संदर्भ
हाल ही में संसद द्वारा ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल, 2026 पारित किया गया है। यह विधेयक ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स एक्ट, 2021 को निरस्त करता है और इसका मुख्य उद्देश्य न्यायपालिका तथा कार्यपालिका के बीच लगभग एक दशक से चले आ रहे टकराव को समाप्त कर सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप न्यायाधिकरणों (Tribunals) की शासन प्रणाली को पुनर्गठित करना है।
ट्रिब्यूनल क्या हैं?
- ट्रिब्यूनल अर्ध-न्यायिक (quasi-judicial) निकाय हैं, जिन्हें विवादों का त्वरित और विशेष समाधान प्रदान करने तथा नियमित अदालतों के मुकदमों के बोझ को कम करने के लिए स्थापित किया गया है।
सरकार-न्यायपालिका संघर्ष का एक दशक (कालक्रम)
- 2017: वित्त अधिनियम के तहत केंद्र को ट्रिब्यूनल नियुक्तियों और सेवा शर्तों के नियम बनाने की शक्ति दी गई।
- 2019 (रोजर मैथ्यू मामला): सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने न्यायिक स्वतंत्रता को कमजोर करने वाले इन नियमों को खारिज कर दिया।
- 2020: केंद्र द्वारा नई अधिसूचना जारी करने पर सर्वोच्च न्यायालय ने 5 साल के कार्यकाल सहित कुछ संशोधनों का सुझाव दिया।
- 2021: सुझावों को दरकिनार करते हुए केंद्र ने अध्यादेश लाकर कार्यकाल 4 वर्ष किया, न्यूनतम आयु 50 वर्ष तय की और चयन समिति के लिए दो नामों का पैनल देना अनिवार्य किया। अदालत द्वारा इन्हें खारिज किए जाने के बावजूद संसद ने ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स एक्ट, 2021 पारित कर इसे पुनः लागू कर दिया।
- नवंबर 2025 का सर्वोच्च न्यायालय का फैसला: न्यायालय ने 2021 के अधिनियम को "अस्वीकार्य विधायी अतिक्रमण" करार देते हुए खारिज कर दिया। अदालत ने 4 वर्ष के कार्यकाल को "मेधा-विरोधी" माना और चार महीने के भीतर राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग गठित करने का निर्देश दिया।
ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल, 2026 के प्रमुख प्रावधान
राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग (NTC):
- यह विधेयक निम्नलिखित कार्यों के लिए एक राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग की स्थापना करता है।
आयोग के कार्य:
- रिक्तियों के लिए चयन प्रक्रिया का संचालन करना, ट्रिब्यूनलों के प्रदर्शन की समीक्षा करना, शिकायतों की जांच की निगरानी करना और 'राष्ट्रीय ट्रिब्यूनल डेटा ग्रिड' विकसित करना।
संरचना:
- एक अध्यक्ष (सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज या हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश), दो न्यायिक सदस्य और कम से कम 25 वर्ष के अनुभव वाले दो तकनीकी सदस्य।
- इनका कार्यकाल 5 वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक (जो भी पहले हो) होगा।
चयन प्रक्रिया में बदलाव:
- एक खोज-सह-चयन समिति प्रत्येक रिक्ति के लिए केवल एक नाम और एक प्रतीक्षा सूची की सिफारिश करेगी (2021 के दो-नाम वाले पैनल सिस्टम को समाप्त कर दिया गया है)।
- सरकार को सिफारिश मिलने के 3 महीने के भीतर नियुक्ति करनी होगी।
कार्यकाल और आयु सीमा:
- अध्यक्ष और सदस्य 5 वर्ष के कार्यकाल के लिए नियुक्त होंगे।
- अधिकतम आयु सीमा: अध्यक्ष के लिए 70 वर्ष और सदस्यों के लिए 67 वर्ष निर्धारित की गई है।
निष्कासन के आधार:
- दिवालियापन, नैतिक अधमता से जुड़ा अपराध, अक्षमता, पद का दुरुपयोग या कार्यालय के बाहर सशुल्क कार्य करना।
विधेयक की सीमाएं (कार्यपालिका का प्रभाव)
- यद्यपि यह विधेयक सर्वोच्च न्यायालय की मुख्य चिंताओं (जैसे कार्यकाल और चयन) को दूर करता है, फिर भी कार्यपालिका का प्रभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है क्योंकि केंद्र सरकार:
- आयोग के अध्यक्ष, सदस्यों और सचिव की नियुक्ति करती है।
- आयोग को वित्तीय अनुदान प्रदान करती है।
- योग्यताओं, सेवा शर्तों, वेतनों और निष्कासन प्रक्रियाओं पर नियम बनाने की शक्ति अपने पास रखती है।
निष्कर्ष
ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल, 2026 ट्रिब्यूनल शासन को सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों और योग्यता-आधारित नियुक्तियों के अनुरूप ढालने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, फंडिंग और नियम-निर्माण पर प्रशासनिक नियंत्रण बने रहने के कारण कार्यकारी निगरानी और न्यायिक स्वतंत्रता के बीच का अंतर्निहित तनाव अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।