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अफ्रीका और विश्व मानचित्र का विवाद : मर्केटर प्रक्षेपण की समस्या

(प्रारंभिक परीक्षा: समसामयिक घटनाक्रम)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 1: विश्व के भौतिक भूगोल की मुख्य विशेषताएँ)

संदर्भ

अफ्रीकी संघ (AU) ने हाल ही में 16 वीं सदी के मर्केटर प्रोजेक्शन मानचित्र को बदलने की मांग का समर्थन किया है, जो विशेष रूप से अफ्रीका सहित विश्व के कई हिस्सों के आकार को गलत तरीके से दर्शाता है। इस असमानता ने अफ्रीका के वैश्विक महत्व को कमतर दिखाने और इसके ऐतिहासिक शोषण में सहायक होने का आरोप लगाया है।

क्या है मर्केटर प्रोजेक्शन

  • मर्केटर प्रोजेक्शन एक मानचित्र प्रक्षेपण है, जिसे वर्ष 1569 में गणितज्ञ और उत्कीर्णक जेरार्डस मर्केटर ने बनाया था। 
  • इसका मुख्य उद्देश्य नाविकों को समुद्री यात्रा में सहायता प्रदान करना था। 
  • इस मानचित्र में पृथ्वी की सतह को एक सिलेंडर रूप से खोलकर एक आयताकार रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसमें अक्षांश व देशांतर रेखाएं 90 डिग्री के कोण पर होती हैं।
  • विशेषताएँ : देशांतर रेखाएं समान दूरी पर होती हैं किंतु अक्षांश रेखाएं भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर बढ़ने पर चौड़ी होती जाती हैं। इससे नाविकों को कम्पास की मदद से दो बिंदुओं के बीच सटीक दिशा निर्धारित करने में आसानी होती है।
  • उपयोग : 19वीं सदी तक यह मानचित्र विश्व मानचित्रों, स्कूलों और दीवार नक्शों के लिए मानक बन गया।

अफ्रीका को मानचित्र में छोटा दिखाने का कारण 

मर्केटर प्रोजेक्शन में पृथ्वी को एक सपाट सतह पर प्रदर्शित करने के लिए ध्रुवों के पास क्षेत्रों को खींचा जाता है, जिससे:

  • ध्रुवीय क्षेत्र बड़े दिखते हैं : कनाडा, रूस एवं यूरोप जैसे क्षेत्र वास्तविक आकार से बड़े दिखाई देते हैं।
  • भूमध्य रेखा के पास क्षेत्र छोटे दिखते हैं : भूमध्य रेखा पर स्थित अफ्रीका और भारत जैसे उष्णकटिबंधीय देश वास्तविक आकार से छोटे दिखते हैं।
  • उदाहरण : वास्तव में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के आकार का ग्रीनलैंड मर्केटर मानचित्र में पूरे अफ्रीका के बराबर दिखता है, जबकि अफ्रीका का वास्तविक क्षेत्रफल 30.37 मिलियन वर्ग किमी. है, जो ग्रीनलैंड (2.16 मिलियन वर्ग किमी) से 14 गुना अधिक है।

मानचित्र और वास्तविकता में अंतर

  • आकार की विकृति : मर्केटर प्रोजेक्शन में उत्तरी गोलार्ध के देश, जैसे- रूस (17.1 मिलियन वर्ग किमी.) एवं कनाडा (9.98 मिलियन वर्ग किमी.) वास्तविकता से बड़े दिखते हैं, जबकि अफ्रीका व दक्षिण अमेरिका छोटे दिखते हैं।
  • सांस्कृतिक प्रभाव : यह विकृति पश्चिमी देशों को अधिक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली दिखाती है, जिसे कुछ विद्वानों ने पश्चिमी सांस्कृतिक प्रभुत्व का प्रतीक माना है।
  • वास्तविक तुलना : इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन और पीटर्स प्रोजेक्शन जैसे वैकल्पिक मानचित्र क्षेत्रफल की सटीकता को प्राथमिकता देते हैं, जिससे अफ्रीका का वास्तविक आकार स्पष्ट होता है। उदाहरण के लिए, अफ्रीका का क्षेत्रफल संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन एवं भारत के कुल क्षेत्रफल से भी अधिक है।

अफ्रीकी संघ की आपत्ति के बारे में

  • अफ्रीकी संघ ने ‘Correct the Map’ अभियान का समर्थन किया है, जो वर्ष 2018 में विकसित ‘इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन’ को अपनाने की वकालत करता है। 
  • यह अभियान अफ्रीका के वास्तविक आकार और महत्व को सही ढंग से प्रदर्शित करने की मांग करता है। 
  • अफ्रीकी संघ के अनुसार, मर्केटर मानचित्र को अस्वीकार करना अफ्रीका को वैश्विक मंच पर उसका उचित स्थान दिलाने में मदद करेगा। 

अफ्रीकी संघ की प्रमुख मांगें

अफ्रीकी संघ ने मर्केटर मानचित्र को बदलने के लिए निम्नलिखित मांगें की हैं:

  • इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन को अपनाना : यह वर्ष 2018 में विकसित प्रक्षेपण क्षेत्रफल की सटीकता को बनाए रखता है और अफ्रीका के वास्तविक आकार को दर्शाता है।
  • वैश्विक संगठनों का सहयोग : संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक एवं तकनीकी कंपनियों जैसे गूगल को इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना।
  • शिक्षा में सुधार : स्कूलों एवं विश्वविद्यालयों में सटीक मानचित्रों का उपयोग करना, जैसा कि वर्ष 2017 में बोस्टन के स्कूलों में पीटर्स प्रोजेक्शन को अपनाया गया था।
  • जागरूकता अभियान : मर्केटर मानचित्र के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाना।

इसका महत्त्व

मर्केटर मानचित्र की विकृति ने न केवल भौगोलिक गलतफहमी पैदा की हैं, बल्कि अफ्रीका के ऐतिहासिक शोषण में भी सहायक रहा है:

  • औपनिवेशिक शोषण : 19वीं सदी में अफ्रीका के विभाजन के दौरान मर्केटर मानचित्र ने अफ्रीका को छोटा व ‘जीतने योग्य’ दिखाया, जिसने पश्चिमी औपनिवेशिक शक्तियों को प्रोत्साहित किया।
  • सांस्कृतिक प्रभाव : यह मानचित्र अफ्रीका को वैश्विक मंच पर कम महत्वपूर्ण दिखाता है, जिससे इसके आर्थिक और सामाजिक योगदान को कम आंका जाता है।
  • वर्तमान प्रासंगिकता : मर्केटर मानचित्र का निरंतर उपयोग अफ्रीका की छवि को कमजोर करता है, जबकि सटीक मानचित्र इसके 54 देशों, 1.4 अरब आबादी और विशाल प्राकृतिक संसाधनों को उचित महत्व दे सकते हैं।
  • आत्मसम्मान और पहचान : सटीक मानचित्र अफ्रीकी देशों और उनके नागरिकों के लिए आत्मसम्मान व वैश्विक पहचान को बढ़ावा दे सकते हैं।
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