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शॉर्ट न्यूज़

शॉर्ट न्यूज़: 12 जनवरी, 2022


चौथी पीढ़ी का परमाणु ऊर्जा संयंत्र

ऑफलाइन ई-भुगतान सुविधा

परमाणु अप्रसार संधि की स्थिति

आधार आधारित भुगतान प्रणाली


चौथी पीढ़ी का परमाणु ऊर्जा संयंत्र

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, चीन के शेडोंग प्रांत में विश्व के पहले परमाणु ऊर्जा संयंत्र का संचालन आरंभ किया जा रहा है, जो उच्च तापमान वाले गैस रिएक्टर (High Temperature Gas Reactor- HTGR) का उपयोग करेगा। 

उच्च तापमान वाले गैस रिएक्टर

  • एच.टी.जी.आर. परमाणु रिएक्टर शीतलक के रूप में हीलियम गैस तथा मूल संरचना में ग्रेफाइट का उपयोग कर परमाणु ताप की आपूर्ति करता है।
  • सिरेमिक सामग्री का उपयोग होने के कारण एच.टी.जी.आर. लगभग 1000 ℃ तक उच्च तापमान उत्पन्न कर सकता है।
  • इससे उत्पन्न ताप को अन्य उद्योगों में भी उपयोग किया जा सकता है।
  • इस संयंत्र में ईंधन सिरेमिक कोटिंग के भीतर होते हैं, अत: 1600 ℃  तापमान पर भी ये विखंडित उत्पादों को बाहर आने से रोकते हैं।
  • इस संयंत्र की मूल संरचना में उच्च तापीय क्षमता वाले ग्रेफाइट का उपयोग किया जाता है, फलत: असामान्य दुर्घटनाओं की स्थिति में भी कोर तापमान में भिन्निता बहुत ही धीमी होती है।

लाभ

  • एच.टी.जी.आर. एक बेहतर परमाणु रिएक्टर है क्योंकि यह अपनी अंतर्निहित सुरक्षा के कारण अतिरिक्त आवश्यकताओं को कम करता है।
  • शीतलक की मात्रा कम होने पर रिएक्टर को बाहर से ठंडा किया जा सकता है।
  • इसमें श्रमिकों के लिये रेडियोधर्मी जोखिम का स्तर निम्न है।
  • असामन्य दुर्घटनाओं के दौरान भी इसके जोखिमों का प्रसार क्षेत्र सीमित है।

ऑफलाइन ई-भुगतान सुविधा

चर्चा में क्यों?

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने ऑफलाइन मोड में छोटे मूल्य के डिजिटल भुगतान की सुविधा को मंज़ूरी प्रदान की है। इससे अर्द्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिलेगा।

प्रमुख बिंदु

  • गौरतलब है कि ऑफलाइन डिजिटल भुगतान के लिये इंटरनेट या दूरसंचार कनेक्टिविटी की आवश्यकता नहीं होती है। वस्तुतः इसके लिये सत्यापन के अतिरिक्त कारकों (AFA) की भी आवश्यकता नहीं होगी। चूँकि, यह लेन-देन ऑफलाइन होगा, अतः ग्राहक को कुछ समय के बाद एस.एम.एस. या ई-मेल के माध्यम से अलर्ट प्राप्त होगा।
  • इसके तहत एक बार में 200 रुपए तक का भुगतान किया जा सकेगा और खाते में शेष राशि की पुनःप्राप्ति होने तक समग्र रूप से 2000 रुपए तक का हस्तांतरण किया जा सकता है। शेष राशि की पुनःप्राप्ति केवल ऑनलाइन माध्यम से ही की जा सकती है।
  • भुगतान का ऑफलाइन मोड रिज़र्व बैंक द्वारा जारी ग्राहक देयता को सीमित करने वाले परिपत्रों (समय-समय पर संशोधित) के प्रावधानों की विशिष्ट सहमति प्राप्त करने के बाद ही सक्षम किया जा सकता है। शिकायत निवारण के लिये ग्राहक ‘रिज़र्व बैंक एकीकृत लोकपाल योजना’ का भी सहारा ले सकते हैं। 
  • नवीन ढाँचे के तहत इस तरह के भुगतान किसी भी चैनल या उपकरण, जैसे कार्ड, वॉलेट और मोबाइल उपकरणों का उपयोग करके आमने-सामने (निकटता मोड) किये जा सकते हैं। यह फ्रेमवर्क तत्काल प्रभाव से लागू होगा।

परमाणु अप्रसार संधि की स्थिति

संदर्भ

परमाणु अप्रसार संधि (एन.पी.टी.) की नवीनतम समीक्षा जिसे पहली बार 1970 में लागू किया गया था। इसे COVID-19 महामारी के कारण 4 जनवरी की अपनी निर्धारित तिथि से स्थगित कर दिया गया हैं । 

