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PK2 : एक औषधीय अणु

(प्रारंभिक परीक्षा- सामान्य विज्ञान)
(मुख्य परीक्षा, सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र- 3 : विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग, इस क्षेत्र में भारतीयों की उपलब्धियाँ; देशज व नई प्रौद्योगिकी का विकास)

संदर्भ

हाल ही में, आई.आई.टी. मंडी के शोधकर्ताओं ने एक औषधीय अणु (Drug Molecule) की पहचान की है, जिसका उपयोग मधुमेह के उपचार में किया जा सकता है। इस औषधीय अणु को ‘पी.के.2’ (PK2) नाम दिया गया है। इस शोध से संबंधित निष्कर्ष जर्नल ऑफ बायोलॉजिकल कैमिस्ट्री में प्रकाशित किये गए हैं। 

मधुमेह 

  • शरीर की अन्‍तःस्रावी ग्रंथियों द्वारा हॉर्मोन्‍स आदि के स्राव में कमी या अधिकता से अनेक रोग उत्‍पन्‍न हो जाते है, जिनमें मधुमेह, थायरॉइड, मोटापा, कद संबंधी समस्‍याएँ, अवांछित बालों का उगना आदि शामिल है।
  • इंसुलिन नामक हॉर्मोन की कमी या इसकी कार्यक्षमता में कमी आने से डायबि‍टीज मेलिटस (Diabetes Mellitus- रक्त शर्करा से संबंधित बिमारियों का समूह) होता है। रक्त शर्करा स्तर की तुलना में अग्न्याशय की बीटा कोशिकाओं द्वारा अपर्याप्त मात्रा में इंसुलिन स्राव को मधुमेह कहते हैं।
  • इंसुलिन के स्राव में कई जटिल जैव-रासायनिक प्रक्रियाएँ शामिल होती हैं। ऐसी ही एक प्रक्रिया में कोशिकाओं में मौजूद जी.एल.पी.1आर. (Glucagon Like Peptide 1 Receptor : GLP1R) नामक प्रोटीन संरचनाएँ शामिल होती हैं। यह इंसुलिन के स्राव को सक्रिय (Triggers) करती है।

उपचार की वर्तमान स्थिति 

  • वर्तमान में मधुमेह के उपचार के लिये उपयोग की जाने वाली दवाएँ, जैसे- एक्सैनाटाइड (Exenatide) और लिराग्लूटाइड (Liraglutide), GLP1 अणु के सदृश प्रक्रिया का अनुसरण करती हैं तथा इंसुलिन के स्राव को सक्रिय करने के लिये GLP1R से आबद्ध होती हैं।
  • हालाँकि, इन दवाओं को इंजेक्शन के रूप में दिया जाता है, जो महंगा और अस्थाई उपचार है। वैज्ञानिकों के अनुसार PK2 अणु टाइप 1 और टाइप 2 दोनों प्रकार के मधुमेह के लिये अधिक प्रभावी, स्थाई एवं सस्ती दवा उपलब्ध करा सकता है।   

PK2 अणु के चुनाव का कारण 

  • शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने GLP1R के साथ बेहतर बंधन/आबद्ध क्षमता वाले तीन अणुओं- PK2, PK3, और PK4 की पहचान की किंतु बेहतर घुलनशीलता के कारण PK2 को चुना गया।
  • अध्ययन के दौरान पाया गया कि PK2 को जठरांत्र पथ (Gastrointestinal Tract) द्वारा तेजी से अवशोषित किया गया, जिसका तात्पर्य यह है कि इसे इंजेक्शन के बजाय मुख से दिया जा सकता है।
  • चूहों को दिये जाने के बाद PK2 के अणु उनके यकृत (Liver), वृक्क (Kidney) व अग्न्याशय (Pancreas) में पाए गए किंतु हृदय (Heart), फेफड़े (Lungs) और प्लीहा (Spleen) में इसके कोई अवशेष नहीं मिले।
  • इसकी कुछ मात्रा मस्तिष्क में पाई गई, जिससे पता चलता है कि यह अणु रक्त-मस्तिष्क अवरोध (Blood-Brain Barrier) को पार करने में सक्षम हो सकता है। 

लाभ

  • यह अणु अग्न्याशय से इंसुलिन के स्राव को प्रारंभ करने में सक्षम है। संभवत: इसका प्रयोग मुख से दी जाने वाली (Orally Administered Medicine) मधुमेह की दवा के रूप में किया जा सकता है।
  • यह इंसुलिन के स्राव में वृद्धि करने के अतिरिक्त बीटा कोशिका की क्षति को रोकने तथा क्षति की प्रक्रिया को रिवर्स करने में भी सक्षम पाया गया। विदित है कि इंसुलिन उत्पादन के लिये बीटा कोशिका आवश्यक है। इस प्रकार यह टाइप 1 और टाइप 2 मधुमेह दोनों के लिये प्रभावी हो सकता है।
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