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स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के प्रयास

  • 16th April, 2021

(प्रारंभिक परीक्षा : राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ तथा लोकनीति, सामाजिक विकास संबंधी मुद्दे)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र– 2 : सरकारी नीतियों के कार्यान्वयन तथा स्वास्थ्य संबंधित सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय)

संदर्भ

बजट सत्र 2021-22 में ‘राष्ट्रीय सहबद्ध और स्वास्थ्य देख-रेख वृत्ति आयोग विधेयक, 2020’ (The National Commission for Allied and Healthcare Professions Bill, 2020 – NCAHP) संसद द्वारा पारित किया गया। जिसके माध्यम से स्वास्थ्य कानून और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में बदलाव किये जा सकते हैं। गौरतलब है कि इस विधेयक को सर्वप्रथम वर्ष 2015 में स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत किया गया था।

महत्त्वपूर्ण प्रावधान

  • इसमें संबद्ध और स्वास्थ्य पेशेवरों द्वारा शिक्षा और सेवाओं के मानकों के विनियमन तथा उसके रख-रखाव का प्रावधान किया गया है।
  • यह फिजियोथेरेपिस्ट, ऑप्टोमेट्रिस्ट, न्यूट्रिशनिस्ट, चिकित्सीय प्रयोगशाला पेशेवर, रेडियोथेरेपी टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल्स जैसे 50 से अधिक व्यवसायों को मान्यता देता है, जिनमें वर्तमान समय तक व्यापक नियामक तंत्र का अभाव है।
  • इस विधेयक की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता ‘व्यवसायों के वर्गीकरण की अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली’ (International System of Classification of Occupations - ISCO ) का उपयोग कर संबद्ध पेशेवरों का वर्गीकरण करना है। यह वैश्विक गतिशीलता की सुविधा देता है और ऐसे पेशेवरों के लिये बेहतर अवसर प्रदान करता है, जो लगभग 8-9 लाख मौजूदा संबद्ध और स्वास्थ्य-संबंधी पेशेवरों को लाभान्वित करते हैं।
  • इसका एक अन्य उद्देश्य राष्ट्रीय संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा व्यवसायों के लिये एक केंद्रीय वैधानिक निकाय स्थापित करना है, जो एक राष्ट्रीय आयोग के रूप में कार्य करेगा। इसके अलावा, पेशेवर परिषदों द्वारा नीतियों और मानकों का प्रारूप तैयार करना, पेशेवरों का आचरण विनियमित करना, योग्यता निर्धारित करना तथा विभिन्न आयु वर्ग में होने वाली अधिकांश बीमारियों का एक केंद्रीय रजिस्टर तैयार करना भी प्रमुख उद्देश्य हैं। इन्हीं को ध्यान में रखकर स्वास्थ्य नीतियों का निर्माण किया जाएगा।
  • इसमें सरकार ने राज्यों की माँगों और सिफारिशों को शामिल करने के लिये सभी संभव उपाय किये हैं एवं इस विधेयक के अंतर्गत राज्य परिषदों के लिये स्वायत्त निकायों के माध्यम से प्रमुख कार्यों को निष्पादित करने का प्रावधान है। जिसमें राज्य परिषद् कार्यान्वयन एजेंसियों तथा राष्ट्रीय आयोग को नीति-निर्माण का दायित्व सौंपा गया है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017

उद्देश्य

‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017’ का प्राथमिक उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में लोगों के विश्वास को मज़बूत करना है। इसमें एक ऐसी प्रणाली विकसित करने पर भी ज़ोर दिया गया है, जो रोगी-केंद्रित, कुशल, प्रभावी और सभी के लिये सुलभ हो।

जीवन प्रत्याशा और स्वस्थ जीवन

  • जन्म के समयजीवन प्रत्याशा को5 वर्ष से बढ़ाकर वर्ष 2025 तक 70 वर्ष करने का लक्ष्य रखा गया है
  • कुल प्रजनन दर(TFR) को वर्ष 2025 तक राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर 1% पर लाया जाना है।
  • नियमित ट्रैकिंग करने के लिये ‘विकलांगता समायोजित जीवन वर्ष सूचकांक’ (Disability Adjusted Life Years DALY) निर्मित करना तथा वर्ष 2022 तक एक आयु वर्ग में प्रचलन में रहने वाली बीमारियों को वर्गीकृत (Categorize) करना शामिल है।

