महाराष्ट्र में गणेशोत्सव को मिला राज्य उत्सव का दर्जा

चर्चा में क्यों ?

  • 10 जुलाई 2025 को महाराष्ट्र विधानसभा में राज्य के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री आशीष शेलार ने यह ऐतिहासिक घोषणा की कि अब सार्वजनिक गणेशोत्सव को "राज्य उत्सव" का दर्जा दिया गया है। 
  • यह निर्णय महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय मंच पर प्रतिष्ठित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

उद्देश्य और महत्व

  • अब राज्य सरकार द्वारा गणेशोत्सव के आयोजनों को आर्थिक सहायता और प्रोत्साहन मिलेगा।
  • महाराष्ट्र के गाँवों और शहरों में उत्सव का खर्च सरकार वहन करेगी, जिससे अधिक समावेशिता और पारंपरिकता सुनिश्चित होगी।
  • यह कदम राज्य की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने का प्रयास है।

इतिहास की पृष्ठभूमि: लोकमान्य तिलक की प्रेरणा

  • सन् 1893 में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने सार्वजनिक गणेशोत्सव की नींव रखी थी।
  • इसका उद्देश्य था – ब्रिटिश शासन के खिलाफ जनजागरण और एकता की भावना का संचार करना।
  • यह त्योहार अब महाराष्ट्र के सांस्कृतिक स्वाभिमान, भाषा और समुदाय का प्रतीक बन चुका है।

गणेशोत्सव: धर्म से आगे सामाजिक और सांस्कृतिक आंदोलन

  • "गणेशोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मराठी अस्मिता, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और सामाजिक एकता का उत्सव है।"
  • इस पहल से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि यह त्योहार केवल आस्थावान कार्यक्रम न रहकर सामाजिक व रचनात्मक चेतना का केंद्र बने।

भविष्य की दिशा: राज्य सरकार की जिम्मेदारियाँ

क्षेत्र

सरकार की भूमिका

उत्सव प्रचार

विभिन्न माध्यमों से गणेशोत्सव को प्रचारित करना

आयोजन प्रबंधन

मंडलों को सजावट, ध्वनि, मंच व्यवस्था आदि के लिए सहायता

सांस्कृतिक समर्थन

पारंपरिक कला, संगीत, नाटक, लोकनृत्य को मंच देना

सामुदायिक भागीदारी

स्थानीय लोगों की भागीदारी और रोजगार सृजन

समुदाय और मंडलों की प्रतिक्रिया

  • गणेश मंडलों और सांस्कृतिक संस्थाओं ने इस निर्णय का स्वागत किया है।
  • इससे स्थानीय कलाकारों, मूर्तिकारों, नाटक मंडलियों को बढ़ावा मिलेगा।
  • आर्थिक सहयोग और सरकारी मान्यता से आयोजनों की गरिमा और पहुंच दोनों बढ़ेंगी।

प्रश्न :-गणेशोत्सव को हाल ही में किस राज्य सरकार ने "राज्य उत्सव" का दर्जा दिया है?

(a) कर्नाटक

(b) गुजरात

(c) महाराष्ट्र

(d) तमिलनाडु

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