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रुपए (INR) के कठोर मुद्रा में परिवर्तन की स्थिति

प्रारंभिक परीक्षा- कठोर मुद्रा, नरम मुद्रा
मुख्य परीक्षा – सामान्य अध्ययन, पेपर-3

संदर्भ-

  • 19 नवंबर,2023 को थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) ने कहा कि भारत को पहले एक मध्यम आय वाला देश बनना चाहिए, फिर रुपया को एक हार्ड करेंसी बनाना चाहिए। तब तक भारत को स्थानीय मुद्रा में वैश्विक व्यापार के निपटान को बढ़ावा देना चाहिए।

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करेंसी के हार्ड करेंसी में बदलने की प्रक्रिया-

  • GTRI के अनुसार,किसी मुद्रा को हार्ड करेंसी में बदलना एक जटिल प्रक्रिया होती है, जो कई महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करती है 
    1. आर्थिक स्थिरता सर्वोपरि है; किसी देश को कम और स्थिर मुद्रास्फीति, निरंतर विकास और एक संतुलित व्यापार वातावरण का निर्माण करना चाहिए। 
    2. स्थिरता अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और व्यापारिक साझेदारों के बीच विश्वास को मजबूत करती है। 
    3. प्रभावी राष्ट्रीय ऋण प्रबंधन (effective national debt management), उचित ब्याज दर नीतियां, सरकार और केंद्रीय बैंक द्वारा सशक्त राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों के कार्यान्वयन सहित आरक्षित मुद्रा की स्थिति भी अच्छी होनी चाहिए।
  • उपर्युक्त स्थिति सामान्यतः तब प्राप्त होती है जब किसी मुद्रा का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है, पारस्परिक रूप से उस पर भरोसा किया जाता है और वह विश्वास हासिल करता है। 
  • थिंक टैंक ने कहा कि राजनीतिक स्थिरता भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, क्योंकि यह बाहरी संस्थाओं को देश की आर्थिक स्थिरता के बारे में आश्वस्त करती है। 

हार्ड करेंसी का महत्त्व-

  • अंतरराष्ट्रीय लेनदेन के लिए दुनिया भर में हार्ड करेंसी को व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है और इन्हें एक विश्वसनीय और स्थिर भंडार का आदर्श माना जाता है। 
  • किसी मुद्रा की हार्ड करेंसी के रूप में उपस्थिति उसके जारीकर्ता देश की स्थिरता, विश्वसनीयता और आर्थिक ताकत को दर्शाती है। 
  • अमेरिकी डॉलर सबसे प्रमुख हार्ड करेंसी है, जिसे सामान्यतः दुनिया की प्राथमिक आरक्षित मुद्रा माना जाता है। इसका उपयोग अधिकांश अंतरराष्ट्रीय लेनदेन में और अधिकांश वस्तुओं के लिए बेंचमार्क मुद्रा के रूप में किया जाता है। 
  •  विश्व की प्रमुख हार्ड करेंसी और अंतर्राष्ट्रीय लेनदेन एवं भंडार में उनकी अनुमानित वैश्विक हिस्सेदारी को इस प्रकार देखा जा सकता है- अमेरिकी डॉलर (60 प्रतिशत), यूरो (20 प्रतिशत), जापानी येन (5-6 प्रतिशत), ब्रिटिश पाउंड स्टर्लिंग (4-5 प्रतिशत), स्विस फ़्रैंक (1 प्रतिशत), कैनेडियन डॉलर (2-3 प्रतिशत) और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (2-3 प्रतिशत), स्विस फ़्रैंक (1 प्रतिशत)।