मृत्यु दर

  • वर्ष 2025 तक पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर को ‘23 बच्चे प्रति हजार जीवित जन्म’ पर लाना है, जबकि मातृ मृत्यु दर को वर्ष 2020 तक 167 से घटाकर 100 पर लाना है।
  • शिशु मृत्यु दर (Infant Mortality Rate – IMR) को वर्ष 2019 तक 28 तक लाना है, जो वर्ष 2016 में ‘34 बच्चे प्रति 1000 जीवित जन्म’ थी
  • वर्ष 2025 तक नवजात मृत्यु दर को 16 और जन्म दर के ‘एकल अंक’ में लाना घोषित किया गया है।

रोगों के प्रसार में कमी

  • वर्ष 2025 तक दृष्टिहीनता के प्रसार को घटाकर 25 प्रति 1000 करना तथा रोगियों की संख्या को वर्तमान स्तर से घटाकर एक-तिहाई करना शामिल है।
  • वर्ष 2025 तक हृदय संबंधी रोग, मधुमेह या पुराने श्वसन रोग तथा कैंसर जैसी बीमारियों से होने वाली समयपूर्व मृत्यु दर को 25% तक कम करने के लक्ष्य रखा गया है।
  • क्षयरोग (टी.बी.) के नए मामलों में 85% तक की कमी लाना और इस स्थिति को बनाये रखते हुए वर्ष 2025 तक क्षयरोग का उन्मूलन करना।

स्वास्थ्य सेवाओं का प्रसार

  • वर्ष 2025 तक, सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का उपयोग मौजूदा स्तर से 50% बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
  • वर्ष 2025 तक 90% बच्चों का जन्म प्रशिक्षित दाइयों या नर्सों की देख-रेख में कराने का लक्ष्य घोषित किया है।
  • इसके अंतर्गत वर्ष 2025 तक एक वर्ष की उम्र के90% बच्चों का पूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित करना भी शामिल है

स्वास्थ्य से संबंधित क्रॉस सेक्टोरल लक्ष्य

  • तंबाकू के इस्तेमाल के वर्तमान प्रसार को वर्ष 2020 तक 15% तथा वर्ष 2025 तक 30% तक कम करना निर्धारित किया गया है।
  • इस नीति के अंतर्गत, वर्ष 2025 तक पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में बौनेपन(Stunting) की समस्या को 40% तक कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
  • वर्ष 2020 तक सभी की स्वच्छ पेयजल तथा स्वच्छता तक पहुँच सुनिश्चित करना शामिल है।

स्वास्थ्य व्यय

  • वर्ष 2020 तकराज्यों को अपने बजट का 8% स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करना होगा
  • स्वास्थ्य व्यय को सकल घरेलू उत्पाद के 15% से बढ़ाकर वर्ष 2025 तक 2.5% करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
  • वर्ष 2025 तक परिवारों के स्वास्थ्य व्यय में वर्तमान स्तर से 25% की कमी लाना शामिल है। 

‘स्वास्थ्य नीति, 2017’ पर्यावरण में सुधार के लिये सात प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर समन्वित कार्रवाई की पहचान करती है–

  • स्वच्छ भारत अभियान।
  • संतुलित, स्वस्थ आहार और नियमित व्यायाम।
  • तंबाकू, शराब और मादक द्रव्यों के सेवन को हतोत्साहित करना।
  • यात्री सुरक्षा– रेल और सड़क यातायात दुर्घटनाओं के कारण होने वाली मौतों को रोकना।
  • निर्भया नारी– लैंगिक हिंसा में कमी लाना।
  • कार्य स्थल पर तनाव में कमी और सुरक्षा में वृद्धि करना।
  • आंतरिक (Indoor) और बाहरी (Outdoor) वायु प्रदूषण को कम करना।

निष्कर्ष

आधुनिक जीवनशैली का तनाव, तेज़ी से बढ़ता शहरीकरण, बढ़ती हुई पुरानी गैर-संचारी बीमारियाँ आदि स्वास्थ्य क्षेत्र में चिंता का विषय बनी हुई हैं। वर्तमान विधेयक इन चिंताओं से निपटने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायेगा।

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