• Sanskriti IAS - अखिल मूर्ति के निर्देशन में

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में बौद्ध गुफाएं 

  • 30th September, 2022

(प्रारंभिक परीक्षा के लिये -  बौद्ध धर्म से सम्बंधित स्थल, कलचुरी राजवंश, बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व)
(मुख्य परीक्षा के लिये:सामान्य अध्यन प्रशन पत्र 1 -भारतीय विरासत और संस्कृति)

चर्चा में क्यों ?

  • हाल ही में बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व में बौद्ध और हिन्दू धर्म से जुड़े प्राचीन स्मारकों की खोज की गयी।
  • इस खोज के दौरान 26 मंदिर, 26 गुफाएं, दो मठ, 24 शिलालेख, 46 मूर्तियां, अन्य बिखरे हुए अवशेष और 19 जल संरचनाएं दर्ज की गईं।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा 26 बौद्ध गुफाओं और स्तूपों की खोज की गयी, जो दूसरी शताब्दी से पांचवी शताब्दी के बीच की हैं।
  • गुफाओं में चैत्य और पत्थरों के बिस्तर भी पाए गए है जो बौद्ध धर्म की महायान शाखा से सम्बंधित हैं। 
  • इसके अलावा ब्राह्मी लिपि के 24 शिलालेख भी मिले हैं, जो दूसरी से पांचवी शताब्दी के बीच के है। 
  • शिलालेखों में मथुरा, कौशाम्बी, पावता, वेजाभद्र और सप्तअनैरिका जैसे स्थलों का तथा भीमसेन, पोथासिरी और भट्टदेव नामक राजाओं का भी उल्लेख है। 
  • कलचुरी काल के 9 वीं से 11वीं शताब्दी के मध्य के 26 मंदिरों तथा दो शैव मठों के अवशेष भी मिले हैं। 
  • कलचुरी राजवंश, गुजरात, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश  के कुछ हिस्सों में शासन करता था।
  •  इसी अवधि की एक एकाश्मक वराह मूर्ति भी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में प्राप्त हुई है। जो संभवत: विश्व की सबसे बडी वराह मूर्ति है। 
  • साथ ही भगवान विष्णु के 10 अवतारों से सम्बंधित अन्य एकाश्मक प्रस्तर मूर्तियाँ भी मिली है।
  • यहाँ गुप्त कालीन कला से सम्बंधित कुछ अवशेष भी प्राप्त हुए हैं, जैसे द्वार स्तम्भ तथा गुफाओं में नक्काशी आदि। 
  • बांधवगढ़ से खदान स्थल, ईंट भट्ठा और जल उपचार संबंधी संरचनाएं भी प्राप्त हुई हैं।

बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व

  • बांधवगढ़ टाइगर रिज़र्व मध्यप्रदेश के उमरिया जिले में विंध्य पर्वत श्रंखला पर स्थित है।
  • इस उद्यान में एक मुख्य पहाड़ है जो 'बांधवगढ़' कहलाता है उसी के नाम पर इसका नाम बांधवगढ़ पड़ा। 
  • इसे वर्ष 1968 में राष्ट्रीय उद्यान के रूप में अधिसूचित किया गया था तथा प्रोजेक्ट टाइगर के तहत वर्ष 1993 में इसे एक बाघ आरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया।
  • बाघ के अलावा यहाँ तेंदुए, जंगली हाथी, बायसन, बारहसिंघा, हिरण के साथ-साथ स्तनधारियों की 37 से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
  • बांधवगढ़ में पक्षियों की 250 तथा तितलियों की 80 प्रजातियाँ पायी जाती है।
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