New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 3rd Aug 2026, 6:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 18th Aug 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th Aug 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 15th July 2026, 8:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 3rd Aug 2026, 6:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 18th Aug 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th Aug 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 15th July 2026, 8:00 AM

पुडुचेरी में समुद्र लाल 

प्रारम्भिक परीक्षा – शैवाल प्रस्फुटन या शैवाल खिलना, 'लाल ज्वार', सुपोषण (Eutrophication), शैवाल, लाइकेन
मुख्य परीक्षा - सामान्य अध्ययन, पेपर- 3

संदर्भ

  • पुडुचेरी में 17 अक्टूबर 2023 को समुद्र लाल हो गया।

Samudra-Lal

प्रमुख बिंदु 

  • पुडुचेरी में पानी में अधिक पोषक तत्वों के परिणामस्वरूप शैवाल की प्रचुरता या खिलने के कारण समुद्र लाल हो गया।
  • इसका संभावित कारण लाल ज्वार या शैवालीय प्रस्फुटन बताया गया है।
  • लाल ज्वार एक विषैला शैवाल है। इसे समुद्री जीवन के लिए हानिकारक माना जाता है। 
  • पोषक तत्व की अधिकता के कारण पानी का रंग फीका हो जाता है जिसे 'लाल ज्वार' कहा जाता है।

शैवाल प्रस्फुटन या शैवाल खिलना

  • समुद्र या मीठे जल में अत्यधिक नाइट्रोजन और फास्फोरस के कारण कम समय में शैवाल की अत्यधिक वृद्धि होती है, जिसे शैवाल प्रस्फुटन या शैवाल खिलना भी कहा जाता है।

सुपोषण (Eutrophication)

  • सुपोषण शब्द की उत्पत्ति  ग्रीक शब्द के 'यूट्रोफॉस'(Eutrophos) से हुआ है जिसका शाब्दिक अर्थ पोषण या समृद्ध है । 
  • जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में पोषक तत्वों की अधिक मात्रा को सुपोषण (Eutrophication) कहा जाता है। 
  • सुपोषण के कारण जलाशय एवं समुद्री जल में पौधों एवं शैवालों ( algae) का विकास अधिक हो जाता है ,इस स्थिति को शैवाल प्रस्फोटन (Algae Bloom) कहा जाता  है। 
  • शैवाल प्रस्फोटन के कारण जलीय सतह की पारदर्शिता कम हो जाती है अर्थात सूर्य की रोशनी जल के आतंरिक भाग में नहीं पहुँच पाती है जिससे शैवाल के उत्पादन की जगह विघटन होने लगता है।  
  • शैवालों के विघटन या फ़ैलाने से जल में ऑक्सीजन की कमी होने लगाती है जिस कारण से छोटी-बड़ी मछलियों के विकास के लिये प्रतिकूल दशाएँ उत्पन्न हो जाती हैं। 
  • जल में प्रतिकूल दशाएँ उत्पन्न होने से जलीय जीव जैसे- मछलियों की मृत्यु होने लगाती है। 
  • इन मछलियों के मरने से जलीय पारिस्थितिक तंत्र में जल प्रदूषण जैसी समस्या उत्पन्न हो जाती है, जिससे जैव-विविधता का ह्रास होने लगता है।

सुपोषण के कारण 

  • सुपोषण एक प्राकृतिक घटना है, लेकिन इसको प्रभावित करने वाले कारकों में जलवायु परिवर्तन एवं मानवजनित कार्य भी शामिल हैं । इन कारकों में वैश्विक तापमान में वृद्धि, वर्षा की तीव्रता और वितरण में परिवर्तन और यूट्रोफिकेशन और भूरापन में वृद्धि आदि शामिल है।
  • जलीय पारिस्थितिक तंत्र में खनिजों और पोषक तत्वों, विशेष रूप से नाइट्रोजन और फास्फोरस एवं फॉस्फेट-युक्त डिटरजेन्टों, उर्वरकों और मल एवं उद्योगों और घरों से निकलने वाले कार्बनिक अपशिष्ट, रासायनिक उर्वरक आदि के मिलने के कारण उत्पन्न होता है।

सुपोषण निवारक उपाय

  • औद्योगिक और घरेलू अपशिष्ट जल का उपचार जल निकायों में अपने निर्वहन से पहले किया जाना चाहिए।
  • जल में उपस्थित अत्यधिक पोषक तत्वों को हटाने के लिए रसायन जैसे- एल्यूम, चूना, लौह और सोडियम एल्यूमिनेट आदि का प्रयोग करना चाहिए। 
  • पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण एवं शैवाल (algae) को पानी से हटाना आदि । 

शैवाल

  • शैवाल यूकैरियोटिक (Eukaryotic) जलीय (अलवणीय जल तथा समुद्री दोनों का) जीव है। 
  • यह नमीयुक्त पत्थरों/चट्टानों, मिट्टी तथा लकड़ी में भी पाए जाते हैं।

Eukaryotic
algae

  • शैवाल पृथ्वी पर प्रकाश संश्लेषण के दौरान कुल स्थिरीकृत कार्बनडाइऑक्साइड का लगभग आधा भाग अवशोषित करता है। 
  • यह प्रकाश संशलेषण द्वारा अपने आस-पास के पर्यावरण में घुलित ऑक्सीजन की मात्र में वृद्धि करता है। 
  • ये ऊर्जा के प्राथमिक उत्पादक तथा जलीय जीवों के खाद्य चक्रों का प्रमुख आधार है। 
  • भोजन के रूप में उपयोग किये जाने वाले प्रमुख शैवाल -पोरफायरा, लैमिनेरिया तथा सरगासम समुद्र  की 70 स्पीशीज (प्रजातियाँ) शामिल हैं। 
  • भूरे तथा लाल शैवाल बहुत ही अधिक कैरागीन (लाल शैवाल से) का उत्पादन करते हैं। जिनका उपयोग व्यवसायिक क्षेत्र में किया जाता है । 
  • जिलेडियम तथा ग्रेसिलेरिआ  शैवाल से एगार प्राप्त होता है जिसका उपयोग सूक्ष्म जीवों के संवर्धन में तथा आइसक्रीम और जैली बनाने में किया जाता है। 
  • क्लोरैला तथा स्प्रुलाइना एक कोशिक शैवाल हैं। इनमें प्रोटीन प्रचुर मात्रा में होता है। इसका उपयोग अंतरिक्ष यात्री भी भोजन के रूप में करते हैं। 

लाइकेन

  • लाइकेन शैवाल तथा कवक के सहजीवी जीव है। 
  • लाइकेन प्रदूषण के बहुत अच्छे संकेतक होते हैं ये प्रदूषित क्षेत्रों में नहीं उगते।

प्रारंभिक परीक्षा प्रश्न:- हाल ही में भारत के किस तटीय भाग ने शैवाल प्रस्फुटन  की घटना देखी गई  है ?

(a) गुजरात 

(b) केरल

(c) कर्नाटक

(d) पुडुचेरी

उत्तर - (d)

मुख्य परीक्षा प्रश्न:- शैवाल प्रस्फुटन क्या है ?इनसे उत्पन्न प्रमुख पर्यावरणीय समस्यायों के समाधान के उपाय सुझाएँ? 

स्रोत: THE HINDU

« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR