विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्लूएमओ) द्वारा हाल ही में जारी 'स्टेट ऑफ ग्लोबल वॉटर रिसोर्सेज 2025' रिपोर्ट के अनुसार, भारत में भूजल का स्तर लगातार गिर रहा है। रिपोर्ट में वैश्विक जल संसाधनों की स्थिति, जल भंडारण, नदियों के प्रवाह, भूजल, मिट्टी की नमी और ग्लेशियरों में हो रहे बदलावों का व्यापक आकलन किया गया है।
स्टेट ऑफ ग्लोबल वॉटर रिसोर्सेज रिपोर्ट के बारे में
स्टेट ऑफ ग्लोबल वॉटर रिसोर्सेज (एसजीडब्ल्यूआर) रिपोर्ट विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्लूएमओ) द्वारा हर वर्ष प्रकाशित की जाती है।
यह वैश्विक जल संसाधनों का मात्रात्मक आकलन प्रस्तुत करती है और विशेष रूप से जल विज्ञान संबंधी परिवर्तनशीलता तथा दीर्घकालिक रुझानों पर ध्यान केंद्रित करती है।
स्टेट ऑफ ग्लोबल वॉटर रिसोर्सेज 2025 रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु
रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में दुनिया के 42 प्रतिशत भू-भाग में जल भंडारण सामान्य से कम रहा। इसमें नदियों, जलधाराओं और झीलों, भूजल, मिट्टी की नमी, बर्फ और हिम में मौजूद पानी को शामिल किया गया है।
वैश्विक स्थलीय जल भंडारण में 2014-2016 के बाद से लगातार गिरावट दर्ज की गई है। यह लगभग एक दशक से जारी जल संकट का संकेत है।
दुनिया के सभी प्रमुख हिमनद क्षेत्रों में लगातार चौथे वर्ष बर्फ के द्रव्यमान में कमी दर्ज की गई। 2025 के जलवर्ष के दौरान ग्लेशियरों से लगभग 408 गीगाटन बर्फ का नुकसान हुआ। यह मात्रा वैश्विक समुद्र स्तर में लगभग 1.1 मिलीमीटर की वृद्धि के बराबर है।
मध्य एशिया, पश्चिमी कनाडा और अमेरिका के कुछ हिस्सों में ग्लेशियरों का नुकसान विशेष रूप से गंभीर रहा।
नदियों में भी घटा सामान्य प्रवाह
2025 पिछले 35 वर्षों में दुनिया की नदियों के लिए सबसे शुष्क वर्षों में से एक रहा। वैश्विक नदी बेसिन क्षेत्र के केवल 36 प्रतिशत हिस्से में सामान्य प्रवाह दर्ज किया गया।
वहीं, 36 प्रतिशत क्षेत्र में सामान्य से कम या बहुत कम प्रवाह रहा, जबकि 21 प्रतिशत क्षेत्र में सामान्य से अधिक या बहुत अधिक प्रवाह दर्ज किया गया। करीब 7 प्रतिशत क्षेत्र के लिए पर्याप्त आंकड़े उपलब्ध नहीं थे।
डब्लूएमओ के अनुसार, 2019 से 2025 के बीच लगातार सात वर्षों में सामान्य नदी प्रवाह वाले नदी बेसिनों का हिस्सा 1991 के बाद सबसे कम रहा। इस अवधि में सामान्य प्रवाह वाले बेसिनों का हिस्सा 34 प्रतिशत से 38 प्रतिशत के बीच रहा, जबकि 1991-2020 के दौरान इसका औसत 46 प्रतिशत था।
विश्व के कई हिस्सों में भूजल संकट
2022 से 2025 के बीच अमेरिका महाद्वीप के कुछ हिस्सों, यूरोप, मध्य पूर्व, भारत, दक्षिणी अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में लगातार भूजल की कमी दर्ज की गई। कई क्षेत्रों में भूजल के अत्यधिक दोहन को इसका प्रमुख कारण माना गया है।
2025 में दुनिया भर में निगरानी किए गए लगभग दो-तिहाई कुओं में भूजल स्तर ऐतिहासिक सामान्य स्थिति से अलग पाया गया। 2024 की तुलना में स्थिति सुधार की ओर जाने के बजाय और अधिक कमी की ओर बढ़ी।
दुनिया के भूजल निगरानी केंद्रों में से 34 प्रतिशत ने 2025 में सामान्य से कम या बहुत कम भूजल स्तर दर्ज किया। 2024 में यह आंकड़ा 25 प्रतिशत था। वहीं, लगभग 31 प्रतिशत निगरानी केंद्रों पर भूजल स्तर सामान्य से अधिक या बहुत अधिक पाया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में एशिया और अफ्रीका में मिलकर दुनिया की कम से कम आधी जल-संबंधी चरम घटनाएं दर्ज हुईं और इनसे जुड़ी रिपोर्ट की गई मौतों में 80 प्रतिशत से अधिक इन्हीं दो महाद्वीपों में हुईं।
भारत से संबंधित आँकड़े
भारत में 2025 के दौरान स्थलीय जल भंडारण सामान्य से कम रहा। इसका प्रभाव विशेष रूप से देश के उत्तरी हिस्सों में अधिक दिखाई दिया। हालांकि, भारत में जलाशयों में पानी की आवक सामान्य से अधिक से लेकर बहुत अधिक रही। दिसंबर-फरवरी और जून-अगस्त, दोनों आकलन अवधियों में मिट्टी की नमी भी सामान्य से अधिक या बहुत अधिक दर्ज की गई।
देश की प्रमुख नदी प्रणालियों में गंगा, गोदावरी, कृष्णा और सिंधु में 2025 के दौरान सामान्य से अधिक से लेकर बहुत अधिक जल प्रवाह दर्ज किया गया। हालांकि, नदियों में अपेक्षाकृत अधिक पानी होने के बावजूद भारत के गहरे जल भंडार में व्यापक सुधार नहीं हुआ।
डब्लूएमओ ने भारत में 2022 से 2025 के बीच लगातार भूजल की कमी दर्ज की। देश के कई हिस्सों में भूजल स्तर सामान्य से कम या बहुत कम रहा, जिसका प्रभाव विशेष रूप से उत्तर-पश्चिमी भारत में व्यापक रूप से देखा गया।