संदर्भ
हाल ही में, राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (National Institute of Ocean Technology : NIOT) ने तमिलनाडु के मुत्तम तट (Muttom Beach) के निकट स्वदेशी रूप से विकसित फ्लोटिंग LiDAR बॉय सिस्टम (Floating LiDAR Buoy System) का सफल परीक्षण किया। यह उपलब्धि समुद्री अनुसंधान एवं मौसम विज्ञान के क्षेत्र में भारत की तकनीकी क्षमता को दर्शाती है।
फ्लोटिंग LiDAR बॉय सिस्टम के बारे में
- फ्लोटिंग LiDAR बॉय सिस्टम एक उन्नत समुद्री उपकरण है जिसका उपयोग समुद्र के ऊपर प्रवाहित होने वाली हवाओं की स्थिति के आकलन के लिए किया जाता है।
- यह एक तैरते हुए बॉय और LiDAR (Light Detection and Ranging) तकनीक का संयोजन है।
- यह लेजर किरणों की सहायता से वायुमंडलीय परिस्थितियों का अत्यधिक सटीक मापन करता है।
- इसका उद्देश्य समुद्री क्षेत्रों में हवा की गति, दिशा तथा विभिन्न ऊंचाइयों पर उसके व्यवहार का अध्ययन करना है।
कार्यप्रणाली
- यह प्रणाली LiDAR तकनीक के सिद्धांत पर कार्य करती है।
- बॉय समुद्र की सतह पर स्थिर रूप से तैरता रहता है।
- इसके द्वारा वातावरण की ओर लेजर पल्स भेजे जाते हैं।
- ये किरणें वायुमंडल में मौजूद कणों से टकराकर वापस लौटती हैं।
- लौटने वाले संकेतों का विश्लेषण कर वैज्ञानिक हवा की दिशा, गति एवं पैटर्न का निर्धारण करते हैं।
- इस प्रणाली की विशेषता यह है कि यह उन क्षेत्रों में भी रियल-टाइम और सटीक आंकड़े प्रदान करती है जहाँ पारंपरिक उपकरणों की पहुंच सीमित होती है।
- साथ ही, यह तकनीक समुद्र तल से लगभग 300 मीटर की ऊंचाई तक हवा से संबंधित विस्तृत जानकारी जुटाने में सक्षम है जो पारंपरिक विधियों से संभव नहीं है।
महत्व और उपयोगिता
- फ्लोटिंग LiDAR बॉय सिस्टम कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो सकता है:
- मौसम पूर्वानुमान को अधिक सटीक बनाना
- चक्रवात और समुद्री तूफानों की बेहतर निगरानी
- जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का अध्ययन
- समुद्री पारिस्थितिकी और वातावरण की गहन समझ विकसित करना
निष्कर्ष
फ्लोटिंग LiDAR बॉय सिस्टम का सफल परीक्षण भारत के लिए एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि है। यह न केवल समुद्री और मौसम संबंधी अनुसंधान को नई दिशा देगा, बल्कि भविष्य में आपदा प्रबंधन एवं जलवायु अध्ययन को भी अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होगा।