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तमिलनाडु के मनमदुरई मिट्टी के बर्तनों को जीआई टैग

प्रारंभिक परीक्षा के लिए - बसोहली चित्रकला, जीआई टैग
मुख्य परीक्षा के लिए : सामान्य अध्ययन प्रश्नप्रत्र 3 - बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषय

सन्दर्भ 
  • हाल ही में, मनमदुरई मिट्टी के बर्तनों को भौगोलिक संकेतक(जीआई टैग) प्रदान किया गया।

मनमदुरई मिट्टी के बर्तन

manamadurai-pottery

  • मनमदुरई, तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में स्थित है।
  • इन मिट्टी के बर्तनों को बनाने के लिए विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है, क्योंकि तल पूरी तरह से गोल होना चाहिए। बर्तन और गर्दन की परिधि समानुपातिक होनी चाहिए ताकि बर्तन जमीन पर सपाट बैठ सकें।
  • बर्तनों को बनाने के लिए मुख्य कच्चा माल मिट्टी और पानी है।
  • मिट्टी और ताप का सही अनुपात इन बर्तनों को बहुत मजबूत बनाता है।
  • इन बर्तनों को बनाने के लिए नेदुनकुलम, नाथपुरक्की, सुंदरनादप्पु, सेकलथुर जैसे जल निकायों से एक अनूठी प्रकार की मिट्टी प्राप्त की जाती है।
  • बर्तनों को बनाते समय प्रकृति के पांच तत्वों पृथ्वी, जल, अग्नि, सूर्य और वायु का प्रयोग किया जाता है।

जीआई टैग 

  • जीआई टैग मुख्य रूप से कृषि संबंधी, प्राकृतिक या विनिर्मित्त वस्तुओं के लिए प्रदान किया जाता है, जिनमें अनूठे गुण, ख्याति या इसके भौगोलिक उद्भव के कारण जुड़ी अन्य लक्षणगत विशेषताएं होती है।
  • जीआई टैग एक प्रकार का बौद्धिक संपदा अधिकार(आईपीआर) होता है, जो आईपीआर के अन्य रूपों से भिन्न होता है, क्योंकि यह एक विशेष रूप से निर्धारित स्थान में समुदाय की विशिष्टता को दर्शाता है।
  • वर्ल्‍ड इंटलैक्‍चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गेनाइजेशन (WIPO) के अनुसार जियोग्राफिकल इंडिकेशंस टैग एक प्रकार का लेबल होता है, जिसमें किसी उत्पाद को विशेष भौगोलि‍क पहचान दी जाती है। 
  • जीआई टैग वाणिज्य मंत्रालय के तहत आने वाले डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्री प्रमोशन एंड इंटरनल ट्रेड द्वारा दिया जाता है।
  • भारत में, जीआई टैग के पंजीकरण को ‘वस्तुओं के भौगोलिक संकेतक (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 द्वारा विनियमित किया जाता है।
  • इसका पंजीकरण 10 वर्ष  के लिए मान्य होता है तथा 10 वर्ष बाद पंजीकरण का फिर से नवीनीकरण कराया जा सकता है।

जीआई टैग के लाभ 

  • यह भारत में भौगोलिक संकेतों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है, दूसरों द्वारा पंजीकृत भौगोलिक संकेतों के अनधिकृत उपयोग को रोकता है।
  • यह भौगोलिक क्षेत्र में उत्पादित/निर्मित वस्तुओं के उत्पादकों की आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देता है।
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