संदर्भ
- हाल ही में, रायबरेली स्थित राष्ट्रीय औषध शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (NIPER) ने भारत में औषध विज्ञान शिक्षा व अनुसंधान को मजबूत करने के उद्देश्य से रोश फार्मा इंडिया के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।
- यह समझौता नई दिल्ली के शास्त्री भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान हुआ, जहाँ रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के तहत औषध विभाग के सचिव मनोज जोशी भी उपस्थित रहे।
समझौते से संबंधित प्रमुख बिंदु
अकादमिक एवं उद्योग के बीच की दूरी होगी कम
- इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य शिक्षा जगत और औद्योगिक क्षेत्र के बीच मौजूद अंतर को कम करना है।
- इसके माध्यम से छात्रों व शिक्षकों को औषध विज्ञान के बदलते परिदृश्य एवं विनियामक ढांचे की बेहतर समझ प्रदान की जाएगी।
नई पहलें और प्रशिक्षण कार्यक्रम
- समझौते के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण पहलें शुरू की जाएंगी। इनमें-
- विनियामक मामलों पर प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम
- एआई-आधारित औषध अनुसंधान
- दवा विकास और स्वास्थ्य सेवा नवाचार जैसे विषयों पर उद्योग विशेषज्ञों द्वारा अतिथि व्याख्यान
- इससे विद्यार्थियों को उद्योग के व्यावहारिक पहलुओं को समझने का अवसर मिलेगा।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए क्षमता निर्माण पर जोर
भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए औषध विज्ञान, विनियामक विज्ञान, जैव विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को सुदृढ़ करना होगा। वस्तुतः इस दिशा में अकादमिक-उद्योग सहयोग अत्यंत आवश्यक है।
विकसित भारत और बायोफार्मा शक्ति मिशन के अनुरूप पहल
- यह सहयोग सरकार के ‘विकसित भारत’ विजन और ‘बायोफार्मा शक्ति’ मिशन के अनुरूप है।
- इसका उद्देश्य भारत को केवल मात्रा-आधारित दवा उत्पादन से आगे बढ़ाकर नवाचार-आधारित मूल्य सृजन की ओर ले जाना है जिससे देश की वैश्विक पहचान अधिक मजबूत हो सके।
भविष्य के लिए तैयार होगा कुशल कार्यबल
- यह पहल न केवल छात्रों को आधुनिक ज्ञान और कौशल से लैस करेगी बल्कि भारत के जीवन विज्ञान क्षेत्र में सतत विकास को भी बढ़ावा देगी।
- इस प्रकार, यह समझौता भविष्य के लिए सक्षम और तैयार कार्यबल निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।