• Sanskriti IAS - अखिल मूर्ति के निर्देशन में

भारत में कॉर्पोरेट राष्ट्रवाद की बढ़ती प्रवृत्ति

  • 17th December, 2020

(प्रारम्भिक परीक्षा : राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की सामयिक घटनाएँ; मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन, प्रश्नपत्र – 3 : भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोज़गार से सम्बंधित विषय)

संदर्भ

हाल ही में, भारत की कम्पनी ‘फ्यूचर रिटेल’ ने अमेरिका की कम्पनी ‘अमेज़न’ पर ‘21वीं सदी की ईस्ट इंडिया कम्पनी जैसा व्यवहार करने’ और ‘अमेरिका में बिग ब्रदर की भूमिका अदा करने’ का आरोप लगाया है।

कॉर्पोरेट राष्ट्रवाद

  • ‘कॉर्पोरेट राष्ट्रवाद’ का उपयोग राजनीतिक दर्शन और आर्थिक सिद्धांत के रूप में किया जाता है। इसके अंतर्गत एक विशेष प्रकार की राजनीतिक संस्कृति को बढ़ावा दिया जाता है। ऐसा माना जाता है कि कॉर्पोरेट राष्ट्रवाद में राज्य की प्राथमिकता व्यक्ति या नागरिक न होकर की ‘कॉर्पोरेट समूह’ होते हैं।
  • इस सिद्धांत के अनुसार, कॉर्पोरेट समूह के हित राष्ट्रहित के समान होते हैं तथा राज्य घरेलू कॉर्पोरेट हितों के प्रति पक्षपाती रवैया अपनाकर, घरेलू निगमों को विदेशी स्वामित्व से संरक्षण प्रदान करता है।

भारत में कॉर्पोरेट राष्ट्रवाद की बढ़ती प्रवृति

  • भारत में पिछले कुछ समय से व्यावसायिक सौदों के रूप विदेशी कम्पनियों द्वारा किये गए अधिग्रहण को औपनिवेशिक शक्ति (ईस्ट इंडिया कम्पनी) के पुनरागमन के रूप में देखा जा रहा है।
  • हाल ही में, अमेज़न-रिलायंस-फ्यूचर कॉर्पोरेट रिटेल विवाद सुर्खियों में रहा, जिसमें विदेशी कम्पनियों के लिये विलय और अधिग्रहण (Merger & Acquisition) की नीति के तहत अल्पसंख्यक अंशधारकों के अधिकार तथा इकाइयों की ऋण संरचना में नियमों के अनुपालन सम्बंधी उल्लंघन को आधार बनाकर व्यावसायिक सौदों पर रोक लगाई गई।
  • भारत में घरेलू डिजिटल भुगतान एप्लीकेशन लगातार लॉन्च हो रहे हैं, जबकि ‘व्हाट्सएप पे’ एप्लीकेशन अपेक्षित अनुमोदन प्राप्त करने के बावजूद सर्वोच्च न्यायलय में लम्बित है।
  • भारत में चीनी कम्पनियों के सम्बंध में तो कॉर्पोरेट राष्ट्रवाद की भावनाएँ और स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती हैं। भारत सरकार ने पिछले कुछ महीनों से भारत में चीनी निवेश पर गम्भीर प्रतिबंध लगाए हैं।
  • जैसा कि कुछ समय पहले चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर भारत में आक्रामक जन प्रतिरोध के कारण भारत में संचालित चीन के लगभग सभी ऐप को प्रतिबंधित किया गया था। साथ ही, चीन से एफ.डी.आई. के लिये पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता को लागू करते हुए चीनी खरीददारों को सार्वजनिक खरीद अनुबंधों में भाग लेने पर भी प्रतिंबंध लगाया गया।

कॉर्पोरेट राष्ट्रवाद की व्यवहार्यता

  • एक सम्प्रभु राष्ट्र होने के नाते भारत अपने अधिकारों के तहत आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने और घरेलू व्यवसायों को संरक्षण प्रदान करने के लिये प्रतिबद्ध है। विशेष रूप से महामारी के समय में आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियानों का दृढ़ता से प्रोत्साहन देना, भारत के एक सम्प्रभु शक्ति होने का वास्तविक परिचायक है।
  • इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारत में कार्यरत कई विदेशी कम्पनियों के व्यावसायिक मॉडल संदिग्ध हैं, अतः देश की आंतरिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस प्रकार की इकाइयों को प्रतिबंधित करना आवश्यक है।
    कॉर्पोरेट राष्ट्रवाद के नकारात्मक पक्ष
  • निगमों की विदेशी पहचान को आधार बनाकर भारत में उनके संचालन तथा उनके द्वारा की गई अधिग्रहण प्रक्रियाओं पर रोक लगाने से भारत की वैश्विक स्तर पर आकर्षक निवेश स्थान की छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
  • गूगल, फेसबुक, अमेज़न तथा कई अन्य विदेशी कम्पनियाँ भारत में व्यापक स्तर पर रोज़गार प्रदान करती हैं। कॉर्पोरेट राष्ट्रवाद जैसी प्रवृत्तियों के बढ़ने से भारत में रोज़गार संकट और गहरा सकता है।
  • अनुचित आधारों पर विदेशी कम्पनियों को प्रतिबंधित करने से देश में प्रतिस्पर्धी वातावरण में गिरावट आएगी, जो अंततः उपभाक्ताओं और सम्बंधित कम्पनी में कार्य करने वाले कर्मचारियों के शोषण की सम्भावनाओं को बढ़ाता है।
  • कॉर्पोरेट राष्ट्रवाद जैसी प्रवृत्तियों से संरक्षणवाद को बढ़ावा मिलता है, जो अंततः व्यापार युद्ध का रूप ले सकता है।
« »
  • SUN
  • MON
  • TUE
  • WED
  • THU
  • FRI
  • SAT
CONNECT WITH US!

X
Classroom Courses Details Online / live Courses Details Pendrive Courses Details PT Test Series 2021 Details
X