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भारत ने विकसित की पहली स्वदेशी MRI मशीन

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारत ने अपनी पहली स्वदेशी चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग (MRI) मशीन विकसित की है।

चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग (MRI) के बारे में:

  • यह एक गैर-आक्रामक चिकित्सा तकनीक है।
  • ये शरीर के आंतरिक अंगों, ऊतकों और संरचनाओं की विस्तृत छवियाँ प्रदान करता है।
  • यह मजबूत चुंबकीय क्षेत्र रेडियो तरंगों और कंप्यूटर तकनीक का उपयोग करता है।
  • इसे अक्टूबर तक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली में स्थापित किया जाएगा।
  • उद्देश्य:
    • उपचार लागत में कमी
    • आयातित चिकित्सा उपकरणों पर निर्भरता घटाना
    • स्वदेशी चिकित्सा प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना
  • प्रमुख विशेषताएँ:
    • 1.5 टेस्ला MRI मशीन : यह भारत को चिकित्सा तकनीक में आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगी।
    • भारत की 80-85% चिकित्सा उपकरण आवश्यकताएँ अभी भी आयात के माध्यम से पूरी होती हैं।
    • SAMEER (Society for Applied Microwave Electronics Engineering and Research) के सहयोग से विकसित।
    • MRI लागत में 50% तक कमी लाने का लक्ष्य।
  • MRI के प्रमुख उपयोग:
    • मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी (Brain & Spine) की जांच
    • हृदय और रक्त वाहिकाएँ
    • अस्थियों और जोड़ों
    • आंतरिक अंगों की जांच
    • कैंसर की पहचान

प्रश्न: हाल ही में भारत ने अपनी पहली स्वदेशी चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग (MRI) मशीन विकसित की है। इसे किस संस्थान में स्थापित किया जाएगा?

(a) पीजीआई चंडीगढ़

(b) एम्स, नई दिल्ली

(c) सफदरजंग अस्पताल, दिल्ली

(d) अपोलो अस्पताल, चेन्नई

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