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इस्लामिक सहयोग संगठन (Organisation of Islamic Cooperation – OIC)

चर्चा में क्यों?

हाल ही में, तुर्की द्वारा आर्मीनिया-अज़रबैजान विवाद को परोक्ष रूप से लगातार बढ़ाने के लिये और अज़रबैजान के समर्थन में लॉबिंग करने के लिये इस्लामिक सहयोग संगठन ने तुर्की को फटकार लगाई है।

ध्यातव्य है कि तुर्की लगातार पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम एशिया में उत्पन्न हो रहे विवादों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है और अक्सर वह इन विवादों में हस्तक्षेप करता है जिसका वैश्विक स्तर पर विरोध होता आया है।

परिचय

  • गठन – 25 सितम्बर 1969 (मोरक्को की राजधानी रबात में)
  • पूर्व नाम – इस्लामिक सभा संगठन (Organisation of the Islamic Conference - OIC)
  • मुख्यालय – जेद्दा, सऊदी अरब
  • सदस्य – 57 (इनमें ‘फिलिस्तीन’ एकमात्र ऐसा देश है, जो संयुक्त राष्ट्र संघ का सदस्य नहीं है।)
  • आधिकारिक भाषाएँ – अरबी, अंग्रेजी, फ्रेंच।
  • उद्देश्य– मुस्लिमों की प्रगति व बेहतरी के प्रयास करना तथा समस्त देशों के साझा हितों की रक्षा करना।
  • कार्य– सभी सदस्य देशों के मध्य सामाजिक-सांस्कृतिक, राजनीतिक सम्बंधों को बढ़ाना, शैक्षिक, वैज्ञानिक व आर्थिक विकास का संवर्धन करना तथा इस्लामी-शिक्षा को प्रोत्साहित करना।

प्रमुख बिंदु : –

  • इस संगठन का ‘संयुक्त राष्ट्र’ व ‘यूरोपीय यूनियन’ में स्थायी प्रतिनिधित्व है।
  • इस संगठन की बैठक में सदस्य देशों के केंद्रीय विदेश मंत्री हिस्सा लेते हैं।
  • 10-11 सितम्बर 2017 को कज़ाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में हुई अपनी बैठक में ओआईसी द्वारा अस्ताना घोषणापत्र अपनाया गया। ‘अस्ताना घोषणापत्र’ का उद्देश्य सभी सदस्य देशों में विज्ञान व तकनीक को बढ़ावा देना है।
  • भारत ओ.आई.सी. का सदस्य नहीं है।
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