धरोहर स्थलों के संरक्षण और विकास के लिए एमओए पर हस्ताक्षर

संदर्भ 

हाल ही में एचएएल, एनसीएफ और एएसआई ने आज तीन प्रमुख धरोहर स्थलों (हेरिटेज साइट्स) - कर्नाटक में हम्पी, उत्तर प्रदेश के आगरा में ताजमहल और केरल में बेकल किले - पर विरासत संरक्षण और विकास के काम करने के लिए एक समझौते (एमओए) पर हस्ताक्षर किए। 

प्रमुख बिंदु 

  • एचएएल ने वित्त वर्ष 2026-27 से 2028-29 के दौरान परियोजनाओं के लिए ₹23.60 करोड़ की आर्थिक सहायता को सैद्धांतिक मंज़ूरी दी है। 
  • इन प्रस्तावित पहलों का उद्देश्य इन अहम धरोहर स्थलों पर आने वाले पर्यटकों के लिए सुविधाओं को बचाना, सुरक्षित रखना और बेहतर बनाना है, जिससे भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और टिकाऊ विरासत पर्यटन को बढ़ावा मिल सके।
  • यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल हम्पी में होने वाली परियोजनाओं में ऐतिहासिक नॉर्थ और साउथ बाजार इलाकों में सुधार के काम शामिल हैं, जिनमें प्रस्तावित विकास कार्य क्रमशः लगभग 270 मीटर और 250 मीटर तक फैले होंगे। ताजमहल और बेकल किले में होने वाली पहल एएसआई के साथ परामर्श के बाद मंजूर किए गए संरक्षण और स्थल-विकास कार्यों पर केंद्रित होंगी।

परियोजना में सहयोग:  

  • संस्कृति मंत्रालय द्वारा स्थापित 'राष्ट्रीय संस्कृति कोष' (एनसीएफ), भारत की मूर्त और अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए सरकार और कॉर्पोरेट क्षेत्र के बीच साझेदारी को बढ़ावा देता है। इस सहयोग के जरिए, एनसीएफ, एचएएल और एएसआई के साथ मिलकर परियोजनाओं को लागू करने में मदद करेगा।
  • ये परियोजनाएं एएसआई की तकनीकी देखरेख और मार्गदर्शन में पूरे किए जाएंगे, ताकि संरक्षण के तय सिद्धांतों और नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके।

महत्त्व: 

  • यह साझेदारी कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) के प्रति एचएएल की प्रतिबद्धता और भारत की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने में उसके योगदान को दर्शाती है। साथ ही, यह आने वाली पीढ़ियों के लिए देश की अमूल्य विरासत को संरक्षित करने में सरकारी संस्थानों और कॉर्पोरेट संगठनों के आपसी सहयोग के महत्व को भी रेखांकित करती है।  
  • एमओए पर हस्ताक्षर करना हेरिटेज सेक्टर में सार्वजनिक- निजी भागीदारी को मजबूत करने और भारत की सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा और उसे बढ़ावा देने के साझा लक्ष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम है। 

राष्ट्रीय संस्कृति निधि (एनसीएफ) के बारे में  

  • राष्ट्रीय संस्कृति निधि (एनसीएफ), संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन एक न्यास है, जो दानदाता/प्रायोजक संस्थाओं को भारत की समृद्ध मूर्त एवं अमूर्त संस्कृति तथा विरासत (स्मारकों/सांस्कृतिक परंपराओं) के संरक्षण, पुनर्स्थापन, संवर्धन एवं विकास हेतु सरकार के साथ सीधे भागीदार के रूप में सहयोग देने के लिए एक वित्तपोषण तंत्र के रूप में कार्य करता है। 
  • राष्ट्रीय संस्कृति निधि (एनसीएफ) की स्थापना भारत सरकार, संस्कृति मंत्रालय द्वारा धर्मार्थ न्यास अधिनियम (चैरिटेबल एंडाउमेंट एक्ट), 1890 के अंतर्गत एक न्यास के रूप में, 28 नवंबर 1996 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से की गई थी। 

एनसीएफ का विजन:  

  • एनसीएफ की भूमिका निजी, सार्वजनिक, सरकारी (केंद्रीय एवं राज्य), गैर-सरकारी एजेंसियों, निजी संस्थानों एवं फाउंडेशनों के बीच संबंध स्थापित करना तथा भारत की समृद्ध, प्राकृतिक, मूर्त एवं अमूर्त विरासत की पुनर्स्थापना, संरक्षण, परिरक्षण एवं विकास हेतु संसाधन जुटाना है। 

एनसीएफ की विशेषताएं: 

  • एनसीएफ विरासत, संस्कृति एवं कला के क्षेत्र में भागीदारी हेतु एक विश्वसनीय एवं नवाचारी मंच प्रदान करता है। 
  • एनसीएफ के पास प्रत्येक परियोजना हेतु एक पारदर्शी निधि प्रबंधन प्रणाली है। परियोजनाओं की निगरानी एक परियोजना कार्यान्वयन समिति (पीआईसी) द्वारा की जाती है, जिसमें दानदाता, कार्यान्वयनकर्ता एवं एनसीएफ के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। 
  • एनसीएफ के खातों का प्रतिवर्ष भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक द्वारा लेखा परीक्षण किया जाता है।
  • एनसीएफ दानदाता को देश के किसी भी भाग में उनकी पसंद की सांस्कृतिक परियोजनाओं को क्रियान्वित करने हेतु स्थापित विश्वसनीयता वाली एजेंसियों से जोड़ने के तंत्र के रूप में कार्य करता है।
  • एनसीएफ सभी को हमारे साझा भविष्य को सुदृढ़ करने हेतु भारत के सांस्कृतिक समुदाय के साथ एक दीर्घकालिक संबंध में एनसीएफ के साथ भागीदारी करने के लिए आमंत्रित करता है। 
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