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पशु क्रूरता को रोकना राज्य का कर्तव्य

प्रारंभिक परीक्षा – जल्लीकट्टू, पशु अधिकार और सुरक्षा से संबंधित प्रावधान
मुख्य परीक्षा : सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र 2 – संघ एवं राज्यों के कार्य तथा उत्तरदायित्व

सन्दर्भ 

  • सर्वोच्च न्यायालय की एक संविधान पीठ द्वारा तमिलनाडु सरकार के जल्लीकट्टू की अनुमति देने वाले कानून की वैधता पर विचार किया जा रहा  है।

जल्लीकट्टू

jallikattu

  • जल्लीकट्टू, तमिलनाडु में एक खेल है, जिसमें खुले मैदान में छोड़े गए उत्तेजित सांडों के कूबड़ को पकड़ने के लिए पुरुष एक दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं। 
  • यह खेल आमतौर पर पोंगल के अवसर पर आयोजित किया जाता है।
  • एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया बनाम ए. नागराज (2014) मामले में, सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने जल्लीकट्टू को एक क्रूर व्यवहार बताया  जिससे जानवरों को अनावश्यक दर्द और पीड़ा होती है। 
  • हालांकि, तमिलनाडु सरकार ने जल्लीकट्टू की वैधता को पुनर्जीवित करने की कोशिश की और खेल को अनुमति देने वाला एक कानून पारित किया।
  • सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस कानून की वैधता की समीक्षा की जा रही है। 

पशु अधिकार और कल्याण 

  • संविधान के भाग III में उल्लिखित मौलिक अधिकारों में से कोई भी अधिकार स्पष्ट रूप से जानवरों के लिए सुरक्षा की गारंटी प्रदान नहीं करता है। 
  • उदाहरण के लिए, समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14) और जीवन का अधिकार (अनुच्छेद 21) एक व्यक्ति को प्रदान किया जाता है।
  • राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों (DPSP) और मौलिक कर्तव्यों में कुछ ऐसे प्रावधान हैं जो प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार के लिए राज्य और मनुष्यों की जिम्मेदारी को स्पष्ट करते हैं। 
  • पशु कल्याण पर कानून बनाने के प्रारंभिक प्रयास इस विश्वास पर आधारित नहीं थे कि जानवरों को अधिकार प्रदान किये गये हैं बल्कि यह इस सामूहिक विवेक पर आधारित थे, कि जानवरों को अनावश्यक दर्द और पीड़ा देना नैतिक रूप से गलत है, जैसा कि पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (PCA ACT)1960।
  • PCA ACT जानवरों के प्रति क्रूरता करने वाली कुछ कार्रवाइयों को आपराधिक घोषित करता है, लेकिन इसमें कुछ कमियां भी हैं, जैसे चिकित्सा प्रयोगों के लिए पशुओं के उपयोग को इससे छूट प्रदान की गई है। 
  • सुप्रीम कोर्ट ने PCA अधिनियम का सन्दर्भ लेते हुए कहा कि जल्लीकट्टू निषिद्ध कार्यों की सीमाओं के भीतर आता है। 
  • जल्लीकट्टू, PCA अधिनियम के प्रावधानों और अनुच्छेद 51ए (जी) में निहित मौलिक कर्तव्य का उल्लंघन करता है।
  • अनुच्छेद 51ए (जी) नागरिकों को "जंगलों, झीलों, नदियों और वन्य जीवन सहित प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार करने और जीवित प्राणियों के प्रति दया रखने" की आवश्यकता पर बल देता है।
  • हालांकि, तमिलनाडु ने 2017 में PCA अधिनियम में संशोधन करते हुए कहा कि राज्य और केंद्र सरकार दोनों के पास जानवरों के प्रति क्रूरता से संबंधित मुद्दों पर कानून बनाने की शक्ति है। 

याचिका के समर्थन में तर्क

  • किसी कानून की न्यायिक समीक्षा दो आधारों पर की जा सकती है -
    1. क्या विधायिका कानून बनाने के लिए सक्षम है।
    2. क्या कानून संविधान के भाग III में वर्णित किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है। 
  • याचिकाकर्ता के अनुसार तमिलनाडु द्वारा जल्लीकट्टू पर बनाया गया कानून इन  दोनों आधारों पर विफल रहा है। 
  •  याचिका में कहा गया कि केंद्र और राज्य दोनों को 'पशु क्रूरता की रोकथाम' पर कानून बनाने का समान अधिकार है , यह संविधान की सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची की प्रविष्टि 17 है। 
    • लेकिन जल्लीकट्टू को विनियमित करने वाले कानून का सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची की प्रविष्टि 17 से कोई सम्बन्ध नहीं है। 

आगे की राह 

  • तमिलनाडु में जल्लीकट्टू खेल को अनुमति देने वाले कानून की वैधता के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय पशु अधिकारों और कल्याण की स्पष्ट तस्वीर पेश करेगा। 
  • इसके अतिरिक्त, पशु कल्याण, राज्य और नागरिक दोनों का कर्तव्य है, क्योंकि इसका परिणाम एक बेहतर दुनिया के रूप में होगा जो जानवरों के साथ समान व्यवहार करती है और एक स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करती है।
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