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ई-माइग्रेट परियोजना

चर्चा में क्यों ?

  • हाल ही में विदेश मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के बीच ई-माइग्रेट सेवाएं प्रदान करने के लिए एक समझौता हुआ 
  • इस समझौते के तहत, विदेश मंत्रालय के ई-माइग्रेट पोर्टल को सीएससी के पोर्टल के साथ एकीकृत किया जाएगा
  • सीएससी के माध्यम से नागरिकों को निम्नलिखित ई-माइग्रेट सेवाएं प्रदान की जायेंगी - 
    • ई-माइग्रेट पोर्टल पर आवेदकों के पंजीकरण की सुविधा प्रदान 
    • ई-माइग्रेट पोर्टल पर आवेदकों के लिए आवश्यक दस्तावेजों को अपलोड करने और संसाधित करने की सुविधा।
    • ई-माइग्रेट पोर्टल पर पंजीकृत प्रवासी श्रमिकों या आवेदकों द्वारा आवश्यक चिकित्सा और अन्य सेवाओं के लिए बुकिंग की सुविधा 
    • पूरे भारत में नागरिकों के बीच ई-माइग्रेट सेवाओं के बारे में जागरूकता पैदा करना।

ई-माइग्रेट परियोजना

  • ई-माइग्रेट परियोजना की शुरुआत उत्प्रवास प्रक्रिया को ऑनलाइन सहज बनाकर प्रवासी श्रमिकों के सामने आने वाली समस्याओं का समाधान करने और सुरक्षित व कानूनी प्रवास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विदेशी नियोक्ताओं और पंजीकृत भर्ती एजेंटों तथा बीमा कंपनियों को एक मंच पर लाने के लिए की गई थी।
  • यह परियोजना मुख्य रूप से उत्प्रवास जांच अपेक्षित देशों में जाने वाले श्रमिकों की सहायता के लिए शुरू की गई है। 

उत्‍प्रवास जांच अपेक्षित देश

  • ऐसे देश जहां विदेशियों के लिए प्रवेश और रोजगार संबंधी कड़े कानून नहीं है और वो देश शिकायत निवारण के उपाय प्रदान नहीं करते हैं उन्हें उत्‍प्रवास जांच अपेक्षित देश कहा जाता है।  
  • ऐसे देशों में रोजगार के लिए जाने वाले लोगों को उत्‍प्रवास संबंधी मंजूरी लेनी होती है 
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