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उत्तर प्रदेश 'बीमारू' राज्य की श्रेणी से बाहर

प्रारंभिक परीक्षा – समसामयिकी
मुख्यपरीक्षा - UPSC, पेपर-3; UPPSC, पेपर-6

संदर्भ-

  • उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के अनुसार, उत्तर प्रदेश अब 'बीमारू' (BIMARU) राज्य की श्रेणी से बाहर निकल गया है और भारत के विकास के मार्ग में सकारात्मक योगदान देने के साथ ही 'सक्षम प्रदेश' बन रहा है।

मुख्य बिंदु-

  • मुख्यमंत्री ने कहा कि, ''2015-16 में उत्तर प्रदेश में लगभग 6 करोड़ लोग (आबादी का 37.68 % ) गरीबी रेखा से नीचे थे। सरकार के प्रयासों से 2019-20 में गरीबी रेखा से नीचे लोगों का प्रतिशत 37.68% से घटकर 22% हो गया, जो 2023 में 12% है।
  • सरकार ने ऐसे जिलों की पहचान की जो विकास की दौड़ में पिछड़ गए थे, जिनमें बहराईच, श्रावस्ती, बलरामपुर, बदांयू, सीतापुर, सिद्धार्थनगर, संभल, खीरी, हरदोई और बांदा शामिल हैं। ये सभी आकांक्षी जिले थे। इन जिलों में महत्वपूर्ण परिवर्तन आया। फिर सरकार ने 100 आकांक्षी ब्लॉकों का चयन किया और उनका विकास शुरू किया।

नीति आयोग का बहुआयामी गरीबी सूचकांक -

  • हाल ही में जारी नीति आयोग की 'राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक' के अनुसार, भारत में 2015-16 और 2019-21 के बीच 13.5 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले हैं, जिनमें सबसे तेज कमी बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा और उत्तर प्रदेश में हुई है। 

बहुआयामी गरीबी सूचकांक में उत्तर प्रदेश की स्थिति-

  • उत्तर प्रदेश ने शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, कौशल विकास, नौकरियों और आर्थिक समानता सहित अन्य मुद्दों पर नीति आयोग के मापदंडों पर प्रगति की है।
  • 36 राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और 707 प्रशासनिक जिलों से अनुमान लेने के बाद, रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश में बहुआयामी गरीबी में सबसे ज्यादा कमी बताई गई है।
  • उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार, सभी गांवों में गरीबों की संख्या तेजी से घटी है, साथ ही यू.पी. में गरीबों के स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर से संबंधित मानकों पर भी सकारात्मक परिणाम देखे गए हैं।
  • 'राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक' से पता चला है कि इस अवधि के दौरान बहुआयामी गरीबी से उबरने वाले 13.5 करोड़ लोगों में से अकेले यू.पी. में 3.43 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकले हैं।
  • रिपोर्ट के मुताबिक, पोषण से वंचित गरीबों की संख्या 2015-16 में 30.40% से घटकर 2019-21 में 18.45% हो गई।
  • इसमें कहा गया है कि बच्चों और किशोरों की मृत्यु दर में भी सुधार हुआ है, जो 2015-16 में 3.81% से गिरकर 2019-21 में 2.20% हो गई है।
  • यहां तक कि राज्य में मातृ स्वास्थ्य में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है क्योंकि मातृ मृत्यु दर 2015-16 में 25.20% से घटकर 2019-21 में 15.97% हो गई है।
  • इसके अलावा, खाना पकाने के ईंधन तक पहुंच नहीं रखने वाले गरीबों का प्रतिशत 2015-16 में 34.24% के मुकाबले 2019-21 में 17.95% है।
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि 2015-16 में 2.09% के मुकाबले 2019-21 में पीने के पानी से वंचित लोग 0.93% हैं।
  • प्रदेश में गरीबी में सर्वाधिक कमी वाले जिले महराजगंज (29.64%), गोंडा (29.55%), बलरामपुर (27.9%), कौशांबी (25.75%), लखीमपुर खीरी (25.33%), श्रावस्ती (24.42) हैं।

बीमारू (BIMARU) राज्य का अर्थ-

  • 'बीमारू ' शब्द 1980 के दशक में जनसांख्यिकी विशेषज्ञ आशीष बोस द्वारा उन राज्यों को संदर्भित करने के लिए दिया गया था, जो भारत के समग्र विकास में पिछड़ रहे थे।
  • आमतौर पर इसका अर्थ यह होता है कि ये राज्य आर्थिक विकास, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा और अन्य सूचकांकों के मामले में पिछड़े हुए हैं।
  • इसमें अक्सर बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश को संदर्भित किया जाता है।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए प्रश्न-

प्रश्न- नीचे दिए गए कथनों पर विचार कीजिए।

कथन, 1- उत्तर प्रदेश अब 'बीमारू' (BIMARU) राज्य की श्रेणी से बाहर निकल गया है।
कथन, 2- उत्तर प्रदेश ने शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, कौशल विकास, नौकरियों और आर्थिक समानता सहित अन्य मुद्दों पर नीति आयोग के मापदंडों पर प्रगति की है।


नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही उत्तर का चयन कीजिए।
(a) कथन-1 और कथन-2 दोनों सही हैं तथा कथन-2, कथन-1 की सही व्याख्या है।
(b) कथन-1 और कथन-2 दोनों सही हैं, किंतु कथन-2, कथन-1 की सही व्याख्या नहीं है।
(c) कथन-1 सही है, किंतु कथन-2 गलत है।
(d) कथन-1गलत है, किंतु कथन-2 सही है।
उत्तर- (a)


मुख्य परीक्षा के लिए प्रश्न-

प्रश्न- उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य को 'बीमारू' राज्य की श्रेणी से बाहर निकलने के लिए क्या उपाय अपनाए? क्या बीमारू राज्यों में शामिल अन्य राज्यों को भी इन उपायों को अपनाना चाहिए? समीक्षा कीजिए।

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