गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में पहली बार भारत की राजकीय यात्रा की। 

संस्थागत संवाद तंत्र

  • संयुक्त आयोग की बैठक (JCM) : भारत-त्रिनिदाद एवं टोबैगो संयुक्त आयोग की पहली बैठक नवंबर 2011 में नई दिल्ली में हुई थी। 
  • विदेश कार्यालय परामर्श (FOC) : भारत और त्रिनिदाद एवं टोबैगो ने 1 जुलाई, 2011 को पोर्ट ऑफ स्पेन में एफ.ओ.सी. का पहला दौर आयोजित किया। 
  • महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौते एवं समझौता ज्ञापन : विगत कुछ वर्षों में दोनों देशों ने विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की नींव रखते हुए कई समझौतों व समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं।

आर्थिक एवं वाणिज्यिक संबंध 

  • जनवरी 1997 में भारत व टी.एंड.टी. के बीच हस्ताक्षरित व्यापार समझौता एक-दूसरे को सर्वाधिक पसंदीदा राष्ट्र (MFN) का दर्जा देता है। 
  • क्षेत्र में अपनी आर्थिक रूप से प्रभावशाली भूमिका के आधार पर और क्षेत्रीय व द्विपक्षीय तरजीही व्यापार समझौतों द्वारा समर्थित टी.एंड.टी. भारत के निर्यातकों को कैरिबियाई क्षेत्र और उससे आगे तक पहुँचने के लिए सुअवसर प्रदान करता है।
  • आई.टी. एवं आई.टी.-सक्षम सेवाओं, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि एवं कृषि-जैव प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा (पवन व सौर), पर्यटन (चिकित्सा पर्यटन सहित), कपड़ा और परिधान, उच्च शिक्षा, ऑटोमोबाइल, आयुर्वेद व कल्याण, फिल्म एवं संगीत आदि में द्विपक्षीय व्यापार के विकास की संभावना है। 
  • भारत द्वारा निर्यात की जाने वाली प्रमुख वस्तुएँ : वाहन, रोलिंग स्टॉक, पुर्जे एवं सहायक उपकरण; लोहा व इस्पात; दवा उत्पाद; प्लास्टिक एवं अन्य वस्तुएँ आदि। 
  • भारत द्वारा आयात की जाने वाली प्रमुख वस्तुएँ : खनिज ईंधन, खनिज तेल और उनके आसवन के उत्पाद; बिटुमिनस पदार्थ; खनिज मोम; लोहा व इस्पात; अयस्क, लावा एवं राख; एल्युमीनियम आदि।

GeM

भारतीय समुदाय 

  • त्रिनिदाद एवं टोबैगो में भारतीय समुदाय को इंडो-त्रिनिदादियन एवं टोबैगोनियन के रूप में जाना जाता है जो देश की सबसे बड़ी जातीय आबादी है और कुल जनसंख्या का लगभग 35-45% हिस्सा है। यह समुदाय अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक योगदान एवं सामाजिक-आर्थिक प्रभाव के लिए जाना जाता है।
  • यहाँ रहने वाले अनिवासी भारतीय समुदाय के लोग व्यवसाय, चिकित्सा, शिक्षण व अन्य व्यवसायों में लगे हुए हैं। 
  • त्रिनिदाद एवं टोबैगो सरकार ने पर्यटन व व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए त्रिनिदाद एवं टोबैगो जाने वाले भारतीय नागरिकों के लिए तीन महीने की अवधि के लिए वीजा की आवश्यकता को माफ कर दिया है। भारत सरकार ने त्रिनिदाद एवं टोबैगो के नागरिकों के लिए ई-पर्यटक वीजा को मंजूरी दे दी है।

