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Final Result - UPSC CSE Result, 2025 GS Foundation (P+M) - Delhi : 1st April 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 3rd April 2026, 5:30PM Final Result - UPSC CSE Result, 2025 GS Foundation (P+M) - Delhi : 1st April 2026, 11:30 AM GS Foundation (P+M) - Prayagraj : 3rd April 2026, 5:30PM

ड्रोन डिफेंस डोम 

(प्रारंभिक परीक्षा- राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ, सामान्य विज्ञान)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्यययन प्रश्नपत्र- 3 : विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स)

संदर्भ 

हाल ही में, हैदराबाद स्थितग्रेने रोबोटिक्स' ने ड्रोन डिफेंस डोम (ड्रोन रक्षा गुंबद) को डिजाइन और विकसित करने का दावा किया है। 

महत्त्वपूर्ण बिंदु 

  • यह पूर्णतया स्वदेशी 'एकीकृत, वितरित और विस्तृत क्षेत्र के लिये स्वायत्त ड्रोन सुरक्षा प्रणाली है। इसे 'इंद्रजाल' नाम दिया गया है। यह मानव रहित हवाई वाहन (UAV), आने वाले हथियार, युद्धक सामग्रियों और इसी तरह के खतरों से सुरक्षा प्रदान करता है। एक इंद्रजाल प्रणाली 1000-2000 वर्ग किमी. क्षेत्र की सुरक्षा कर सकता है।
  • इंद्रजाल का डिज़ाइन कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और रोबोटिक्स द्वारा संचालित 10 आधुनिक तकनीकों के संयोजन का लाभ उठाते हुए रक्षा बलों को स्वायत्तता प्रदान करने के सिद्धांत पर आधारित है।
  • इंद्रजाल चौबीसों घंटे वास्तविक समय में स्वतंत्र रूप से पहचानने, मूल्यांकन करने, निर्णय लेने और कार्य करने में सक्षम है। यह प्रणाली एकल, एकाधिक या विभिन्न यू..वी. वाले संयोजनों, युद्धक सामग्रियों और इस तरह के सभी खतरों का मुकाबला करने में सक्षम है। साथ ही, इसे हथियारों के वर्तमान बुनियादी ढाँचे के साथ एकीकृत भी किया जा सकता है।

लाभ 

  • आधुनिक युद्ध .आई. और रोबोटिक्स द्वारा संचालित हैं और इंद्रजाल इसके अनुरूप है। जम्मू-कश्मीर में हाल के ड्रोन हमले और चीन सीमा के आसपास के घटनाक्रम यू..वी. और स्मार्ट स्वार्म जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के उपयोग का संकेत करतीं हैं। ऐसी स्थिति में देश को मैनुअल हथियारों या अकेलेप्वाइंट बेस्ड हथियारों' पर निर्भर रहने का जोखिम नहीं उठाना चाहिये।
  • अधिक लागत पर 300-प्वाइंट डिफेंस एंटी-यू..वी. सिस्टम को स्थापित करने की बजाय निर्बाध कनेक्टिविटी के साथ लगभग आधा दर्जन इंद्रजाल प्रणाली कुछ महीनों के भीतर ही कच्छ के रण से कश्मीर तक पूरी पश्चिमी सीमा को सुरक्षित करने में सक्षम हो सकती है। 

आगे की राह 

  • एक बार मंजूरी मिलने के बाद 90-120 दिनों में 100-250 वर्ग किमी. और तीन महीने में 2,000 वर्ग किमी. तक का एक पायलट प्लांट स्थापित किया जा सकता है। पुरानी प्रणाली के साथ काम करने और अपने डाटा का उपयोग करके नई प्रणाली को तैनात किया जा सकता है।
  • सामूहिक हमले की स्थिति में पारंपरिक सुरक्षा तंत्र चरमरा सकता है और सेंसर डाटा प्रसंस्करण के अपने पारिस्थितिकी तंत्र के साथ एक .आई.-सक्षम स्वायत्त डोम प्रणाली आगे का भविष्य है।
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