ISRO ने श्रीहरिकोटा से PSLV-C60 रॉकेट से 2 छोटे स्पेसक्राफ्ट लॉन्च किए गए।
इस मिशन का नाम SpaDeX रखा गया है।
क्या है SpaDeX मिशन?
ISRO ने SpaDeX मिशन के तहत 229 टन वजन के पीएसएलवी रॉकेट से दो छोटे उपग्रहों को प्रक्षेपित किया है।
ये उपग्रह 470 किलोमीटर की ऊंचाई पर डॉकिंग और अनडॉकिंग करेंगे।
SpaDeX मिशन का महत्त्व:
इस मिशन की मिशन भारत के आगामी मिशनों चंद्रयान-4, खुद का स्पेस स्टेशन और चांद पर भारतीय यात्री का पैर रखना जैसे सपनों को साकार करेगी।
डॉकिंग और अन डॉकिंग की प्रक्रिया:
पीएसएलवी रॉकेट में दो अंतरिक्ष यान- स्पेसक्राफ्ट ए (एसडीएक्स01) और स्पेसक्राफ्ट बी (एसडीएक्स02) को एक ऐसी कक्षा में रखा जाएगा जो उन्हें एक दूसरे से पांच किलोमीटर दूर रखेगी।
बाद में, इसरो मुख्यालय के वैज्ञानिक उन्हें तीन मीटर तक करीब लाने की कोशिश करेंगे, जिसके बाद वे पृथ्वी से लगभग 470 किलोमीटर की ऊंचाई पर परस्पर मिलकर एक हो जाएंगे। इस प्रक्रिया को डॉकिंग कहते हैं।
इसके बाद इन दोनों उपग्रहों को अलग यानी अन डॉकिंग भी किया जाएगा।
भारत ने लिया डॉकिंग सिस्टम पर पेटेंट:
अंतरिक्ष की दुनिया में डॉकिंग अनडॉकिंग की तकनीक को अंजाम देने में सिर्फ रूस, अमेरिका और चीन को ही महारत हासिल है।
अब भारत भी इस ग्रुप में शामिल होने की तैयारी में है।
ISRO ने अब इस डॉकिंग सिस्टम पर पेटेंट भी ले लिया है।
आमतौर पर कोई भी देश डॉकिंग और अनडॉकिंग की कठिन बारीकियों को शेयर नहीं करते हैं।
इसलिए ISRO को अपना खुद का डॉकिंग मैकेनिज्म बनाना पड़ा।
अमेरिका ने की थी सबसे पहले डॉकिंग:
अंतरिक्ष में सबसे पहले अमेरिका ने 16 मार्च, 1966 को डॉकिंग की थी।
सोवियत संघ ने पहली बार 30 अक्टूबर, 1967 को दो स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष में डॉक किए थे।
चीन ने पहली बार स्पेस डॉकिंग 2 नवंबर, 2011 को की थी।
प्रश्न. मिशन SpaDeX के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?