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हेलिकेज़ (Helicase)

संदर्भ 

  • हाल ही में यूनाइटेड किंगडम (यू.के.) के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि एसएलडी3–एसएलडी7 (Sld3-Sld7) प्रोटीन सक्रिय एमसीएम2–7 (MCM2-7) हेलिकेज़ की पहचान करते हैं तथा डीएनए प्रतिकृति की शुरुआत के लिए सीडीसी45 (Cdc45) प्रोटीन को आकर्षित करते हैं।  

हेलिकेज़ क्या है? 

  • हेलिकेज़ (Helicase) आणविक जीवविज्ञान में पाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण एंजाइम है, जो मुख्य रूप से डीएनए प्रतिकृति, डीएनए क्षति की मरम्मत तथा ट्रांसक्रिप्शन जैसी जैविक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 

  • इसे एक प्रकार का मोटर प्रोटीन कहा जाता है, क्योंकि यह कोशिका की ऊर्जा मुद्रा एटीपी (एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट) का उपयोग करके दोहरी-सूत्री डीएनए (डीएसडीएनए) की दोनों परस्पर जुड़ी हुई श्रृंखलाओं को अलग करता है। इससे आनुवंशिक सूचना की प्रतिलिपि बनाने के लिए आवश्यक एकल-सूत्री डीएनए उपलब्ध होता है।  

हेलिकेज़ की कार्यप्रणाली

  • डीएनए से जुड़ाव: सबसे पहले हेलिकेज़ डीएनए के एक विशिष्ट स्थान से जुड़ता है। इसके बाद यह डीएनए अणु के साथ आगे बढ़ते हुए उसकी दोहरी संरचना को खोलने की प्रक्रिया शुरू करता है।
  • एटीपी से ऊर्जा प्राप्त करना: हेलिकेज़ अपने कार्य के लिए एटीपी (ATP) से ऊर्जा प्राप्त करता है। एटीपी से प्राप्त ऊर्जा हेलिकेज़ की संरचना में परिवर्तन उत्पन्न करती है, जिसके फलस्वरूप वह डीएनए की दोनों श्रृंखलाओं के बीच के बंधनों को कमजोर कर उन्हें अलग करने में सक्षम होता है।
  • प्रतिकृति फोर्क का निर्माण: डीएनए की दोनों श्रृंखलाओं के अलग होने पर एक वाई-आकार की संरचना बनती है, जिसे प्रतिकृति फोर्क (Replication Fork) कहा जाता है। यही वह स्थान है जहाँ डीएनए की नई प्रतियाँ बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
  • डीएनए में तनाव: जब हेलिकेज़ डीएनए को लगातार खोलता हुआ आगे बढ़ता है, तो प्रतिकृति फोर्क के आगे डीएनए में अत्यधिक घूर्णी तनाव उत्पन्न हो सकता है। यदि इस तनाव को नियंत्रित न किया जाए, तो डीएनए उलझ या क्षतिग्रस्त हो सकता है।
  • टोपोआइसोमेरेज़ की भूमिका: इस समस्या को नियंत्रित करने के लिए टोपोआइसोमेरेज़ (Topoisomerase) एंजाइम कार्य करते हैं। ये डीएनए में उत्पन्न अतिरिक्त मरोड़ और तनाव को कम करते हैं तथा डीएनए को अत्यधिक उलझने या टूटने से बचाते हैं।
  • नई डीएनए श्रृंखला का निर्माण: हेलिकेज़ द्वारा डीएनए की दोनों मूल श्रृंखलाओं को अलग किए जाने के बाद, डीएनए प्रतिकृति तंत्र की अन्य एंजाइमीय मशीनरी इन खुली हुई श्रृंखलाओं को टेम्पलेट (Template) के रूप में इस्तेमाल करती है।

वस्तुतः इसके आधार पर प्रत्येक मूल श्रृंखला के अनुरूप एक नई पूरक डीएनए श्रृंखला (Complementary DNA Strand) तैयार होती है। इस प्रकार मूल डीएनए की आनुवंशिक सूचना की प्रतिलिपि तैयार हो जाती है।

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