संदर्भ
भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाने की दिशा में इंडियन कल्चर पोर्टल (ICP) 2.0 एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है। मार्च 2026 में शुरू किए गए पोर्टल के इस उन्नत संस्करण का उद्देश्य भारत की मूर्त और अमूर्त सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी डिजिटल सामग्री को एक आधुनिक, सुरक्षित और आसानी से सुलभ मंच पर उपलब्ध कराना है। नए संस्करण को आधुनिक, स्केलेबल और सुरक्षित आर्किटेक्चर के साथ विकसित किया गया है, ताकि उपयोगकर्ता विभिन्न सांस्कृतिक संसाधनों को एक ही डिजिटल मंच के माध्यम से खोज और देख सकें।
आधुनिक तकनीक और बेहतर यूजर अनुभव
- इंडियन कल्चर पोर्टल 2.0 में उपयोगकर्ताओं की सुविधा को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इसके लिए आधुनिक और रिस्पॉन्सिव यूजर इंटरफेस तैयार किया गया है, जिससे पोर्टल पर नेविगेशन पहले की तुलना में अधिक सहज हो गया है।
- वेबसाइट को इस तरह विकसित किया गया है कि इसे डेस्कटॉप, लैपटॉप, टैबलेट और मोबाइल फोन सहित विभिन्न स्क्रीन आकारों वाले उपकरणों पर आसानी से इस्तेमाल किया जा सके।
- पोर्टल को प्रोग्रेसिव वेब एप्लिकेशन (PWA) के रूप में विकसित किया गया है। इससे विभिन्न डिजिटल उपकरणों पर इसकी पहुंच और उपयोगिता बढ़ती है। बेहतर प्रदर्शन, स्केलेबिलिटी और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रिएक्ट तथा ड्रूपल 10 पर आधारित डिकपल्ड आर्किटेक्चर को अपनाया गया है।
22 भारतीय भाषाओं में सांस्कृतिक सामग्री
- भारत जैसे बहुभाषी देश में सांस्कृतिक विरासत को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने के लिए बहुभाषी डिजिटल प्लेटफॉर्म की आवश्यकता है। इसी दिशा में पोर्टल को भाषिणी प्लेटफॉर्म के साथ एकीकृत किया गया है। इसके माध्यम से पोर्टल की सामग्री 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराई गई है।
- बहुभाषी समर्थन से अलग-अलग भाषाई पृष्ठभूमि वाले उपयोगकर्ताओं के लिए भारतीय इतिहास, कला, साहित्य, परंपराओं और अन्य सांस्कृतिक संसाधनों तक पहुंच आसान होगी। यह सुविधा देश के विभिन्न हिस्सों में डिजिटल सांस्कृतिक भागीदारी को बढ़ावा देने के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने में भी सहायक हो सकती है।
एआई चैटबॉट 'भारती' से स्मार्ट खोज
- पोर्टल 2.0 की प्रमुख विशेषताओं में एआई-संचालित चैटबॉट 'भारती' भी शामिल है। यह उपयोगकर्ताओं को स्मार्ट सर्च, सांस्कृतिक सामग्री की खोज और बहुभाषी संवाद की सुविधा प्रदान करता है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित यह सुविधा उपयोगकर्ताओं को उनकी आवश्यकता के अनुरूप सांस्कृतिक संसाधनों तक पहुंचने में मदद करती है।
- इसके साथ ही पोर्टल पर उन्नत खोज और फिल्टरिंग सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। मेटाडेटा आधारित खोज के माध्यम से उपयोगकर्ता बड़ी मात्रा में उपलब्ध डिजिटल सामग्री में से अपनी जरूरत के अनुरूप संसाधनों को अधिक प्रभावी ढंग से खोज सकते हैं।
सांस्कृतिक संस्थानों के संसाधनों का एकीकृत मंच
- इंडियन कल्चर पोर्टल केवल एक वेबसाइट नहीं, बल्कि विभिन्न सांस्कृतिक संस्थानों के डिजिटल संसाधनों को एक साथ लाने वाले एकीकृत खोज मंच के रूप में विकसित किया गया है। इसके माध्यम से संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले संग्रहालयों, पुस्तकालयों, अभिलेखागारों, स्मारकों और अन्य सांस्कृतिक संस्थानों तथा साझेदार संगठनों से प्राप्त डिजिटल संसाधनों को एक मंच पर उपलब्ध कराया जाता है।
