दक्षिण भारत के अगस्त्यमलाई बायोस्फीयर रिज़र्व (ABR) की वनस्पतीय विविधता को लेकर एक व्यापक नई चेकलिस्ट सामने आई है। तिरुवनंतपुरम स्थित जवाहरलाल नेहरू ट्रॉपिकल बॉटैनिक गार्डन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (JNTBGRI) के शोधकर्ताओं ने एबीआर रिजर्व में 3,261 प्रजातियों, 26 उप-प्रजातियों और 28 किस्मों का दस्तावेजीकरण किया है। ये पौधे 1,139 वंश और 190 कुलों से संबंधित हैं।
यह अध्ययन पश्चिमी घाट की असाधारण जैव-विविधता और विशेष रूप से अगस्त्यमलाई क्षेत्र के संरक्षण की आवश्यकता को रेखांकित करता है। केरल और तमिलनाडु में फैला अगस्त्यमलाई बायोस्फीयर रिज़र्व पश्चिमी घाट के दक्षिणी छोर का महत्त्वपूर्ण पारिस्थितिक क्षेत्र है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यहां की पहाड़ी प्रणालियां और वनस्पतियां जैविक रूप से विशिष्ट होने के साथ-साथ बेहद संवेदनशील भी हैं।
अगस्त्यमलाई बायोस्फीयर रिज़र्व के बारे में
अगस्त्यमलाई बायोस्फीयर रिज़र्व पश्चिमी घाट के सबसे दक्षिणी छोर पर स्थित है और इसमें समुद्र तल से 1,868 मीटर की ऊँचाई वाली चोटियाँ शामिल हैं।
यह 3,500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है और तमिलनाडु के तिरुनेलवेली और कन्याकुमारी जिलों तथा केरल के तिरुवनंतपुरम और कोल्लम जिलों में उष्णकटिबंधीय वन पारिस्थितिकी तंत्र को समाहित करता है। यह प्रायद्वीपीय भारत के सबसे विविध पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक है और पश्चिमी घाट के भीतर एक महत्वपूर्ण जैव-भौगोलिक केंद्र है।
इस अभयारण्य में पौधों की 2,254 प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें लगभग 405 स्थानिक प्रजातियाँ शामिल हैं।
यह कृषि योग्य पौधों, विशेष रूप से इलायची, जामुन, जायफल, काली मिर्च और केले का एक अनूठा आनुवंशिक भंडार भी है।
प्रजातियाँ:
इस अभयारण्य में लगभग 79 स्तनधारी प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें से 20 स्थानिक हैं;
88 सरीसृप प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें से 45 स्थानिक हैं;
45 उभयचर प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें से 30 स्थानिक हैं और मछलियों की 46 प्रजातियाँ, जिनमें 10 स्थानिक प्रजातियाँ शामिल हैं।
कुल 337 पक्षी प्रजातियाँ भी पाई गई हैं, जिनमें से 20 स्थानिक हैं।
इस अभयारण्य में तीन वन्यजीव अभयारण्य - शेन्दुर्नी, पेप्पारा और नेय्यर, साथ ही कलाकड़ मुंडनथुराई बाघ अभयारण्य शामिल हैं।
संरक्षण के लिए नई दिशा
अगस्त्यमलाई बायोस्फीयर रिज़र्व की वनस्पतियों का अध्ययन एक सदी से अधिक समय से होता रहा है, लेकिन अलग-अलग स्रोतों में नामकरण, वर्गीकरण और वितरण संबंधी अंतर पाए जाते रहे हैं। नई चेकलिस्ट ने पुराने और नए शोध, फ्लोरा ग्रंथों तथा वैश्विक टैक्सोनॉमिक डेटाबेस को मिलाकर इन विसंगतियों को दूर करने का प्रयास किया है।
शोधकर्ताओं ने आवास पुनर्स्थापन, एक्स-सीटू संरक्षण, दीर्घकालिक निगरानी और स्थानीय समुदायों की भागीदारी पर आधारित क्षेत्र-विशिष्ट संरक्षण रणनीतियों की सिफारिश की है।
भविष्य में आणविक वंशविकास, फाइलोजेनोमिक्स, जनसंख्या आनुवंशिकी और पारिस्थितिक निच मॉडलिंग जैसी तकनीकों से अगस्त्यमलाई बायोस्फीयर रिज़र्व की स्थानिक वनस्पतियों के विकास और जलवायु संवेदनशीलता को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिल सकती है।