Trinidad-Tobago-Relations

प्रधानमंत्री की हालिया यात्रा के विभिन्न आयाम 

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा कई मायनों में ऐतिहासिक थी। उन्हें त्रिनिदाद एवं टोबैगो का सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द रिपब्लिक ऑफ त्रिनिदाद एंड टोबैगो’ प्रदान किया गया। 
  • पहलगाम आतंकी हमले के बाद त्रिनिदाद एवं टोबैगो ने भारत का मजबूत समर्थन किया। दोनों देशों ने आतंकवाद के सभी रूपों से निपटने के लिए संयुक्त प्रतिबद्धता की पुष्टि की। वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच अधिक एकजुटता को बढ़ाने और भारत-कैरिकॉम साझेदारी को मजबूत करने पर भी सहमति व्यक्त की गयी।
  • दोनों देशों ने स्वास्थ्य, सूचना प्रौद्योगिकी, संस्कृति, खेल, व्यापार, कृषि, शिक्षा एवं डिजिटल शासन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर व्यापक चर्चा की। इस यात्रा के दौरान छह महत्वपूर्ण समझौतों और एम.ओ.यू. पर हस्ताक्षर किए गए।
    • छह समझौता ज्ञापनों (MoU) में फार्माकोपिया सहयोग, त्वरित प्रभाव परियोजनाएँ, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, खेल, राजनयिक प्रशिक्षण और त्रिनिदाद एवं टोबैगो में हिंदी व भारतीय अध्ययन के लिए आई.सी.सी.आर. पीठों की स्थापना शामिल है।
  • भारतीय प्रवासियों के साथ संबंधों को अधिक प्रगाढ़ बनाने के लिए भारत ने त्रिनिदाद एवं टोबैगो में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों की छठी पीढ़ी को भी ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्ड की पात्रता प्रदान करने की घोषणा की।

डिजिटल सहयोग

  • डिजिटल क्षेत्र में सहयोग इस यात्रा का एक प्रमुख बिंदु रहा। त्रिनिदाद एवं टोबैगो कैरेबियाई क्षेत्र का पहला देश बन गया है, जिसने भारत की यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) प्रणाली को अपनाया।
  • इसके अलावा दोनों देश डिजिलॉकर, ई-साइन और गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) सहित इंडिया स्टैक समाधानों के कार्यान्वयन में सहयोग की संभावना पर सहमत हुए।
  • त्रिनिदाद एवं टोबैगो ने राज्य भूमि पंजीकरण प्रणाली के डिजिटलीकरण के लिए भारत से सहायता मांगी, जो डिजिटल शासन एवं समावेशी विकास को बढ़ावा देगा।

कृषि एवं खाद्य सुरक्षा

  • कृषि एवं खाद्य सुरक्षा दोनों देशों के लिए प्राथमिकता के क्षेत्र हैं। भारत ने त्रिनिदाद एवं टोबैगो की राष्ट्रीय कृषि विपणन व विकास निगम (NAMDEVCO) को खाद्य प्रसंस्करण और भंडारण के लिए 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य की कृषि मशीनरी उपहार में दी। 
  • प्राकृतिक खेती, समुद्री शैवाल आधारित उर्वरकों और बाजरा की खेती में भारत की सहायता से त्रिनिदाद एवं टोबैगो की खाद्य सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

स्वास्थ्य सेवा

  • स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में त्रिनिदाद एवं टोबैगो ने भारतीय फार्माकोपिया को मान्यता दी, जिससे सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता बढ़ेगी। 
  • भारत ने 800 व्यक्तियों के लिए कृत्रिम अंग फिटमेंट शिविर और 20 हेमोडायलिसिस यूनिट्स के साथ-साथ दो समुद्री एम्बुलेंस की पेशकश की। 
  • कोविड-19 महामारी के दौरान भारत द्वारा प्रदान की गई वैक्सीन एवं चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति ने दोनों देशों के बीच विश्वास को मजबूत किया।