INR की स्थिति-

  • INR को हार्ड करेंसी में बदलने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण प्रणालीगत बदलावों की आवश्यकता होगी, जो संभावित रूप से भारत की अर्थव्यवस्था को अस्थिर कर सकता है। 
  • भारत के लिए तब तक इंतजार करना अधिक विवेकपूर्ण हो सकता है, जब तक कि उसकी अर्थव्यवस्था INR को एक हार्ड करेंसी बनाने से पहले मध्यम-आय की स्थिति तक नहीं पहुंच जाती। 
  • वर्तमान में भारत को स्थानीय मुद्रा में व्यापार निपटान करने पर काम करना चाहिए। 
  • यह दृष्टिकोण भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिर और मजबूत करेगा, जिससे परिवर्तन आसान और कम जोखिम भरा हो जाएगा। 
  • ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के अनुसार, ''फिलहाल, भारत के लिए भारतीय रुपये को एक हार्ड करेंसी बनाने के लिए परिस्थितियां अभी उपयुक्त नहीं हैं।'' 
  • वर्तमान में रुपये की अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में भूमिका सीमित है, खासकर जब इसकी तुलना अमेरिकी डॉलर, यूरो या चीनी युआन जैसी स्थापित मुद्राओं से की जाती है। 

INR को हार्ड करेंसी बनाने के लिए क्या करना होगा-

  • हार्ड करेंसी में परिवर्तन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में रुपये को पूंजी खाते पर पूर्ण परिवर्तनीय बनाना होगा, जो हार्ड करेंसी की एक प्रमुख विशेषता है। 
  • GTRI के सह-संस्थापक अजय श्रीवास्तव के अनुसार; यह कदम जटिलताओं से भरा हुआ है क्योंकि अर्थव्यवस्था को परिवर्तनशील पूंजी प्रवाह के संपर्क में लाना पड़ेगा, जो मुद्रा को अस्थिर कर सकता है। 
  • भारत को अपने भुगतान संतुलन को भी प्रबंधित करना होगा, विशेषतः व्यापार घाटे को कम करना होगा। लगातार होता व्यापार घाटा रुपये पर नीचे की ओर दबाव डालता है, जिससे मुद्रा स्थिरता की दिशा में प्रयास कमजोर हो जाते हैं।
  • रुपये के मूल्य पर प्रभाव डाले बिना बड़े पैमाने पर मुद्रा रूपांतरण के प्रबंधन के लिए गहन और तरल विदेशी मुद्रा बाजार विकसित करना होगा
  • इसके लिए विनिमय दर प्रबंधन में एक अच्छा संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता है; अत्यधिक हस्तक्षेप या बहुत कम हस्तक्षेप क्रमशः कृत्रिम मूल्यांकन या उच्च अस्थिरता का कारण बन सकता है। 
  • बैंकिंग और गैर-बैंकिंग क्षेत्रों को शामिल करते हुए वित्तीय प्रणाली में सुधार करना भी आवश्यक है, क्योंकि परिवर्तन के दौरान अस्थिरता का जोखिम है। 
  • नीतिगत बदलावों के अतिरिक्त रुपये को हार्ड करेंसी का दर्जा देना भारत की अर्थव्यवस्था और वित्तीय प्रणालियों में अंतरराष्ट्रीय धारणा और विश्वास में बदलाव की मांग भी करता है, जो एक जटिल और लंबी प्रक्रिया है।

भारत के प्रयास-

  • जुलाई 2022 में, भारतीय रिज़र्व बैंक ने भारतीय रुपये (INR) में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार लेनदेन के निपटान के लिए एक प्रणाली शुरू की। 
  • GTRI के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य अफ्रीका और दक्षिण एशिया के उन देशों की सहायता करना था जो कोविड के बाद निर्यात और पर्यटन में गिरावट और अमेरिकी प्रतिबंधों से प्रभावित विदेशी मुद्रा की कमी से जूझ रहे थे। 
  • यह प्रणाली बहुत प्रभावी नहीं रही है, क्योंकि इसमें विदेशी मुद्राओं को दो बार परिवर्तित करने की आवश्यकता होती है - पहले अमेरिकी डॉलर में और फिर भारतीय रुपये में
  • इस दोहरे रूपांतरण के परिणामस्वरूप 3-4 प्रतिशत का नुकसान होता है। 
  • लेन-देन का मूल्य, चूँकि इन देशों में रुपये के साथ सीधी विनिमय दरें नहीं हैं, जिससे यह प्रक्रिया कम आकर्षक हो जाती है। 
  • स्थानीय मुद्रा का प्रयोग व्यापार मुद्राओं को दो बार परिवर्तित करने की आवश्यकता को समाप्त करके लेन देन लागत को कम करेगा। 
  • इससे न केवल बैंकों को ऋण पत्र जारी करने के लिए एक विश्वसनीय संदर्भ मिलेगा बल्कि व्यवसायों को मुद्रा की अस्थिरता को बेहतर ढंग से समझने में भी मदद मिलेगी। 
  • मुद्रा अधिशेष वाले देश ऐसे बहु-मुद्रा विनिमय मंच में अपने अधिशेष को अन्य मुद्राओं के लिए अधिक कुशलता से विनिमय कर सकते हैं।

