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मतदान प्रक्रिया बाधित होने पर चुनाव आयोग की शक्तियाँ

संदर्भ

चुनाव आयोग द्वारा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (RPA) की धारा 58 (2) और 58 ए (2) के तहत मणिपुर के 11 मतदान केंद्रों पर मतदान को शून्य घोषित कर दिया है ओर अरुणाचल प्रदेश के 8 मतदान केंद्रों पर 22 अप्रैल और 24 अप्रैल को पुनर्मतदान करावाया गया गया है ।

सामान्य मतदान प्रक्रिया को बाधित करने वाली परिस्थितियां

  • जानबूझकर ईवीएम नष्ट करना या चोरी करना : जन प्रतिनिधि कानून की धारा 58 ('मतपेटियों के नष्ट हो जाने आदि की स्थिति में पुनः मतदान') के अंतर्गत, चुनाव आयोग किसी मतदान केंद्र पर मतदान को निरस्त घोषित कर सकता है, यदि:
    • किसी अनाधिकृत व्यक्ति ने कोई ईवीएम अवैध रूप से ले ली हो। 
    • किसी ईवीएम को गलती से या जानबूझकर नष्ट कर दिया गया हो या खो दिया गया हो। 
    • क्षतिग्रस्त कर दिया गया हो या उसके साथ छेड़छाड़ की गई हो। 
    • वोटों की रिकॉर्डिंग के दौरान किसी भी ईवीएम में यांत्रिक खराबी आ जाती है।
  • बूथ कैप्चरिंग : जन प्रतिनिधि कानून की धारा 135A में परिभाषित बूथ कैप्चरिंग में किसी व्यक्ति या व्यक्तियों द्वारा की जाने वाली निम्नलिखित सभी या कोई भी गतिविधियाँ शामिल हैं:
    • मतदान केन्द्र पर कब्ज़ा करना, जिससे चुनाव का संचालन प्रभावित हो
    • मतदान केन्द्र पर कब्ज़ा करना, तथा केवल अपने या अपने समर्थकों को ही मतदान करने देना।
    • किसी भी मतदाता को डराना या धमकाना तथा उसे मतदान केन्द्र पर जाने से रोकना
    • मतगणना स्थल पर कब्ज़ा करना जिससे मतगणना प्रभावित हो।
    • उपरोक्त किसी भी गतिविधि में सरकारी सेवा में किसी भी व्यक्ति की भागीदारी।
  • प्राकृतिक आपदाएँ, मतदान में अन्य व्यवधान -किसी मतदान केंद्र का पीठासीन अधिकारी जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 57(1) के अंतर्गत मतदान केंद्र पर मतदान स्थगित कर सकता है, यदि:
    • बाढ़, भयंकर तूफान जैसी प्राकृतिक आपदा उत्पन्न होना ।
    • ईवीएम, मतदाता सूची आदि जैसी आवश्यक मतदान सामग्री की प्राप्ति न होना, उसका खो जाना या क्षति होना ।
    • किसी दंगे या खुली हिंसा के कारण व्यवधान या बाधा ।
    • बाधा या किसी अन्य गंभीर कठिनाई के कारण मतदान दल का न पहुंचना; याईवीएम में खराबी या किसी अन्य कारण से निर्धारित समय से दो घंटे के भीतर मतदान शुरू न होना।

किसी उम्मीदवार की मृत्यु

  • 1996 में संशोधित जन प्रतिनिधि अधिनियम की धारा 52 के अनुसार, चुनाव केवल मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल (राष्ट्रीय दल या संबंधित राज्य में राज्य स्तरीय दल के उम्मीदवार) की मृत्यु की स्थिति में स्थगित किया जाएगा।
  • उपरोक्त प्रावधान तब लागू होता है, जब वैध नामांकन वाले उम्मीदवार की नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि को सुबह 11 बजे के बाद मतदान शुरू होने तक किसी भी समय मृत्यु हो जाती है। 

भारत के चुनाव कानून ऐसी परिस्थितियों से निपटने के नियम 

  • ईवीएम को नुकसान पहुँचने के मामलों में, रिटर्निंग ऑफिसर (RO) तत्काल चुनाव आयोग और राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को प्रासंगिक तथ्यों और भौतिक परिस्थितियों के बारे में सूचित करता है, जिन पर विचार करने के बाद, चुनाव आयोग मतदान को रद्द घोषित कर सकता है और औपचारिक रूप से नए मतदान की तारीख और समय तय कर सकता है।
  • बूथ कैप्चरिंग के लिए कम से कम एक वर्ष की सजा हो सकती है, जिसे आम लोगों के लिए तीन साल तक बढ़ाया जा सकता है, जो सरकारी कर्मचारियों के लिए पांच साल तक बढ़ सकती है। 
  • बूथ कैप्चरिंग मतदान केन्द्र पर मतदान को निरस्त घोषित कर सकता है तथा नई तिथि पर पुनः मतदान कराने का निर्देश दे सकता है
  • यदि बड़ी संख्या में मतदान केन्द्रों पर बूथ कैप्चरिंग हुई हो या इससे मतगणना प्रभावित हुई हो तो निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव रद्द किया जा सकता है।
  • धारा 58ए ('बूथ कैप्चरिंग के आधार पर मतदान स्थगित करना या चुनाव रद्द करना') के तहत यदि किसी मतदान केंद्र पर बूथ कैप्चरिंग हुई है, तो मतदान केंद्र का पीठासीन अधिकारी तुरंत ईवीएम की नियंत्रण इकाई को बंद कर देता है और निर्वाचन संचालन नियम, 1961 के नियम 49एक्स के तहत नियंत्रण इकाई से मतपत्र इकाई को अलग कर देता है।
  • किसी उम्मीदवार की मृत्यु की स्थिति में चुनाव आयोग संबंधित राजनीतिक दल से मृतक उम्मीदवार के स्थान पर उक्त चुनाव के लिए किसी अन्य उम्मीदवार को नामित करने के लिए कहता है। राजनीतिक दल को सात दिनों के भीतर नामांकन करना होगा।
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