जलवायु एवं स्थिरता

  • दोनों देशों ने जलवायु परिवर्तन और सतत विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। त्रिनिदाद एवं टोबैगो ने आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचा गठबंधन (CDRI) और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन में शामिल होने का निर्णय लिया।
  • भारत की ‘मिशन लाइफ’ की त्रिनिदाद एवं टोबैगो ने सराहना की है जो बुद्धिमत्तापूर्ण उपभोग एवं टिकाऊ जीवन शैली को बढ़ावा देती है। 
  • इसके अतिरिक्त, भारत ने विदेश एवं कैरिकॉम कार्य मंत्रालय के मुख्यालय के लिए रूफटॉप फोटोवोल्टिक (PV) प्रणाली प्रदान करने की पेशकश की।

सांस्कृतिक एवं शैक्षिक सहयोग

  • सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण कदम के तौर पर प्रधानमंत्री मोदी ने त्रिनिदाद एवं टोबैगो के पंडितों के एक समूह को भारत में प्रशिक्षण देने की घोषणा की। ये पंडित भारत में ‘गीता महोत्सव’ में भी भाग लेंगे। 
  • दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय ‘सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम’ की प्रगतिशील भूमिका का उल्लेख किया, जिसके माध्यम से वर्ष 1997 में महात्मा गांधी सांस्कृतिक सहयोग संस्थान की स्थापना की गई थी। 
    • इस कार्यक्रम को 2025-28 की अवधि के लिए नवीनीकृत करने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। 
  • नवीनीकृत एम.ओ.यू. के तहत त्रिनिदाद एवं टोबैगो दोनों देशों के साथ सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ाने के लिए पर्क्यूशन (स्टील पैन) और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के अन्य रूपों पर कलाकारों को भारत भेजेगा।
  • शिक्षा के क्षेत्र में भारत ने 2000 लैपटॉप उपहार में दिए और त्रिनिदाद एवं टोबैगो के छात्रों को भारत में उच्च शिक्षा के अवसर प्रदान करने की पेशकश की।

वैश्विक एवं क्षेत्रीय मुद्दे

  • दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ कठोर रुख अपनाया और इसे किसी भी रूप में बर्दाश्त न करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया और विशेष रूप से सुरक्षा परिषद के विस्तार की मांग की। 
  • त्रिनिदाद एवं टोबैगो ने भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया, जबकि भारत ने 2027-28 के लिए त्रिनिदाद एवं टोबैगो की अस्थायी सदस्यता का समर्थन करने का वादा किया। 
  • दोनों देशों ने वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने और शांति, जलवायु न्याय एवं समावेशी विकास के लिए मिलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता जताई।

देशनामा : त्रिनिदाद एवं टोबैगो

  • परिचय : त्रिनिदाद एवं टोबैगो एक कैरेबियाई द्वीपीय देश है जो अपनी भौगोलिक स्थिति, सांस्कृतिक विविधता व लोकतांत्रिक शासन प्रणाली के लिए जाना जाता है। 
  • राजधानी : पोर्ट ऑफ़ स्पेन

Port-of-Spain

  • भौगोलिक अवस्थिति : यह कैरेबियाई सागर में वेनेजुएला के उत्तर-पूर्वी तट से लगभग 11 किमी. दूर स्थित है। यह देश दो मुख्य द्वीपों त्रिनिदाद एवं टोबैगो तथा कई छोटे द्वीपों से मिलकर बना है।
  • समुद्री सीमा: इसकी जलसीमा बारबाडोस से उत्तर-पूर्व में, गयाना से दक्षिण-पूर्व में तथा वेनेज़ुएला से दक्षिण एवं पश्चिम में जलसीमा साझा करती है।
  • शासन प्रणाली : संसदीय लोकतंत्र एवं गणराज्य 
  • आधिकारिक भाषा : अंग्रेजी
  • जनसंख्या : लगभग 1,508,635 
  • मुद्रा : त्रिनिदाद एवं टोबैगो डॉलर (TTD)
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