एन.पी.टी. का लक्ष्य

एन.पी.टी. का प्राथमिक लक्ष्य न केवल परमाणु ऊर्जा का अधिक शांतिपूर्ण उपयोग बल्कि पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण की दिशा में भी काम करना है। हालांकि, ज़मीनी स्तर पर इसकी एक धूमिल तस्वीर नज़र आती हैं। 

वर्तमान स्थिति

वर्तमान में चीन के आधिपत्य ने अन्य देशों (मुख्यत: दक्षिण एशियाई) को अपने भौगोलिक क्षेत्र में ही तनावपूर्ण स्थिति का सामना करने पर मज़बूर कर दिया है। यूक्रेन और रूस के संबंध में वर्तमान स्थिति भी बहुत तनावपूर्ण है। दूसरी ओर, ऑस्ट्रेलिया, AUKUS(ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच एक त्रिपक्षीय सुरक्षा समझौता) के माध्यम से, चीन का मुकाबला करने के लिए अपने नौसैनिक बेड़े के लिए परमाणु क्षमता हासिल करने की राह पर आगे बढ़ रहा है।

ऑस्ट्रेलिया परमाणु क्षमता हासिल करने की राह पर है, इसका परिणाम यह होगा कि अन्य राष्ट्र भी परमाणु हथियार विकसित करने या प्राप्त करने की दिशा में काम करेंगे। सैद्धांतिक रूप में, हथियारों की एक और दौड़ को फिर से प्रज्वलित हो सकती है।

परमाणु प्रतिबंध पर अन्य संधियाँ और समझौते

सामरिक शस्त्र सीमा संधि (Strategic Arms Limitation Treaty), यह सामरिक आक्रामक हथियारों की सीमा पर अंतरिम समझौता था।

व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि (Comprehensive Nuclear Test Ban Treaty), यह सभी वातावरणों में नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए परमाणु हथियार परीक्षण विस्फोट पर प्रतिबंध लगाता है।

परमाणु हथियारों के निषेध पर संधि (Treaty on the Prohibition of Nuclear Weapons), यह परमाणु हथियारों को व्यापक रूप से प्रतिबंधित करने वाला पहला कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौता है, जिसका अंतिम लक्ष्य उनका पूर्ण उन्मूलन है। इसे 7 जुलाई 2017 को अपनाया गया था। 

समापन विचार

एन.पी.टी. अपने उद्देश्य और परमाणु हथियारों के जाँचकर्ता के रूप में यह आभास होता है कि यह पूरी तरह से सफल नहीं हुआ - लेकिन यह गंभीर विफलता भी नहीं है।

एन.पी.टी. ने जिस मार्ग को प्रशस्त किया है वह भले ही घुमावदार हो। लेकिन हथियारों की दौड़ को समाप्त करने और पूरी तरह से निरस्त्रीकरण की दिशा में अपने कार्यों के माध्यम से प्रतिबद्धता पर जोर दिया है।


आधार आधारित भुगतान प्रणाली

चर्चा में क्यों

हाल ही में, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (National Payment Corporation of India - NPCI) ने आधार आधारित भुगतान प्रणाली (Aadhar Enabled Payment System- AePS) में बदलाव किये हैं।

प्रमुख बिंदु

  • नए दिशा- निर्देशों के अनुसार, अधिग्रहणकर्ता बैंक (वे बैंक या वित्तीय संस्थान जो व्यापारियों को भुगतान प्रणाली के लिये पॉइंट ऑफ सेल मशीन की सुविधा उपलब्ध कराते हैं।) एक टर्मिनल पर प्रति ग्राहक प्रति दिन अधिकतम 5 स्वीकृत नकद-निकासी की सीमा लागू करेंगे।
  • जबकि जारीकर्ता (वे बैंक या वित्तीय संस्थान जो ग्राहकों को आधार आधारित भुगतान प्रणाली की सुविधा उपलब्ध कराते हैं।) प्रत्येक ग्राहक को प्रति माह न्यूनतम 5 स्वीकृत नकद-निकासी लेनदेन की सीमा लागू करेंगे।
  • साथ ही जारीकर्ता प्रति माह प्रति ग्राहक 5 मिनी-स्टेटमेंट लेनदेन की सीमा भी लागू करेंगे।
  • 5 मिनी-स्टेटमेंट की अधिकतम सीमा के पश्चात या तो बैंक अनुरोध को अस्वीकार कर सकते हैं या इसके लिये शुल्क आरोपित कर सकते हैं।
  • नए दिशा-निर्देश 15 जनवरी 2022 से लागू होंगे।
  • अधिग्रहणकर्ता बैंक द्वारा बिज़नेस कॉरेसपॉंडेंट के लॉगिन हेतु आधार जैव-प्रमाणीकरण के किसी एक घटक के माध्यम से पूरे दिन में एक बार दो घटक प्रमाणीकरण को आवश्यक रूप से लागू करना होगा। इसको लागू करने की समय सीमा 31 जनवरी 2022 निर्धारित की गई है।

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