औद्योगिक उत्पादन सूचकांक

  • अप्रैल 2025 से शुरू करके सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय प्रत्येक माह की 28 तारीख को औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) का आंकड़ा जारी करेगा।
  • इस आँकड़े को जारी करने की समयसीमा 42 दिन से घटाकर 28 दिन कर दी गई है। वर्तमान में मंत्रालय हर महीने की 12 तारीख को छह सप्ताह के भीतर आई.आई.पी. आंकड़े जारी करता है।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के बारे में

  • क्या है : यह एक आर्थिक संकेतक है जो किसी देश के उद्योगों के उत्पादन के स्तर को मापता है।
  • आधार वर्ष :  2011-12
  • जारीकर्ता : केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा मासिक आधार पर
  • शामिल क्षेत्र : 
    • इसमें आठ प्रमुख उद्योग भी शामिल हैं जो आर्थिक गतिविधि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं (सूचकांक में शामिल कुल भारांश का 40.27%)।
    • रिफाइनरी उत्पाद
    • बिजली
    • इस्पात
    • कोयला
    • कच्चा तेल
    • प्राकृतिक गैस
    • सीमेंट
    • उर्वरक

प्रमुख उपयोग

  • आर्थिक स्थिति का संकेत : इससे यह पता चलता है कि औद्योगिक क्षेत्र में उत्पादन बढ़ रहा है या घट रहा है, जिससे देश की आर्थिक वृद्धि की दिशा का अनुमान लगाया जा सकता है।
  • नीतिगत निर्णय : सरकार एवं रिज़र्व बैंक जैसी संस्थाएँ इस संकेतक के डाटा का उपयोग नीति-निर्माण में करती हैं, जैसे कि ब्याज दरों में बदलाव या वित्तीय सुधार।
  • निवेश निर्णय : IIP निवेशकों को यह संकेत दे सकता है कि किस क्षेत्र में निवेश करना लाभकारी हो सकता है।

आई.आई.पी. पर अंतर्राष्ट्रीय मानक

  • औद्योगिक उत्पादन सूचकांक 2010 के लिए संयुक्त राष्ट्र की अंतर्राष्ट्रीय अनुशंसाओं में प्रावधान है कि मासिक आई.आई.पी. को संदर्भ महीने की समाप्ति के बाद 45 दिनों के अंदर जारी किया जाना चाहिए।
  • अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के विशेष डाटा प्रसार मानकों के अनुसार किसी भी संदर्भ महीने के लिए सूचकांक को उस महीने के अंत से छह सप्ताह के अंदर जारी किया जाना चाहिए।

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