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अफ़्रीकी पेंगुइन

हाल ही में, एक नए अध्ययन के अनुसार सार्डिन मछली (Sardine) के भंडार में भारी गिरावट के बाद वर्ष 2004 से 2011 के बीच 60,000 से अधिक अफ्रीकी पेंगुइन की भूख से मौत हो गई।

अफ्रीकी पेंगुइन के बारे में

  • अफ्रीकी पेंगुइन (स्फेनिस्कस डेमर्सस) पेंगुइन की एक प्रजाति है जो दक्षिणी अफ्रीकी जलक्षेत्र में निवास करती है। यह उड़ने में असमर्थ होती है और समुद्री वातावरण के लिए अनुकूलित है।
  • यह प्रजाति प्राकृतिक रूप से ‘गुआनो’ (Guano: पक्षी, चमगादड़ एवं सील के मल से बना एक प्राकृतिक पदार्थ) में खोदी गई बिलों में प्रजनन करती है जो उन्हें उनके वातावरण की अत्यधिक गर्मी से बचाती है। 
  • इसकी छाती पर एक काली धारी और काले धब्बों का एक अनूठा पैटर्न होता है। साथ ही, इसकी आंखों के ऊपर गुलाबी ग्रंथियां होती हैं जो गर्मी बढ़ने के साथ-साथ और भी गुलाबी हो जाती हैं।
  • वार्षिक रूप से 21दिवसीय मोल्टिंग (बाल व पंख आदि का झड़ना) के दौरान पेंगुइन के शरीर का वजन लगभग आधा हो सकता है।
  • इस अवधि के दौरान पक्षी तट पर आ जाते हैं, उनके पंख झड़ जाते हैं और भोजन के लिए पानी में प्रवेश नहीं कर पाते हैं।
  • ये प्राय: तट से 40 किलोमीटर के दायरे में पाए जाते हैं और प्रजनन, त्वचा बदलने तथा आराम करने के लिए विभिन्न प्रकार के तटीय आवासों में तट पर आते हैं।
  • यह मुख्यत: नामीबिया के तट और दक्षिण अफ्रीका के अटलांटिक तट के किनारे पाया जाता है। प्राकृतिक रूप से इनका औसत जीवनकाल 20 वर्ष होता है।
  • वैश्विक तापन के कारण समुद्री एवं वायुमंडलीय वातावरण में होने वाले परिवर्तन अफ्रीकी पेंगुइन के आवास के लिए विनाशकारी हैं।
  • इसे आई.यू.सी.एन. (IUCN) की लाल सूची में अतिसंकट ग्रस्त (CR) के रूप में चिह्नित किया गया है।
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