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ओज़ेम्पिक स्कैम तथा लुकआउट सर्कुलर

एक भारतीय फार्मा कंपनी के सी.ई.ओ. विक्की रामंचा के खिलाफ एक अमेरिकी कंपनी से कथित तौर पर 180 करोड़ की धोखाधड़ी करने के आरोप में लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी किया गया है क्योंकि वे समझौते के अनुसार ओज़ेम्पिक दवा की खुराकें देने में असफल रहे।

ओज़ेम्पिक दवा के बारे में

  • ओज़ेम्पिक (Ozempic) में सक्रिय औषधीय घटक (API) के रूप में ‘सेमाग्लूटाइड’ (Semaglutide) का प्रयोग किया गया।  
  • सेमाग्लूटाइड युक्त इस दवा का उपयोग टाइप-2 मधुमेह और धीरे-धीरे वजन नियंत्रण के लिए किया जाता है।
  • इस दवा के उच्च वैश्विक मांग के कारण नकली दवाओं का प्रचलन और घोटाले बढ़े हैं।

क्या है लुकआउट सर्कुलर 

  • लुकआउट सर्कुलर (Look Out Circular: LOC) एक प्रशासनिक/कानूनी व्यवस्था है जिसके तहत सरकार या जाँच एजेंसी सीमा चेक-पोस्ट, हवाई अड्डों, बंदरगाहों पर इमिग्रेशन अधिकारियों को अलर्ट जारी करती है, ताकि किसी व्यक्ति को देश छोड़कर भागने से रोका जा सके।
  • उद्देश्य : वांछित अपराधियों, आर्थिक अपराधियों, बकायेदारों या जाँच में सहयोग न करने वाले व्यक्तियों को देश से बाहर जाने से रोकना।
    • इन पर निगरानी रखते हुए जाँच एजेंसियों को सूचना देना।
  • जारीकर्ता एजेंसियाँ : गृह मंत्रालय (MHA) के दिशा-निर्देशों के तहत सी.बी.आई., ई.डी., पुलिस, एस.एफ.आई.ओ., आयकर विभाग, बैंक अथॉरिटी आदि LOC जारी करने का अनुरोध कर सकती हैं।
  • इमिग्रेशन स्तर पर कार्रवाई : जब LOC दर्ज होता है तो एयरपोर्ट/सीपोर्ट पर इमिग्रेशन अधिकारी उस व्यक्ति को रोक लेते हैं तथा सबंधित एजेंसी को तुरंत सूचना दी जाती है।
  • इसके तहत कभी-कभी व्यक्ति को केवल ‘सूचना इकट्ठा करने’ के लिए भी रोका जाता है और हमेशा गिरफ्तार ही नहीं किया जाता है।
  • वैधता और समीक्षा : LOC आमतौर पर 1 वर्ष के लिए वैध होता है (जब तक बढ़ाया न जाए) और जारीकर्ता एजेंसी इसे वापस भी ले सकती है।
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