हाल ही में बायो जियो साइंसेज पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार आर्कटिक ग्लेशियरों से वायुमंडल में भारी मात्रा में मीथेन गैस का रिसाव हो रहा है।
अध्ययन का शीर्षक : ‘प्रोग्लेशियल मीथेन एमिशन ड्रिवेन बाय मेल्ट वाटर एंड ग्राउंड फ्लशिंग इन अ हाई-आर्कटिक ग्लेशियल कैचमेंट’
शोधकर्ताओं के अनुसार ग्लेशियर विशाल आवरण की तरह कार्य करते हैं, जो मीथेन को जमीन के नीचे फंसा लेते हैं।
ऐसे में ग्लेशियरों के पिघलने से बड़ी मात्रा में वायुमंडल में मीथेन का उत्सर्जन करते हैं।
ग्लेशियर के पिघलने पर जल रिसकर आधार-शैल की दरारों से होकर बहता है परिणामस्वरूप यह मीथेन गैस को सतह पर ले आता है।
इसे ग्लेशियल फ्रैकिंग प्रक्रिया भी कहा जाता है।
मीथेन : एक प्रमुख समस्या के रूप में
प्रमुख ग्रीन हाउस गैस :
कार्बन डाइऑक्साइड के बाद मीथेन प्रमुख ग्रीन हाउस गैस है, जो पूर्व-औद्योगिक काल से अब तक 30% तापमान वृद्धि के लिए जिम्मेदार है।
उच्च ग्लोबल वार्मिंग क्षमताः
कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में मीथेन ऊष्मा को रोकने में अधिक सक्षम है। ऐसा अनुमान है कि 100 वर्ष की अवधि में इसकी वैश्विक तापन क्षमता लगभग 28 गुना अधिक है।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की एक रिपोर्ट के अनुसार, अगले 20 वर्षों में कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में मीथेन 80 गुना अधिक तापमान वृद्धि करने में सक्षम होगी।
ओज़ोन निर्माण में भूमिका:
यह ग्राउंड-लेवल ओज़ोन के निर्माण में भी मुख्य भूमिका निभाती है, जो एक हानिकारक वायु प्रदूषक है।
वर्ष 2022 की एक रिपोर्ट के अनुसार, ग्राउंड-लेवल ओज़ोन के संपर्क में आने से प्रत्येक वर्ष लगभग 1 मिलियन लोगों की असामयिक मृत्यु होने की संभावना होती है।
मीथेन की मात्रा में वृद्धि:
कई अध्ययनों से पता चला है कि हाल के वर्षों में, वायुमंडल में मीथेन की मात्रा में तीव्र वृद्धि हुई है।
वर्ष 2022 में, यू.एस. नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के अनुसार वर्ष 2021 में मीथेन का वायुमंडलीय स्तर 17 भाग प्रति बिलियन बढ़ गया, जो वर्ष 2020 के रिकॉर्ड स्तर से अधिक था।
मीथेन उत्सर्जन प्रमुख स्रोत:
मीथेन उत्सर्जन का सबसे बड़ा मानवजनित स्रोत कृषि है, जो लगभग एक-चौथाई उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है।
इसके बाद ऊर्जा क्षेत्र का स्थान है, जिसमें कोयला, तेल, प्राकृतिक गैस और जैव ईंधन से होने वाले उत्सर्जन शामिल हैं।
प्रश्न: आर्कटिक ग्लेशियरों से मीथेन गैस का रिसाव किस कारण हो रहा है?
(a) ज्वालामुखी विस्फोट के कारण
(b) ग्लेशियरों के नीचे जैविक सामग्री के अपघटन के कारण