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फिनटेक विभाग का गठन: आवश्यकता एवं महत्त्व

  • 18th January, 2022

(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-3, आर्थिक विकास; भारतीय अर्थव्यवस्था, समावेशी विकास तथा इससे उत्पन्न विषय)

संदर्भ

वित्तीय तकनीकी सेवाओं के विनियमन एवं विस्तारण के लिये भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा 4 जनवरी, 2022 को भुगतान एवं निपटान प्रणाली विभाग (DPSS) के अधीन फिनटेक विभाग की स्थापना की गई है। फिनटेक विभाग प्रशासनिक रूप से केंद्रीकृत प्रशासनिक प्रभाग (CAD) से जुड़ा होगा। विदित है कि वर्ष 2018 में फिनटेक को एक वित्तीय प्रौद्योगिकी इकाई के रूप में स्थापित किया गया था।

फिनटेक क्या है?

  • फिनटेक, प्रौद्योगिकियों का उपयोग करने वाले स्टार्ट-अप एवं अन्य कंपनियाँ हैं, जो वित्तीय प्रणालियों के निर्माण एवं वित्तीय सेवाओं के वितरण को प्रौद्योगिकी के प्रयोग के माध्यम से अधिक दक्ष बनाती हैं। ये वित्तीय सेवाओं, जैसे- उपभोक्ता द्वारा बचत, संग्रह, ऋण, निवेश, मौद्रिक भुगतान, धन हस्तांतरण एवं धन की सुरक्षा को प्रभावित करती हैं।
  • वित्तीय स्थिरता बोर्ड के अनुसार, फिनटेक तकनीकी रूप से सक्षम एक वित्तीय नवाचार है, जो नए व्यापार मॉडलों, अनुप्रयोगों, प्रक्रियाओं या ऐसे समान प्रभाव वाले उत्पादों के रूप में वित्तीय बाज़ारों, संस्थानों और वित्तीय सेवाओं को प्रभावित करता है।

फिनटेक विभाग के कार्य

  • यह विभाग फिनटेक विषय पर गहन शोध के लिये एक फ्रेमवर्क प्रदान करेगा। यह फिनटेक क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देगा तथा इससे जुड़ी चुनौतियों एवं अवसरों की पहचान कर उन्हें संबोधित करेगा।
  • प्रमुख वित्तीय संस्थानों व बैंक के दायरे में आने वाले फिनटेक संबंधी कार्यों में नवाचारों को बढ़ावा देने वाले सभी मामले, फिनटेक विभाग के माध्यम से निपटाए जाएंगे।
  • विभाग द्वारा फिनटेक पर अंतर-नियामक समन्वय और आंतरिक समन्वय से जुड़े सभी मामलों को निपटाया जाएगा।

फिनटेक विभाग की आवश्यकता

  • वित्तीय वर्ष 2021 के दौरान भारत में लगभग 44 बिलियन डिजिटल भुगतान किये गए हैं। यह विगत वर्षों की तुलना में सर्वाधिक है, किंतु लेन-देन का कुल मूल्य विगत वर्ष की तुलना में घट गया है, जो नीतिगत उपायों को सुदृढ़ करने की ओर इशारा करता है।
  • ऑनलाइन भुगतान में बढ़ती धोखाधड़ी ने भी फिनटेक संबंधी सुदृढ़ ढाँचे की आवश्यकता पर बल दिया। एन.सी.आर.बी. के आँकड़ों (2020) के अनुसार, साइबर अपराधों में सर्वाधिक मामले वित्तीय धोखाधड़ी (क्रेडिट कार्ड/डेबिट कार्ड, ए.टी.एम., ऑनलाइन बैंकिंग, ओ.टी.पी. धोखाधड़ी) से संबंधित थे।
  • विगत वर्ष कार्ड-आधारित आवर्ती भुगतानों में व्यवधान देखा गया, जिससे ग्राहकों को आवर्ती भुगतान या 5,000 रुपए तक की ऑनलाइन सदस्यता के लिये अपने स्थायी निर्देशों को फिर से अधिकृत करना पड़ा।

महिला उद्यमियों की राह होगी आसान

  • महिलाओं के नेतृत्व वाले एम.एस.एम.ई. के लिये फिनटेक भागीदारी में उत्प्रेरक की भूमिका निभाएगा। वस्तुतः इससे महिला श्रम बल भागीदारी दर में वृद्धि होगी।
  • महिला उद्यमियों के लिये फिनटेक विभाग एक निर्देशिका तैयार कर सकता है। साथ ही, विभाग भारत में फिनटेक नेटवर्क की व्यापक उपलब्धता को देखते हुए महिला उद्यमियों के लिये एक मज़बूत नेटवर्क तैयार करेगा।

 फिनटेक क्षेत्र से जुड़ी कुछ पहलें

  • कार्ड के माध्यम से डिजिटल भुगतान की कमियों को दूर करने के लिये आर.बी.आई. ने ‘कार्ड टोकनाइजेशन’ तकनीक को लागू किया है। हाल ही में, कार्ड टोकन के लिये समय सीमा को 1 जनवरी, 2022 से बढ़ाकर 30 जून, 2022 कर दिया गया है।
  • 2020 में, केंद्रीय बैंक ने डिजिटल भुगतान में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिये नई अम्ब्रेला संस्थाओं (NUE) के लिये दिशानिर्देश जारी किया।
  • ऑनलाइन भुगतान में धोखाधड़ी को कम करने के लिये आर.बी.आई. ने व्यापारियों द्वारा अपने प्लेटफॉर्म पर उपयोगकर्ताओं के कार्ड विवरण को संगृहीत करने पर रोक लगा दी है।
  • हाल ही में, आर.बी.आई. ने सक्रिय इंटरनेट कनेक्शन की आवश्यकता के बिना ऑफ़लाइन चैनलों के माध्यम से भुगतान की अनुमति प्रदान की है।
  • भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम द्वारा विकसित ‘असंरचनात्मक पूरक सेवा डाटा’ (USSD),  इंटरनेट की आवश्यकता के बिना मोबाइल फोन से बैंकिंग सेवाओं तक पहुँच प्रदान करता है।

निष्कर्ष

वित्तीय सेवाओं और बैंकिंग संस्थाओं को अधिक दक्ष बनाने में तकनीक अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, परंतु इसमें कुछ जोखिम भी अंतर्निहित होते हैं। ऐसे में, ग्राहकों को बेहतर सुविधाएँ प्रदान करने एवं उन्हें वित्तीय धोखाधड़ी से बचाने के लिये मज़बूत विनियामक तंत्र की आवश्यकता होती है। फिनटेक विभाग का गठन इस दिशा में एक सकारात्मक कदम है। अतः फिनटेक विभाग को साइबर जोखिमों संबंधी नियामक अनुपालन एवं प्रबंधन को प्राथमिकता देनी चाहिये। साथ ही, साइबर जोखिम निवारण ढाँचे का नियमित रूप से परीक्षण करने की भी आवश्यकता है।

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