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जेनोफ्रीज अपातानी

भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) के शोधकर्ताओं ने अरुणाचल प्रदेश के टेल वन्यजीव अभयारण्य में सींग वाले मेढक की एक नई प्रजाति की खोज की गई है। 

ZENOFREEZ

  • राज्य की अपातानी जनजाति के नाम पर मेंढक की इस प्रजाति का नामकरण ‘जेनोफ्रीज अपातानी’ (Xenophrys apatani) किया गया है। 
    • जंगली वनस्पतियों एवं जीवों के संरक्षण में इनके योगदान को मान्यता देते हुए यह नाम रखा गया है।
  • हाल के दिनों में टेल वन्यजीव अभयारण्य में शोधकर्ताओं द्वारा खोजी गई मेंढकों की यह पांचवीं नई प्रजाति है।
    • वर्ष 2017 में ओडोराना अरुणाचलेंसिस की खोज
    • वर्ष 2019 में लिउराना मेंढकों की तीन नई प्रजातियों की खोज : लिउराना हिमालयाना, लिउराना इंडिका व लिउराना मिनुटा
  • टेल के अलावा शोधकर्ताओं ने वर्ष 2022 में पश्चिमी अरुणाचल से कैस्केड मेंढकों की तीन नई प्रजातियों की खोज की थी। इनके नाम अमोलोप्स टेराओर्किस, अमोलोप्स चाणक्य एवं अमोलोप्स तवांग हैं।
  • शोधकर्ताओं के अनुसार, भारत में जेनोफ्रीस प्रजातियों का जैव-भौगोलिक वितरण पूर्वी हिमालय और इंडो-बर्मा जैव-विविधता हॉटस्पॉट में है।
  • यह खोज भारत में माओसन सींग वाले मेंढक (जेनोफ्रीस माओसोनेसिस) के बारे में वर्ष 2019 में ZSI, शिलांग के शोधकर्ताओं द्वारा दी गई एक गलत रिपोर्ट में सुधार करती है। 

अपतानी जनजाति के बारे में

  • निवास स्थान : अरुणाचल प्रदेश के निचले सुबनसिरी जिले में जीरो घाटी क्षेत्र में
  • सांस्कृतिक विशेषता : विभिन्न त्यौहारों, जटिल हथकरघा डिजाइनों, बेंत व बांस शिल्प में कौशल और बुल्यान नामक जीवंत पारंपरिक ग्राम परिषदों के लिए प्रसिद्ध
  • प्रमुख त्योहार : 
    • ड्री : अत्यधिक फसल पैदावार और सभी मानव जाति की समृद्धि के उद्देश्य से प्रार्थना के लिए 
    • म्योको : मित्रता को त्योहार  
  • विशिष्ट कृषि : चावल एवं मछली दोनों को एक साथ उगाने की परंपरा
  • संरक्षण : यूनेस्को द्वारा अपाटानी घाटी को इसकी ‘अत्यधिक उच्च उत्पादकता’ और पारिस्थितिकी को संरक्षित करने के अनूठे तरीके के लिए विश्व धरोहर स्थल के रूप में शामिल करने का प्रस्ताव 

टेल वन्यजीव अभयारण्य

  • टेल वन्यजीव अभयारण्य का नाम ‘टेल’ (Tale) से लिया गया है, जो जंगली प्याज (एलियम हुकरी) की एक किस्म है। यह अभयारण्य के भीतर स्थित टेल घाटी में प्रचुर मात्रा में पाई जाती है। 
  • यह अभयारण्य निचले सुबनसिरी जिले में निचले सुबनसिरी एवं कामले जिले के बीच में स्थित है। यह सुबनसिरी, सिपु एवं पंगे नदियों के बीच स्थित है। यह पक्षी विज्ञानियों (Ornithologists) और तितली प्रेमियों के लिए प्रसिद्ध है।
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