संदर्भ
हाल ही में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री ने पहले पर्यावरण-शैक्षिक केंद्र ‘प्रकृति ज्ञान धाम’ (Prakriti Gyan Dham) का लोकार्पण किया।
पर्यावरण-शैक्षिक केंद्र के बारे में
- प्रकृति ज्ञान धाम का विकास वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (CSIR-NBRI) द्वारा किया गया है।
- यह केंद्र वैज्ञानिक ज्ञान और आमजन की सहभागिता के बीच एक प्रत्यक्ष सेतु के रूप में कार्य करता है।
- यहां वैज्ञानिक अवधारणाओं एवं सूचनाओं को अनुभवात्मक तथा संवादात्मक शिक्षण के माध्यम से जनसामान्य के लिए अधिक सुलभ और समझने योग्य बनाया गया है।
पर्यावरण-शैक्षिक केंद्र की प्रमुख विशेषताएं:
1. PAaVan Path
- PAaVan Path (Plants and Associated Vegetations for Appreciating Nature) एक व्याख्यात्मक विरासत पथ (Interpretive Heritage Trail) है। इसके माध्यम से आगंतुकों को विभिन्न पारिस्थितिक क्षेत्रों और उनसे संबंधित वनस्पतियों का प्रतिनिधित्व करने वाले सुव्यवस्थित पौध संग्रहों से परिचित कराया जाता है।
- यह पथ लोगों को प्रकृति तथा वनस्पति विविधता को प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से समझने का अवसर प्रदान करता है।
2. विभव एन्क्लेव (Vibhav Enclave)
- Vibhav Enclave (विभव एन्क्लेव) को भारत के संकटग्रस्त पौधों के उद्यान (Threatened Plants of India Garden) के रूप में विकसित किया गया है। इसमें दुर्लभ, लुप्तप्राय और संकटग्रस्त पौध प्रजातियों के संरक्षण तथा प्रदर्शन के लिए एक समर्पित स्थान उपलब्ध कराया गया है।
- यह परिसर जैव-विविधता के ह्रास, आवासीय क्षरण और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ पादप आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।
3. भैरव एन्क्लेव (Bhairav Enclave)
- Bhairav Enclave (भैरव एन्क्लेव) को भारत के राज्य पौधों के उद्यान (State Plants of India Garden) के रूप में विकसित किया गया है। इसमें विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा आधिकारिक रूप से निर्धारित राज्य पौधों को एक ही स्थान पर प्रदर्शित किया गया है।
- यह उद्यान इन पौधों के पारिस्थितिक, सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक महत्व को सामने लाता है। साथ ही, यह भारत की समृद्ध वनस्पति विविधता तथा उसके सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन के बीच मौजूद गहरे संबंध को समझने का अवसर प्रदान करता है।
वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के बारे में
- वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) भारत का एक प्रमुख वैज्ञानिक एवं अनुसंधान संगठन है। यह विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विभिन्न क्षेत्रों में आधुनिक शोध एवं विकास कार्य करता है। सीएसआईआर अपने उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी ज्ञान और नवाचार के लिए जाना जाता है।
- सीएसआईआर का देशभर में व्यापक नेटवर्क है। इसके अंतर्गत 37 राष्ट्रीय प्रयोगशालाएं, 39 आउटरीच केंद्र, एक नवाचार परिसर और अखिल भारतीय स्तर पर कार्य करने वाली तीन इकाइयां शामिल हैं। इसके माध्यम से सीएसआईआर देश के विभिन्न हिस्सों में वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी विकास को बढ़ावा देता है।
सीएसआईआर का कार्यक्षेत्र
- सीएसआईआर विज्ञान और प्रौद्योगिकी के व्यापक क्षेत्रों में कार्य करता है। इनमें समुद्र विज्ञान, भूभौतिकी, रसायन विज्ञान, औषधि, जीनोमिक्स, जैव प्रौद्योगिकी, नैनो प्रौद्योगिकी, खनन, वैमानिकी, वैज्ञानिक उपकरण, पर्यावरण इंजीनियरिंग और सूचना प्रौद्योगिकी प्रमुख हैं।
- सीएसआईआर का उद्देश्य केवल वैज्ञानिक अनुसंधान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके शोध का लाभ आम लोगों तक पहुंचाना भी है। यह पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य, पेयजल, खाद्य सुरक्षा, आवास, ऊर्जा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तकनीकी समाधान विकसित करता है। इसके अलावा, गैर-कृषि क्षेत्र से जुड़े सामाजिक एवं आर्थिक मुद्दों के समाधान में भी सीएसआईआर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े मानव संसाधन के विकास में भी सीएसआईआर का महत्वपूर्ण योगदान है। यह शोध, प्रशिक्षण और नवाचार के माध्यम से देश में वैज्ञानिक प्रतिभाओं को विकसित करने में सहायता करता है।
CSIR@2030 का विजन:
- सीएसआईआर ने CSIR@2030 के लिए एक दीर्घकालिक विजन तैयार किया है। इसका मुख्य उद्देश्य नवीन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, विश्वस्तरीय अनुसंधान एवं विकास, टिकाऊ समाधान और क्षमता निर्माण के माध्यम से भारत के नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है।
- यह विजन भारत को वैज्ञानिक और तकनीकी रूप से अधिक आत्मनिर्भर एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में केंद्रित है। इसका संबंध भारत सरकार के अगले 25 वर्षों के विकास के दृष्टिकोण ‘अमृत काल’ से भी है। अमृत काल का लक्ष्य ऐसे विकसित और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना है, जो स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने तक यानी वर्ष 2047 तक मजबूत, समृद्ध और तकनीकी रूप से सक्षम राष्ट्र बन सके।
- इस प्रकार, सीएसआईआर भारत के वैज्ञानिक विकास, तकनीकी आत्मनिर्भरता, नवाचार और सामाजिक कल्याण को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।