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दभोटा हरित हाइड्रोजन प्लांट

चर्चा में क्यों?

  • हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सोलन जिले के दभोटा में उत्तर भारत के पहले 1 मेगावाट के हरित हाइड्रोजन संयंत्र की आधारशिला रखी।

प्रमुख बिंदु:

  • इस संयंत्र की स्थापना हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीपीसीएल) द्वारा ऑयल इंडिया लिमिटेड के सहयोग से की जाएगी।
  • इस संयंत्र की स्थापना 9.04 करोड़ रुपये की लागत से की जाएगी।
  • हिमाचल प्रदेश मार्च 2026 तक भारत का पहला हरित ऊर्जा राज्य बनने के लिए प्रतिबद्ध है।
  • दभोटा ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट राज्य की अक्षय ऊर्जा  में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

हरित हाइड्रोजन:

  • एक ऐसा ईंधन है, जिसे नवीकरणीय ऊर्जा से बनाया जाता है।
  • हरित हाइड्रोजन एक स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है।
  • इसे जल (H₂O) के इलेक्ट्रोलिसिस द्वारा उत्पादित किया जाता है, जिसमें बिजली का उपयोग कर हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को अलग किया जाता है।
  • हरित हाइड्रोजन के उत्पादन की प्रक्रिया:

  • जल को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित किया जाता है।
  • इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन नहीं होता है।
  • ग्रीन हाइड्रोजन के लाभ:
    • यह जलवायु परिवर्तन को रोकने में मदद करता है।
    • यह जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करता है।
  • इसे परिवहन, औद्योगिक प्रक्रियाओं, बिजली उत्पादन और घरेलू उपयोग के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • इसे संपीड़ित या तरल  रूप में संग्रहीत किया जा सकता है।

प्रश्न. दभोटा हरित हाइड्रोजन संयंत्र की स्थापना किसके सहयोग से की जा रही है?

(a) NTPC

(b) ऑयल इंडिया लिमिटेड

(c) रिलायंस इंडस्ट्रीज

(d) टाटा पावर

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