New
Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th July 2026, 6:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 5th July 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 26th July 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 15th July 2026, 8:00 AM Hindi Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 6th July 2026, 6:00 PM Hindi Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 5th July 2026, 8:00 AM English Medium: (Delhi) - GS Foundation (P+M) : 26th July 2026 English Medium: (Prayagraj) - GS Foundation (P+M) : 15th July 2026, 8:00 AM

पतंगा की तीन नई प्रजातियों की पहचान

वैज्ञानिकों ने हिमालय के दुर्गम एवं ऊँचाई वाले क्षेत्रों में पतंगों (Moth) की तीन नई प्रजातियों की पहचान की है जो अब तक विज्ञान की दृष्टि से अज्ञात थीं। यह खोज हिमालयी जैव-विविधता की समृद्धि और वैज्ञानिक समझ को रेखांकित करती है। इन सभी की खोज हिमालय के ऊँचाई वाले इलाकों में की गई है जहाँ कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण जैविक सर्वेक्षण अपेक्षाकृत कम हो पाए हैं।

हिमालय से सामने आईं तीन नई पतंगा प्रजातियाँ

  • इनके नाम ‘गेलेचिया बिलोबुनकुसा (Gelechia bilobuncusa)’, ‘गेलेचिया आदि (Gelechia adi)’ और ‘इस्त्रियानिस लद्दाखेंसिस (Istrianis ladakhensis)’ है। 
    • Gelechia bilobuncusa : यह प्रजाति हिमाचल प्रदेश से दर्ज की गई है। इसका नाम इसके नर जननांग के एक भाग ‘अनकस’ के विशिष्ट द्विखंडित (दो हिस्सों वाले) आकार को दर्शाता है। इसके पंख हल्के भूरे रंग के होते हैं जिन पर अनियमित रूप से फैले काले शल्क इसकी पहचान को अलग बनाते हैं।
    • Gelechia adi : इस प्रजाति की खोज अरुणाचल प्रदेश के रामसिंग क्षेत्र में हुई। इसका नाम ऊपरी सियांग जिले में रहने वाली आदि जनजाति के सम्मान में रखा गया है। दिखने में यह बेहद आकर्षक है। इसके अग्रपंख हाथीदांत जैसे सफेद रंग के होते हैं, जिनके आधार पर गहरी काली पट्टी और त्रिकोणीय चिह्न पाए जाते हैं।
    • Istrianis ladakhensis : इसका नाम इसके मूल स्थान लद्दाख से लिया गया है। यह प्रजाति उच्च ऊँचाई वाले कठोर पर्यावरण के अनुरूप ढली हुई है। इसके पंख हल्के भूरे रंग के होते हैं जिन पर गहरे भूरे, सफेद एवं नारंगी रंग के धब्बे पाए जाते हैं। यही विशेषताएँ इसे अपने निकटतम संबंधियों से अलग पहचान देती हैं।

पतंगे के बारे में 

  • पतंगे लेपिडोप्टेरा गण के कीट होते हैं जिसमें तितलियाँ भी शामिल हैं। अब तक पतंगों की लगभग 1.6 लाख प्रजातियाँ ज्ञात हैं जो तितलियों की तुलना में कहीं अधिक हैं। 
  • ये कीट अत्यंत अनुकूलनशील होते हैं और ध्रुवीय क्षेत्रों को छोड़कर लगभग हर प्रकार के आवास में पाए जाते हैं। 
  • पतंगों के आकार में भी काफी विविधता होती है जिनेमं कुछ का पंख फैलाव मात्र 4 मिलीमीटर होता है जबकि कुछ विशाल प्रजातियों का फैलाव 30 सेंटीमीटर तक पहुँच सकता है। 
  • प्राय: पतंगों के रंग तितलियों की तुलना में हलके होते हैं जिससे उन्हें प्राकृतिक वातावरण में छिपने में मदद मिलती है। हालांकि, लूना मॉथ और एटलस मॉथ जैसी कुछ प्रजातियाँ चमकीले रंगों के लिए जानी जाती हैं। 
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
Have any Query?

Our support team will be happy to assist you!

OR