New
GS Foundation (P+M) - Delhi : 23rd March 2026, 11:30 AM Spring Sale UPTO 75% Off GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 15th March 2026 Spring Sale UPTO 75% Off GS Foundation (P+M) - Delhi : 23rd March 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 15th March 2026

नौ-सेना और मछुआरों के बीच बढ़ते तनाव का कारण

(प्रारंभिक परीक्षा- राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3 : भारत एवं इसके पड़ोसी- संबंध)

संदर्भ

श्रीलंका के तट पर कुछ शवों की बरामदगी के कारण तमिलनाडु में विरोध प्रदर्शन प्रारंभ हो गया है। ऐसा माना जा रहा है कि ये शव कुछ दिनों पूर्व गायब हुए मछुआरों के हैं। संघर्ष के पीछे का कारण मुख्य रूप से तमिलनाडु के तटवर्ती इलाकों में ट्रॉलर (जाली से युक्त मत्स्य जहाज और नौका) की संख्याओं में वृद्धि और मन्नार की खाड़ी में आकस्मिक रूप से संसाधनों की कमी है।

क्या है श्रीलंका की नौसेना और भारतीय मछुआरों के बीच संघर्ष का कारण?

  • पहले की ही तरह रामेश्वरम और आस-पास के तटों से मछुआरे तलाईमन्नार और कच्चातीवु तटों की ओर मछली पकड़ने के लिये जाते रहे हैं। यह क्षेत्र श्रीलंका में समृद्ध समुद्री संसाधनों के लिये प्रसिद्ध है।
  • इस समुद्री क्षेत्र में मछली व जलीय संसाधनों की अधिक उपलब्धता पिछले तीन दशकों में तमिलनाडु के तट पर मछली पकड़ने वाले ट्रॉलरों के प्रसार का कारण बनी है।
  • भारतीय मछुआरों के लिये इस क्षेत्र में कई अनुकूलताएँ भी मौजूद थी क्योंकि श्रीलंका में गृह युद्ध के समय श्रीलंकाई जल क्षेत्र तक उनकी पहुँच आसान थी। इसका कारण श्रीलंका की एल.टी.टी.ई. के विरुद्ध युद्ध में व्यस्तता थी।
  • लगभग 30 वर्षों के गृह-युद्ध के दौरान भारतीय मछुआरों की बहुत कम गिरफ्तारियाँ हुईं थी। साथ ही, युद्ध के कारण श्रीलंका के तमिल मछुआरों की अनुपस्थिति ने भी इस क्षेत्र में भारतीय ट्रॉलरों द्वारा मछली पकड़ने की घटनाओं में वृद्धि की।
  • गौरतलब है की इस दौरान श्रीलंकाई नौसेना और लिट्टे भारतीय मछुआरों के साथ मित्रवत व्यवहार करते थे और गहरे समुद्र में दुश्मन की गतिविधियों की जानकारी के लिये जासूसों के रूप में उनका इस्तेमाल करते थे। 

गृह-युद्ध के बाद की स्थिति

  • वर्ष 2009 में गृह-युद्ध की समाप्ति के साथ ही भारतीय मछुआरों पर हमले और उनकी गिरफ्तारी में वृद्धि हुई क्योंकि उन्होंने भारतीय क्षेत्र में समुद्री संसाधनों की कमी के कारण श्रीलंका के जल क्षेत्र में प्रवेश करना जारी रखा।
  • इस पूरे संघर्ष में तमिल मछुआरों पर श्रीलंकाई जल क्षेत्र में प्रवेश का आरोप तथा कच्चातीवु द्वीप के स्वामित्व का सवाल एक अन्य पहलू है कि है, जहाँ सदियों से तमिल मछुआरों को मछली पकड़ने के पारंपरिक अधिकार प्राप्त थे और यह एक अनसुलझा मुद्दा बना हुआ है।
  • वर्ष 1974 में तमिलनाडु सरकार के परामर्श के बिना इंदिरा गांधी द्वारा एक समझौते पर हस्ताक्षर किये जाने के बाद यह द्वीप श्रीलंका को सौंप दिया गया था।
  • इस समझौते के तहत भारतीय मछुआरों को आराम करने, जाल को सूखाने और सेंट एंथनी त्योहार के लिये कच्चातीवु के तट तक जाने की अनुमति है परंतु इसमें पारंपरिक रूप से मछली पकड़ने के अधिकार को सुनिश्चित नहीं किया गया है।

भारतीय तटों पर ट्रॉलरों का प्रसार और संबंधित मुद्दे

  • ट्रॉलर मछली पकड़ने के जाल से युक्त मशीनीकृत नावें हैं जो कुशलतापूर्वक और अत्यधिक मात्रा में मछली पकड़ने में सहायक होती है। मछुआरे अत्यधिक मछली की तलाश में तलाईमन्नार और कच्चातीवु की ओर ट्रॉलर से 18 किमी. तक की यात्रा करते हैं।
  • हाल के वर्षों में श्रीलंकाई जल क्षेत्र में संसाधनों की कमी और प्रतिबंधों के कारण मछुआरों को अक्सर भारी नुकसान उठाना पड़ता है। यहाँ उल्लेखनीय है कि बेहतर लाभ की उम्मीद में बहुत से लोगों ने रामेश्वरम और आसपास के तमिलनाडु तटों में ट्रॉलर खरीदना शुरू कर दिया।
  • हालाँकि, युद्ध के बाद के परिदृश्य ने तमिलनाडु तट पर व्यवसायों और आजीविका को बेपटरी कर दिया है। इस कारण मछुआरोंके लिये पुनर्वास या आजीविका के अन्य विकल्प मुहैया कराने के लिये सरकार से ट्रॉलर को पुन: खरीदने की माँग की गई है।
  • रामेश्वरम, मंडपम, पंबन जैसे छोटे तटीय क्षेत्रों में लगभग 2,500 ट्रॉलर हैं और इस प्रकार मछली, झींगा के साथ-साथ लोडिंग, मरम्मत और अन्य संबंधित उद्योगों के चलते प्रत्येक ट्रॉलर पर कम से कम दो दर्जन परिवार आश्रित हैं।
  • विदित है कि मछुआरों का मुद्दा पिछले एक दशक में तमिलनाडु में एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा रहा है। इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार हमेशा से यहाँ के राजनीतिक दलों के निशाने पर रही हैं। हालाँकि, राजनीतिक दलों द्वारा लगातार निशाना बनाए जाने के कारण श्रीलंका ने भी कई बार विरोध दर्ज कराया है।
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR
X