कठोर मुद्रा (Hard Currency)-

  • हार्ड करेंसी मुद्रा का एक स्थिर और विश्वसनीय रूप है, जो सरकार द्वारा जारी की जाती है और दुनिया भर में व्यापक रूप से स्वीकार की जाती है।
  • इस करेंसी में विश्व स्तर पर कारोबार किया जाता है और अपेक्षाकृत स्थिर माना जाता है।

कठोर मुद्रा को प्रभावित करने वाले कारक-

  • संबंधित देश की कानूनी और नौकरशाही संस्थाओं की विश्वसनीयता
  • संबंधित देश की कानूनी और नौकरशाही संस्थाओं की स्थिरता
  • संबंधित देश की राजनीतिक और वित्तीय स्थिति
  • इसकी क्रय शक्ति की दीर्घकालिक स्थिरता
  • देश के जारीकर्ता केंद्रीय बैंक की नीतिगत मुद्रा
  • सामाजिक और सैन्य स्थिरता
  • भ्रष्टाचार का स्तर
  • हार्ड करेंसी के उदाहरण- अमेरिकी डॉलर (यूएसडी), यूरो (EURO), कैनेडियन डॉलर (CAD), ब्रिटिश पाउंड स्टर्लिंग (GBP), जापानी येन (JPY), ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD), स्विस फ़्रैंक (CHF)

नरम मुद्रा (Soft Currency) 

  • नरम मुद्रा मुद्रा का एक अस्थिर रूप है, जो अपरिवर्तनीय है।
  • इसमें अनियमित रूप से उतार-चढ़ाव होता रहता है तथा अन्य मुद्राओं के मुकाबले मूल्यह्रास होता है।

नरम मुद्रा को प्रभावित करने वाले कारक-

  • जिन मुद्राओं को "नरम" माना जाता है वे उन देशों की मुद्राएं हैं जो युद्ध, मुद्रास्फीति, भ्रष्टाचारगरीबी और राजनीतिक अस्थिरता से ग्रस्त हैं। 
  • नरम मुद्राएं अस्थिर, अवांछनीय होती हैं और इनमें अक्सर उतार-चढ़ाव होता रहता है।
  • नरम मुद्राओं के उदाहरण- वेनेजुएला बोलिवर (वीईएफ), जिम्बाब्वे डॉलर (ZWL), सीरियाई पाउंड (एसवाईपी), तुर्की लीरा (TRY), पश्चिम अफ़्रीकी फ़्रैंक (सीएफए), मिस्र पाउंड (ईजीपी)

प्रारंभिक परीक्षा के लिए प्रश्न-

प्रश्न-  निम्नलिखित में से कौन- सा कारक हार्ड करेंसी को नकारात्मक रूप से नहीं प्रभावित करता है?

(a) संबंधित देश की कानूनी और नौकरशाही संस्थाओं की स्थिरता

(b) संबंधित देश की राजनीतिक और वित्तीय स्थिति

(c) संबंधित देश की क्रय शक्ति की दीर्घकालिक स्थिरता

(d) संबंधित देश की मुद्रास्फीति

उत्तर- (d)

मुख्य परीक्षा के लिए प्रश्न-

प्रश्न- भारत के लिए भारतीय रुपये को एक हार्ड करेंसी बनाने के लिए परिस्थितियां अभी उपयुक्त क्यों नहीं हैं? विवेचना कीजिए?



स्रोत- indian express
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