- पोर्टल ने सांस्कृतिक संस्थानों के एकीकरण के लिए मानकीकृत मेटाडेटा विनिमय, एपीआई और संस्थागत ऑनबोर्डिंग जैसी व्यवस्थाएं भी विकसित की हैं। इससे अलग-अलग संस्थानों के डिजिटल संग्रहों को व्यवस्थित तरीके से पोर्टल से जोड़ने और उपयोगकर्ताओं के लिए उनकी खोज को आसान बनाने में मदद मिलती है।
जनभागीदारी और क्यूरेटेड संग्रहों पर जोर
- डिजिटल सांस्कृतिक विरासत को केवल संग्रहित करना ही पर्याप्त नहीं है; उसे लोगों के लिए रोचक और उपयोगी बनाना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से पोर्टल में नए विषयगत खंड और चयनित एवं क्यूरेटेड सांस्कृतिक संग्रह जोड़े गए हैं। इनके माध्यम से उपयोगकर्ता विभिन्न विषयों के आधार पर भारत की सांस्कृतिक विविधता को समझ और खोज सकते हैं।
- यह पहल जनभागीदारी को बढ़ावा देने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति की मूर्त और अमूर्त दोनों प्रकार की विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
शोध और शिक्षा के लिए उपयोगी मंच
- इंडियन कल्चर पोर्टल 2.0 का महत्व केवल आम दर्शकों तक सीमित नहीं है। उन्नत खोज, मेटाडेटा आधारित सामग्री और डिजिटलीकृत संग्रहों की उपलब्धता इसे छात्रों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों के लिए भी उपयोगी संसाधन बनाती है।
- एक ही मंच पर विभिन्न संस्थानों की सामग्री उपलब्ध होने से शोधकर्ताओं को संग्रहालयों, अभिलेखागारों, पुस्तकालयों, पांडुलिपियों, कलाकृतियों और अन्य सांस्कृतिक संसाधनों की जानकारी प्राप्त करने में सुविधा होगी। प्रमाणित और विश्वसनीय सांस्कृतिक जानकारी तक डिजिटल पहुंच शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भी उपयोगी साबित हो सकती है।
विरासत का वर्चुअल अन्वेषण और डिजिटल संरक्षण
- पोर्टल के माध्यम से संग्रहालयों, स्मारकों, पांडुलिपियों, कलाकृतियों और विभिन्न विरासत संग्रहों का वर्चुअल अन्वेषण संभव बनाया गया है। इससे ऐसे सांस्कृतिक संसाधनों को भी व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है, जिन तक भौतिक रूप से पहुंचना हर व्यक्ति के लिए संभव नहीं होता।
- इसके अलावा, सांस्कृतिक संसाधनों का दीर्घकालिक डिजिटल संरक्षण भी इस पहल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है। डिजिटल रूप में सामग्री को व्यवस्थित और संरक्षित करने से आने वाली पीढ़ियों के लिए भारत की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में आधार मजबूत होता है।
वैश्विक पहुंच की ओर एक कदम
- इंडियन कल्चर पोर्टल 2.0 का व्यापक उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है। बहुभाषी सामग्री, रिस्पॉन्सिव डिजाइन, एआई आधारित सहायता, उन्नत खोज और विभिन्न सांस्कृतिक संस्थानों के एकीकरण जैसी सुविधाएं पोर्टल को अधिक उपयोगकर्ता-केंद्रित बनाती हैं।
- डिजिटल तकनीक के बढ़ते प्रभाव के दौर में भारतीय संस्कृति और विरासत को संरक्षित करने तथा उसे नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए ऐसे मंचों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हो रही है। इंडियन कल्चर पोर्टल 2.0 इसी दिशा में एक ऐसा डिजिटल प्रयास है, जो भारत के विविध सांस्कृतिक संसाधनों को एक मंच पर लाकर उन्हें देश के साथ-साथ दुनिया भर के लोगों के लिए अधिक सुलभ बनाने की कोशिश करता है।