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लॉकडाउन के समय में e-NAM पोर्टल की उपियोगिता

(मुख्य परीक्षा ; सामान्य अध्ययन पेपर : 3, विषय – कृषि उत्पाद का भण्डारण, परिवहन तथा विपणन तथा सम्बंधित विषय तथा बाधाएँ, किसानों की सहायता के लिये ई-प्रौद्योगिकी)

देशव्यापी लॉकडाउन की वजह से बाजारों मेंचल रहीमंदी के बीच केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक कृषि बाजार मंच (e-NAM) में कुछ नई सुविधाओंको शामिल किया है। लेकिन क्या ये विशेषताएँ किसानों की समस्याओं को हल करेंगी यह एक बड़ा सवाल है।

e-NAMमें शामिल की गई नई सुविधाएँ :

  • वेयरहाउस-आधारित ट्रेडिंग मॉड्यूल शामिल किया गया है,जोई-एन.डब्ल्यू.आर. (electronic negotiable warehouse receipt, e-NWR) के अनुसार गोदामों से व्यापार की सुविधा प्रदान करेगा।
  • इसके आलावा एफ.पी.ओ. ट्रेडिंग मॉड्यूल भी शामिल किया गया है जहाँ ए.पी.एम.सी.में उपज को लाए बिना एफ.पी.ओ. अपने संग्रह केंद्र से ही अपनी उपज का व्यापार कर सकते हैं।

e-NAM क्या है?

  • eNAM प्लेटफॉर्म भारत में कृषि उत्पादों एवं कृषि से सम्बंधित वस्तुओं के लिये एक ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म है।
  • 14 अप्रैल 2016 को इसे सभी राज्यों में कृषि उपज बाजार समितियों (ए.पी.एम.सी.) को जोड़ने वाले पैन-इंडिया इलेक्ट्रॉनिक ट्रेड पोर्टल के रूप में लॉन्च किया गया था।
  • यह किसानों, व्यापारियों और खरीदारों को उत्पादों के ऑनलाइन व्यापार की सुविधा प्रदान करता है।
  • यह किसानों एवं व्यापारियों को उनके उत्पाद के लिये बेहतर मूल्य दिलाने में मदद करता है और उनकी उपज के सुचारू रूप से विपणन के लिये आवश्यक सुविधाएँ प्रदान करता है।

ई-एनएएम पर व्यापार :

  • वर्तमान समय में खाद्यान्नों, सब्जियों और फलों सहित 90 से अधिक वस्तुओं तथा कृषि उत्पादों को व्यापार के लिये उपलब्ध वस्तुओं की सूची में e-NAM पर सूचीबद्ध किया गया है।
  • किसान को अपनी उपज का विवरण और फसल की एक तस्वीर को प्लेटफॉर्म पर अपलोड करना होता है।यह व्यवस्था वास्तव में उपज के मूल्यांकन के लिये शामिल की गई है।

किसान e-NAMको क्यों पसंद नहीं करते?

  • अभी भी भारत में दूरस्थ गाँवों या सामान्य जगहों पर इंटरनेट की पहुँच एक बड़ा मुद्दा है जिससे आम किसानों के लिये इस पोर्टल के द्वारा व्यापार कर पाना सुगम नहीं हो पाता।
  • किसान ऑनलाइन व्यापार के बजाय भौतिक व्यापार के साथ अधिक सहज महसूस करते हैं। ख़ुद अपनी उपज को ले जाकर बेचने में उन्हें ज्यादा आसानी होती है।
  • केवल 8.42 प्रतिशतमंडियाँ ही e-NAMप्लेटफॉर्म के माध्यम से जुड़ी हुई हैं।इस वजह से इनकी देशव्यापी पहुँच नहीं है।

ग्रेडिंग के साथ समस्याएँ :

  • वर्तमान परिदृश्य में किसानों के पास छँटाई/ग्रेडिंग सुविधा हेतु या गुणवत्ता परीक्षण के लिये किसी भी प्रकार की वैज्ञानिक मशीनें उपलब्ध नहीं हैं।
  • ग्रेडिंग प्रक्रिया से किसानों को उनकी उपज का एक नमूना प्राप्त होता है। जिसका मूल्यांकन कृषि मूल्यांकनकर्ताओं द्वारा किया जाता है एवं किसान भी अपनी उपज की विशेषताएँ जान पाते हैं।
  • एक बार मूल्यांकनकर्ताओं द्वारा वर्गीकृत किये जाने पर किसी भी राज्य में कोई भी खरीदार इस रिपोर्ट को पढ़कर उपज या उत्पाद खरीदने या न खरीदने का निर्णय ले सकता है।
  • किसानों को उनके किसी भी नज़दीकी गोदाम से अपनी उपज का ग्रेडेशन कराने की अनुमति सरकार द्वारा दी गई है,जिससे दूरदराज के इलाकों से किसानों को मंडी जाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।
  • हालांकि, यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि उपज की ग्रेडिंग सभी गोदामों में की जा सकती है या नहीं।
  • अतः किसान सुविधाओं और अभीष्ट जानकारी के आभाव में e-NAMपोर्टल की तमाम सुविधाओं का लाभ नहीं ले पा रहे।

(स्रोत – द हिन्दू)

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