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लद्दाख में मूंगा चट्टान के जीवाश्म 

प्रारम्भिक परीक्षा – लद्दाख में मूंगा चट्टान के जीवाश्म
मुख्य परीक्षा - सामान्य अध्ययन, पेपर-1 और 3

चर्चा में क्यों 

  • लद्दाख के बर्त्से क्षेत्र में भूवैज्ञानिको द्वारा मूंगा चट्टानों के जीवाश्मों की खोज की गई है।

Coral-reef-fossils

प्रमुख बिंदु  

  • यह खोज भूविज्ञानी रितेश आर्य के द्वारा की गई है। 
  • पूर्वी लद्दाख का बर्त्से क्षेत्र समुद्र तल से 18,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। 
  • इन खोजे गए जीवाश्मों में मूंगा समूहों की संरचनाएं भी शामिल हैं, जो कि प्राचीन समय में पानी के नीचे की दुनिया के लक्षण प्रस्तुत करती हैं।
  • वैज्ञानिक के अनुसार, लद्दाख प्राचीन काल में समुद्री जीवन, प्रवाल भित्तियों और समुद्र तटों का घर था। 
  • यह खोज लद्दाख के भूवैज्ञानिक इतिहास, टेक्टोनिक गतिविधि के प्रभाव और प्राचीन जलवायु स्थितियों में अंतर्दृष्टि प्रदान करती है।
  • यह खोज लद्दाख के साथ-साथ हिमालय के इतिहास एवं अस्तित्व को समझने और उनकी जैव विविधता पर प्रकाश डालने में महत्वपूर्ण होगी।
  • इस क्षेत्र के बारे में अभी तक प्राप्त जानकारी के अनुसार, हिमालय का निर्माण भारतीय प्लेट एवं यूरेशियन प्लेट के टकराव से माना जाता है जिसे इस खोज के बाद अब नए शिरे से समझने की आवश्यकता है। 

नोट : विश्व जीवाश्म दिवस प्रति वर्ष 19 अक्टूबर को मनाया जाता है।

मूंगा चट्टानों के बारे में:

  • मूंगा चट्टानों का निर्माण मूंगा पॉलीप्स से बनी भू-आकृतिक संरचना के द्वारा होता है,जो कैल्शियम कार्बोनेट, डोलोमाइट, रेत एवं गाद आदि से बने होते हैं ।

मूंगा चट्टानों के निर्माण के लिए आवश्यक दशाएं:

  • मूंगा चट्टानों के विकास के लिए समुद्र के जल की गहराई 30 फैदम (Fathoms) से कम होनी चाहिए।
  • जल की लवणता 27 से 33 भाग प्रति हजार (Parts Per Thousand) के मध्य होनी चाहिए तथा तापमान 18 डिग्री से 27 डिग्री सेल्सियस के मध्य होना चाहिए।

मूंगा चट्टान का महत्व :

  • यह पृथ्वी की जलवायु एवं जलवायु परिवर्तन के बारे में समझने के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इसमें समुद्र की सतह के तापमान और समुद्र के जल स्तर में उतार-चढ़ाव सहित पिछली जलवायु स्थितियों का प्रभाव होता है। 
  • मूंगा चट्टान पानी के नीचे का एक पारिस्थितिकी तंत्र है, जिसमें मूंगों की संरचनाएं भी शामिल होती हैं यह संरचनाएं कैल्शियम कार्बोनेट की एक चट्टान के साथ जुड़ी होती हैं। 
  • ये चट्टानें स्वस्थ समुद्री पारिस्थितिकी के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
  • यह चट्टान समुद्र के लगभग 25% प्रजातियों के लिए भोजन और आश्रय का मुख्य स्रोत है।

प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न:- हाल ही में वैज्ञानिकों ने हिमालय के किस क्षेत्र में मूंगा चट्टानों के जीवाश्मों की खोज की है ?

(a) हिमाचल प्रदेश में 

(b) उत्तराखंड में 

(c) लद्दाख में 

(d) जम्मू-कश्मीर में 

उत्तर: (c)

मुख्य परीक्षा प्रश्न -  वैज्ञानिकों द्वारा हिमालय क्षेत्र में खोजे गए मूंगा चट्टानों के जीवाश्म अवशेषों के महत्त्व पर प्रकाश डालें? 

स्रोत: THE TIMES OF INDIA

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