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फोर्टिफाइड चावल

(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-2 : सामाजिक न्याय; स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय; गरीबी एवं भूख से संबंधित विषय)

संदर्भ 

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत नि:शुल्क खाद्यान्न प्रदान करने वाली केंद्र सरकार की सभी योजनाओं में फोर्टिफाइड चावल (Fortified Rice) की सार्वभौमिक आपूर्ति को दिसंबर 2028 तक बढ़ा दिया है।

राइस फोर्टिफिकेशन पहल

  • अप्रैल 2022 में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने मार्च 2024 तक चरणबद्ध तरीके से देशभर में चावल फोर्टिफिकेशन पहल को लागू करने का निर्णय लिया था।
  • इस पहल का उद्देश्य देश में समावेशी पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना एवं एनीमिया व सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को दूर करना है।
  • इस पहल के तहत सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली, एकीकृत बाल विकास सेवा, पी.एम. पोषण जैसे कार्यक्रमों के तहत निःशुल्क फोर्टिफाइड चावल उपलब्ध कराया जाता रहा है।
  • चावल के फोर्टिफिकेशन में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार सूक्ष्म पोषक तत्वों (लौह, फोलिक एसिड, विटामिन बी 12) को मिलाया जाना शामिल है। 
  • भारतीय संदर्भ में सूक्ष्म पोषक तत्वों की आपूर्ति के लिए चावल एक आदर्श खाद्य है क्योंकि भारत की 65% आबादी मुख्य भोजन के रूप में चावल का सेवन करती है।

‘राइस फोर्टिफिकेशन’ या ‘चावल पौष्टिकीकरण’

  • ‘राइस फोर्टिफिकेशन’ अथवा ‘चावल पौष्टिकीकरण’ से तात्पर्य चावल में विटामिन या खनिज जैसे आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ाने की प्रक्रिया से है ताकि इसके पोषण मान में सुधार हो सके और न्यूनतम लागत पर सार्वजनिक स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया सके।
  • ‘भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण’ (FSSAI) फोर्टिफिकेशन को ‘खाद्यान्न में आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्त्वों को विचारपूर्वक बढ़ाने के रूप में परिभाषित करता है।
  • सरल शब्दों में फोर्टिफाइड राइस का तात्पर्य है पोषणयुक्त चावल। इसमें सामान्य चावल की तुलना में आयरन, विटामिन बी-12, फॉलिक एसिड की मात्रा अधिक होती है। 
  • राइस फोर्टिफिकेशन के लिये ‘कोटिंग’, डस्टिंग’ एवं ‘एक्सट्रूज़न’ (Extrusion) जैसी विभिन्न प्रौद्योगिकियाँ उपलब्ध हैं। भारत में राइस फोर्टिफिकेशन के लिये ‘एक्सट्रूज़न’ (उत्सादन) को सबसे अच्छी प्रौद्योगिकी माना जाता है।

राइस फोर्टिफिकेशन की आवश्यकता 

  • वर्तमान में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी या सूक्ष्म पोषक तत्वों का कुपोषण एक गंभीर स्वास्थ्य जोखिम है, जिसे ‘छिपी हुई भूख’ भी कहा जाता है। चूंकि संतुलित आहार की कमी, आहार विविधता में कमी या भोजन की अनुपलब्धता के कारण व्यक्ति को पर्याप्त सूक्ष्म पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं। ऐसे में फूड फोर्टिफिकेशन भोजन के पूरक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
  • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार, भारत में एनीमिया एक व्यापक समस्या बनी हुई है। यह विभिन्न आयु समूहों और आय स्तरों के बच्चों, महिलाओं व पुरुषों को प्रभावित करती है। 
    • इसके आलावा विटामिन बी 12 और फोलिक एसिड जैसे अन्य विटामिन व खनिज की कमी भी आबादी के समग्र स्वास्थ्य एवं उत्पादकता को प्रभावित करती है। 
  • भारत जैसे विकासशील देश में कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए भी खाद्यान्न को फोर्टिफाइड करना सबसे उपयुक्त तरीकों में से एक माना जाता है। 
    • भारत में प्रति व्यक्ति चावल की खपत 6.8 किग्रा. प्रति माह है। 
    • ऐसे में चावल को सूक्ष्म पोषक तत्वों से फोर्टिफाइड करना गरीबों के आहार को पूरक बनाने का एक बेहतर विकल्प है।

