यूएनडीपी इक्वेटर पुरस्कार 2025

संदर्भ

वर्ष 2025 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) इक्वेटर पुरस्कार भारत के कर्नाटक राज्य की महिला किसान समूह ‘बीबी फातिमा स्वयं सहायता समूह’ को प्रदान किया गया है, जिसने पारंपरिक खेती को आधुनिक सतत् कृषि पद्धतियों से जोड़ते हुए एक नई मिसाल कायम की है।

यूएनडीपी इक्वेटर पुरस्कार- 2025 के बारे में (UNDP Equator Prize 2025)

  • इक्वेटर पुरस्कार 2025 की थीम ‘प्रकृति आधारित जलवायु कार्रवाई’ (Nature on Climate Action) पर आधारित रही।
  • इस वर्ष विशेष रूप से महिलाओं एवं युवाओं के नेतृत्व में चल रही परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया।
  • 103 देशों से 700 से अधिक नामांकनों में से 10 विजेताओं का चयन किया गया जो पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने, जैव-विविधता को संरक्षित करने और स्थानीय आजीविका को मजबूत करने का कार्य कर रहे हैं।

इतिहास

  • इक्वेटर पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 2002 में की गई थी। 
  • यह पुरस्कार प्रत्येक दो वर्ष में दिया जाता है और अब तक 84 देशों के 300 से अधिक सामुदायिक परियोजनाओं को सम्मानित किया जा चुका है। 
  • इनमें नेपाल के वन रक्षक, म्यांमार में मैन्ग्रोव पुनर्स्थापन करने वाली महिलाएँ और मेक्सिको के आदिवासी सहकारी संगठन शामिल हैं।

उद्देश्य

इस पुरस्कार का उद्देश्य स्थानीय एवं आदिवासी समुदायों द्वारा प्रकृति आधारित समाधानों के माध्यम से जलवायु संकट का समाधान निकालने वाले प्रयासों को प्रोत्साहित करना और उन्हें वैश्विक मंच पर पहचान दिलाना है। यह पारिस्थितिकीय न्याय, आजीविका सुधार एवं सतत विकास को बढ़ावा देता है।

कर्नाटक की महिला किसान समूह के बारे में 

  • वर्ष 2025 की इक्वेटर पुरस्कार विजेता ‘बीबी फातिमा स्वयं सहायता समूह’ एक महिला-नेतृत्व वाला समूह है, जो कर्नाटक के 30 गांवों में कार्यरत है। 
  • यह समूह 5,000 से अधिक किसानों का सहयोग करता है। इसकी नेता बीबी फातिमा को 2023 में डेक्कन हेराल्ड द्वारा ‘चेंज मेकर’ के रूप में सम्मानित किया गया था।

भूमिका

  • मिलेट (बाजरा) की मिश्रित खेती को बढ़ावा देती हैं।
  • परंपरागत बीजों का संरक्षण करती हैं।
  • सौर ऊर्जा से संचालित प्रोसेसिंग मशीनों का उपयोग करती हैं।
  • जैव विविधता बहाली, खाद्य सुरक्षा और महिलाओं-युवाओं के लिए रोजगार सृजन में योगदान देती हैं।
  • इस समूह की शुरुवात सहज समृद्ध नामक बीज संरक्षण नेटवर्क की सहायता से हुई थी।

पुरस्कार क्यों मिला

  • परंपरागत ज्ञान एवं आधुनिक टिकाऊ तकनीक का संयोजन
  • जलवायु परिवर्तन के प्रति स्थानीय समाधान की प्रभावी मिसाल
  • महिलाओं एवं युवाओं को सशक्त बनाते हुए सतत आजीविका का निर्माण
  • खाद्य संप्रभुता एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सक्रिय भूमिका

महत्व

  • यह पुरस्कार स्थानीय महिला नेतृत्व की शक्ति को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाता है। 
  • यह दिखाता है कि कैसे सामुदायिक प्रयास जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध अहम भूमिका निभा सकते हैं। 
  • इसके साथ ही, यह अन्य समुदायों को भी प्रेरित करता है कि वे स्थानीय संसाधनों और ज्ञान का उपयोग कर सतत विकास की दिशा में कदम बढ़ाएँ।
  • इस जीत के साथ बीबी फातिमा स्वयं सहायता समूह को $10,000 की पुरस्कार राशि मिलेगी। साथ ही, उन्हें UN महासभा और COP 30 (ब्राज़ील) जैसे वैश्विक मंचों पर भाग लेने का अवसर भी मिलेगा।
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