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स्ट्रेटोस्फेरिक एयरशिप प्लेटफॉर्म

(प्रारंभिक परीक्षा : विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)

चर्चा में क्यों 

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने मध्यप्रदेश से स्ट्रेटोस्फेरिक एयरशिप प्लेटफॉर्म (Stratospheric Airship Platform) का सफलतापूर्वक पहला परीक्षण किया। इस सफल परीक्षण के साथ भारत उन कुछ देशों में शामिल हो गया है जिनके पास स्वदेशी उच्च ऊँचाई वाले एयरशिप सिस्टम विकसित करने की क्षमता है।

स्ट्रेटोस्फेरिक एयरशिप प्लेटफॉर्म के बारे में 

  • क्या है :  स्ट्रेटोस्फेरिक एयरशिप प्लेटफॉर्म एक अत्यधिक ऊँचाई पर उड़ने वाला लाइटर दैन एयर (Lighter-Than-Air : LTA) वाहन है जिसे विशेष रूप से पृथ्वी की सतह से 15-25 किमी. की ऊँचाई पर वातावरण के स्ट्रेटोस्फियर क्षेत्र में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। 
    • यह एयरशिप, ड्रोन एवं उपग्रहों के मुकाबले कम लागत में लंबी अवधि तक कार्य कर सकती है और इसका उपयोग विभिन्न रक्षा, इंटेलिजेंस व निगरानी मिशनों में किया जा सकता है।
  • विकास : यह एयरशिप प्लेटफॉर्म रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (ADRDE), आगरा ने विकसित किया है। 
  • परीक्षण स्थल : मध्य प्रदेश के श्योपुर परीक्षण स्थल से 
    • इस परीक्षण में एयरशिप ने लगभग 17 किमी. की ऊँचाई तक उड़ान भरी और 62 मिनट तक स्थिर उड़ान भरने में सफलता प्राप्त की।

प्रमुख विशेषताएँ

  • उच्च ऊंचाई पर उड़ान : एयरशिप लगभग 17 किमी. की ऊंचाई तक उड़ सकती है जो इसे ड्रोन के मुकाबले अधिक लंबी अवधि तक संचालन करने की क्षमता प्रदान करता है।
  • डाटा संग्रहण एवं विश्लेषण : एयरशिप में लगे सेंसर से प्राप्त डाटा का उपयोग भविष्य के एयरशिप मिशनों के लिए उच्च-विश्वसनीय सिमुलेशन मॉडल बनाने में किया जाएगा।
  • इंस्ट्रूमेंटल पेलोड : इस परीक्षण में एयरशिप एक वैज्ञानिक पेलोड लेकर गया, जिससे आवश्यक आँकड़े एकत्र किए गए।
  • आपातकालीन डिफ्लेशन सिस्टम : प्लेटफॉर्म में एक अत्याधुनिक आपातकालीन डिफ्लेशन सिस्टम भी है जिसे परीक्षण के दौरान सफलतापूर्वक तैनात किया गया।
  • पुनर्प्राप्ति : परीक्षण के बाद एयरशिप को सुरक्षित रूप से वापस लाया गया और आगे के विश्लेषण के लिए संरक्षित किया गया।

रणनीतिक महत्व एवं उपयोगिता 

  • रक्षा एवं इंटेलिजेंस : यह एयरशिप प्लेटफॉर्म भारत की इंटेलिजेंस, सर्विलांस एवं रिकॉनसेंस (ISR) क्षमताओं को बढ़ाएगा।
  • लंबी अवधि की निगरानी : यह प्लेटफॉर्म लंबी अवधि तक निरंतर निगरानी एवं डाटा संग्रहण के लिए आदर्श है जिससे युद्धक स्थितियों में भी भारत को लाभ होगा।
  • निम्न लागत में उच्च क्षमताएँ : उपग्रहों की तुलना में यह अधिक लागत-कुशल होगा और अधिक लंबे समय तक संचालन में सक्षम रहेगा।
  • पृथ्वी अवलोकन : उपग्रहों के अनुपूरक रूप में यह प्लेटफॉर्म उच्च-रिज़ॉल्यूशन डाटा एकत्र कर सकता है जो कृषि, मौसम विज्ञान एवं आपदा प्रबंधन के लिए अत्यंत उपयोगी है।
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