राइस फोर्टिफिकेशन से लाभ 

  • लागत प्रभावी : खाद्य पदार्थों के फोर्टिफिकेशन में लाभ-लागत अनुपात बहुत अधिक है। कोपेनहेगन सर्वसम्मति के अनुसार फोर्टिफिकेशन पर व्यय किए गए प्रत्येक 1 रुपए से अर्थव्यवस्था को 9 रुपए का लाभ होता है।
  • स्वास्थ्य सुधार : फूड फोर्टिफिकेशन में मुख्य खाद्य पदार्थों में पोषक तत्व मिलाए जाते हैं जिसके व्यापक सेवन से यह आबादी के एक बड़े हिस्से के स्वास्थ्य को एक साथ सुधारने का एक बेहतरीन तरीका है।
  • पोषण : यह लोगों के बीच पोषण को बेहतर बनाने का एक सुरक्षित तरीका है। भोजन में सूक्ष्म पोषक तत्वों को शामिल करने से लोगों के स्वास्थ्य को कोई खतरा नहीं होता है। 
  • स्वीकार्यता : फोर्टिफिकेशन से लोगों के खाने के पैटर्न या भोजन की आदतों में किसी भी तरह के बदलाव की आवश्यकता नहीं होती है। यह लोगों तक पोषक तत्व पहुँचाने का एक सामाजिक-सांस्कृतिक रूप से स्वीकार्य तरीका है।

फोर्टिफाइड राइस में शामिल पोषक तत्व 

  • एक किग्रा. फोर्टिफाइड राइस (Fortified rice) में आयरन (28-42.5 मिग्रा.), फॉलिक एसिड (75-125 माइक्रोग्राम), विटामिन बी-12 (0.75-1.25 माइक्रोग्राम) होता है। 
  • साथ ही, एफ.एस.एस.ए.आई. ने जिंक (10-15 मिग्रा.), विटामिन-ए (500-700 माइक्रोग्राम), विटामिन बी-1 (1-1.5 मिग्रा.) विटामिन बी-2 (1.25-1.75 मिग्रा.), विटामिन बी-3 (12.3-20 मिग्रा.) और विटामिन बी-6 (1.5-2.5 मिग्रा.) से भी चावल को फोर्टिफाइड करने की दिशानिर्देश जारी किया है। 

फोर्टिफिकेशन संबंधी चिंताएं 

  • ‘सतत् और समग्र कृषि हेतु गठबंधन’ (ASHA) ने कई नकारात्मक परिणामों को आधार बनाते हुए एफ.एस.एस.ए.आई. से खाद्य तेल और चावल के फोर्टिफिकेशन पर पुनर्विचार करने को कहा है।
  • इस निर्णय से असहमत होने का एक प्राथमिक कारण फोर्टिफाइड चावल के लाभों की प्रमाणिकता का अभी तक सिद्ध न होना भी है। साथ ही, आशा के शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला है कि चावल के फोर्टिफिकेशन से रक्ताल्पता होने के जोखिम में बहुत कम या लगभग न के बराबर अंतर आया है।
  • साथ ही, फोर्टिफाइड चावल के अधिक सेवन को लेकर भी चिंताएँ हैं। फ़ूड फोर्टिफिकेशन और ‘आयरन टैबलेट सप्लिमेंटेशन’ से महिलाओं के शरीर में लौह तत्वों की अधिकता हो सकती है।
  • आर्थिक रूप से देखा जाए तो यह कदम बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिये एक सुनिश्चित बाज़ार (Assured Market) का निर्माण करेगा, जिससे भारत में चावल और तेल प्रसंस्करण की छोटी इकाइयों के लिये खतरा उत्पन्न हो जाएगा।
  • तीसरा कारण यह है कि इस तरह के कदम से जैव विविधता के नष्ट होने का खतरा होता है, जो मोनोकल्चर में वृद्धि और मृदा स्वास्थ्य को कम करेगा।

इसे भी जानिए!

  • फोर्टिफाइड चावल की लंबाई 5 मिमी. और चौड़ाई 2.2 मिमी. से अधिक नहीं होती है। सामान्य चावलों की ही तरह दिखने वाले इन चावलों की पहचान के लिये इनके पैकेट पर +F का लोगो बना रहता है तथा इससे संबंधित निर्देश भी लिखे रहते हैं।
  • अमेरिका, पनामा, कोस्टारिका, निकारागुआ, पापुआ न्यू गिनी, फिलीपींस और सोलोमन द्वीप (सात देशों) ने चावल के फोर्टिफिकेशन को अनिवार्य कर दिया है।
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