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शॉर्ट न्यूज़

शॉर्ट न्यूज़: 6 जनवरी, 2022


विश्व की सबसे अधिक ऊँचाई पर स्थित सड़क का उद्घाटन

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना में नए प्रावधान

'राष्ट्र-विरोधी गतिविधि'

फ्लेक्स फ्यूल व्हीकल

चीनी वस्तुओं पर एंटी- डंपिंग शुल्क


विश्व की सबसे अधिक ऊँचाई पर स्थित सड़क का उद्घाटन

चर्चा में क्यों?

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा निर्मित विश्व की सबसे अधिक ऊँचाई पर स्थित सड़क का उद्घाटन किया।

प्रमुख बिंदु

LAC

  • यह सड़क 19,000 फीट से अधिक की ऊँचाई पर स्थित है तथा इसकी लंबाई 52 किमी. है। यह दक्षिणी लद्दाख में स्थित उमलिंग-ला-दर्रे से होकर गुज़रती है। 
  • यह माउंट एवरेस्ट के दोनों आधार शिविरों व सियाचिन ग्लेशियर से भी ऊँची है। इसे गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है।
  • विदित है कि लेह में खारदुंग-ला-दर्रे पर स्थित सड़क, दुनिया की सबसे ऊँची सड़कों में से एक है, जिसकी ऊँचाई 17,582 फीट है।
  • दर्रे के माध्यम से सड़क निर्माण बी.आर.ओ. के प्रोजेक्ट ‘हिमांक’ का एक हिस्सा है।

महत्त्व

  • यह सड़क चिसुमले और डेमचोक को जोड़ती है। इस सड़क से पूर्वी लद्दाख के चुमार सेक्टर से जुड़े शहरों के मध्य एक सीधा मार्ग विकसित होगा, जिससे शीतकाल में भी वाहनों का अवागमन सुगमता से हो सकेगा।
  • इससे लेह, कारू और न्योमा को सड़क-मार्ग से जोड़ा गया है। इन पर सभी महत्त्वपूर्ण सैन्य स्टेशन स्थित हैं व यह वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के भी करीब है, जिससे इस सड़क का सामरिक महत्त्व बढ़ जाता है

डेमचोक का सामरिक महत्त्व

डेमचोक वर्ष 2016 से भारत-चीन के मध्य विवादित स्थल रहा है। मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में मौज़ूदा गतिरोध में डेमचोक पुनः विवाद के बिंदु के रूप में सामने आया है।

प्रोजेक्ट हिमांक

यह लद्दाख में बी.आर.ओ. द्वारा शुरू की गई एक परियोजना थी, जो वर्ष 2017 पूर्ण हुई। इसके अंतर्गत खारदुंग-ला, तंगलांग-ला और चांग-ला दर्रों पर सबसे ऊँची सड़कों का निर्माण किया गया है।


प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना में नए प्रावधान

चर्चा में क्यों ?

मौजूदा सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के उन्नयन के लिये वित्तीय, तकनीकी और व्यावसायिक सहायता प्रदान करने के लिये प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PM FME) में विशेष प्रावधानों को जोड़ा गया है। इससे 2 लाख से अधिक सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों (MFPE) को लाभ मिलेगा। 

विशेष प्रावधान

  • क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल अनुदान
  • सभी मौज़ूदा व्यक्तिगत सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ, जो अपनी इकाई को अपग्रेड करना चाहती हैं, वे क्रेडिट-लिंक्ड कैपिटल अनुदान का लाभ उठा सकती हैं।
  • इकाई को अपग्रेड करने के लिये बैंक द्वारा लिये गये ऋण पर 35 प्रतिशत अनुदान लाभ मिल सकता है (अधिकतम सीमा 10 लाख रुपए प्रति इकाई )।
  • इसमें  किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), स्वयं सहायता समूहों (SHGs) तथा उत्पादक सहकारी समितियों को मूल्य शृंखला के साथ पूंजी निवेश के लिये 35 प्रतिशत का क्रेडिट लिंक्ड अनुदान प्रदान किया जाएगा।
  • इसमें क्षमता निर्माण एवं अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसके लिये सहायता इकाइयों के प्रशिक्षण, सूक्ष्म इकाइयों के लिये उपयुक्त पैकेजिंग और मशीनरी आदि के लिये, राज्यों द्वारा चयनित राज्य स्तरीय तकनीकी संस्थानों को सहायता प्रदान की जाएगी।

'राष्ट्र-विरोधी गतिविधि'

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, गृह मंत्रालय ने लोकसभा को सूचित किया है कि वाक्यांश 'राष्ट्र-विरोधी' को विधिक रूप से परिभाषित नहीं किया गया है। वर्ष 1976 में आपातकाल के दौरान संविधान में 'राष्ट्र-विरोधी गतिविधि' को शामिल किया गया था, जिसे बाद में इसे हटा दिया गया।

प्रमुख बिंदु

  • इसे आपातकाल के दौरान 40वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान के अनुच्छेद 31(घ) में शामिल किया गया, जिसमें 'राष्ट्र-विरोधी गतिविधि' को परिभाषित किया गया। इस अनुच्छेद को बाद में 33वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1977 द्वारा निरसित कर दिया गया।
  • गौरतलब है कि 'राष्ट्र-विरोधी' शब्द को विधियों में परिभाषित नहीं किया गया है। हालाँकि, ऐसी गैरकानूनी और विध्वंसक गतिविधियों से निपटने के लिये आपराधिक कानून व विभिन्न न्यायिक घोषणाएँ मौज़ूद हैं, जो देश की एकता और अखंडता के समक्ष खतरा उत्पन्न कर सकती हैं। 
  • वर्ष 2019 में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा वर्ष 2017 के लिये जारी 'क्राइम इन इंडिया' नामक वार्षिक रिपोर्ट में पहली बार 'राष्ट्र विरोधी तत्त्वों द्वारा किये गए अपराध' के संबंध में एक अध्याय शामिल किया गया। इस अध्याय में ‘पूर्वोत्तर भारत के विद्रोहियों, वामपंथी चरमपंथियों तथा आतंकवादियों (जिहादी आतंकवादियों सहित)’ को तीन राष्ट्र विरोधी तत्त्वों के रूप में सूचीबद्ध किया गया।
  • विगत तीन वर्षों के दौरान 'राष्ट्र-विरोधी' गतिविधियों से संबंधित अपराधों में वृद्धि हुई है, इस संदर्भ में संसद के एक सदस्य द्वारा इन अपराधों में संलिप्त व्यक्तियों की संख्या तथा इनसे निपटने हेतु सर्वोच्च न्यायलय के दिशा-निर्देशों का विवरण मांगा। 
  • इसके प्रत्युत्तर में यह कहा गया कि संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार 'लोक व्यवस्था' और 'पुलिस' राज्य सूची के विषय हैं, अतः राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में संलिप्त लोगों की संख्या के बारे में डाटा केंद्रीय स्तर पर नहीं रखा जाता है। 
  • वस्तुतः अपराधों की जाँच, पंजीकरण व अभियोजन, जीवन तथा संपत्ति की सुरक्षा सहित कानून और व्यवस्था बनाए रखने का दायित्व मुख्य रूप से संबंधित राज्य सरकार का होता है।

फ्लेक्स फ्यूल व्हीकल

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, केंद्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने भारत में मौज़ूद सभी वाहन निर्माताओं से बी.एस.- 6 मानकों पर आधारित फ्लेक्स फ्यूल व्हीकल का उत्पादन करने को कहा है।

प्रमुख बिंदु 

  • यह ‘फ्लेक्सिबल फ्यूल व्हीकल’ (Flexible Fuel Vehicles- FFV) का संक्षिप्त रूप है। 
  • ये वाहन 100 प्रतिशत पेट्रोल या 100 प्रतिशत जैव-इथेनॉल या दोनों के संयोजन पर चलने में सक्षम हैं।
  • वर्तमान मोटर वाहनों में कार्यरत ईंजन एक समय में एक ही ईंधन का उपयोग कर सकते हैं, जबकि एफ़.एफ़.वी. इस प्रणाली के वाहनों में एक ही समय पर कई ईंधनों का प्रयोग किया जा सकता है।
  • इस प्रणाली से ग्रीन हाऊस गैस के उत्सर्जन में कमी आएगी। साथ ही, इससे भारत को वर्ष 2030 तक अपने कुल अनुमानित कार्बन उत्सर्जन को 1 बिलियन टन तक कम करने की कॉप-26 में की गई प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।

चीनी वस्तुओं पर एंटी- डंपिंग शुल्क

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, भारत ने घरेलू विनिर्माताओं को सस्ते आयात से संरक्षण प्रदान करने हेतु चीन के एल्युमिनियम व रसायनों से संबंधित 5 उत्पादों पर 5 वर्ष के लिये एंटी-डंपिंग शुल्क आरोपित किया है। 

प्रमुख बिंदु 

  • केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (Central Board of Indirect Taxes and Customs- CBIC) की अलग-अलग अधिसूचनाओं के अनुसार, इसमें एल्युमिनियम फ्लैट रोल शील्ड के कुछ उत्पाद, सोडियम हाइड्रो सल्फ़ाइट, सिलिकॉन सीलेंट, हाइड्रोफ़्लोरो कार्बन घटक R-32 तथा हाइड्रोफ़्लोरो कार्बन मिश्रण शामिल हैं।
  • यह शुल्क वाणिज्य मंत्रालय की जाँच शाखा व्यापार उपचार महानिदेशालय (Directorate General of Trade Remedies - DGTR) की सिफारिशों के पश्चात् आरोपित किये गए हैं।
  • डी.जी.टी.आर. के अनुसार, चीन द्वारा इन उत्पादों को भारतीय बाज़ारों में सामान्य मूल्य से कम कीमतों पर निर्यात किया गया, जिसके कारण भारतीय घरेलू उद्योगों को व्यापक क्षति हुई है।
  • इन उत्पादों पर अधिसूचना की तारीख से 5 वर्ष के लिये एंटी- डोंपिंग शुल्क लगाया गया है, जो भारतीय मुद्रा में देय होगा।

एंटी-डंपिंग शुल्क

  • जब एक देश द्वारा अपने घरेलू बाज़ार में प्रचलित कीमतों या उत्पादन लागत से भी कम कीमतों पर उत्पादों को दूसरे देशों में निर्यात किया जाता है तो इसे ‘डंपिंग’ कहा जाता है। यह अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को विकृत करने वाली प्रणाली है।
  • एंटी-डंपिंग शुल्क आयातक देश द्वारा अपने घरेलू उद्योगों को संरक्षण प्रदान करने हेतु लगाया जाता है।
  • यह विश्व व्यापार संगठन द्वारा अपने सदस्य देशों के घरेलू उद्योगों को संरक्षण प्रदान करने हेतु एक स्वीकृत उपाय है।
  • भारत में एंटी- डंपिंग शुल्क डी.जी.टी.आर. की सिफ़ारिश पर वित्त मंत्रालय द्वारा आरोपित किया जाता है।

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